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बच्चों के लिए विटामिन D कितनी मात्रा, उम्र के हिसाब से, और वह ख़ुराक जो बच्चों को कभी नहीं

शिशु को रोज़ 400 IU चाहिए, और वह माँ के दूध से नहीं मिलता। और 60,000 IU का सैशे बच्चे को डॉक्टर के बिना कभी नहीं।

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NutraHerbal संपादकीय टीम11 min read

Reviewed for accuracy and claims compliance: दावा-अनुपालन समीक्षा (claims review)

बच्चों में विटामिन D की मात्रा के बारे में दो बातें हैं जो माता-पिता को आम तौर पर नहीं बताई जातीं, और दोनों ज़रूरी हैं।

पहली: माँ के दूध में विटामिन D कम होता है।

यह दूध की कमी नहीं है, माँ का दूध हर दूसरी चीज़ के लिए सबसे अच्छा है। पर विटामिन D उसका मज़बूत पक्ष नहीं है, और इसीलिए दुनिया भर में शिशुओं के लिए अलग से विटामिन D देने की सलाह है।

दूसरी, और यह चेतावनी है: 60,000 IU का सैशे बच्चे को कभी अपने मन से न दें।

वह एक वयस्क का सुधार-ख़ुराक (correction dose) है, और भारत में बच्चों में विटामिन D की विषाक्तता के मामले इसी तरह हुए हैं।

तो यह लेख संख्याओं पर है, उम्र के हिसाब से मात्रा, और वह सीमा जिसके आगे यह ख़तरनाक है।

यह जानकारी है, चिकित्सकीय सलाह नहीं। बच्चे की ख़ुराक बाल रोग विशेषज्ञ तय करते हैं, और नीचे दी गई संख्याएँ सामान्य मार्गदर्शन हैं, नुस्खा नहीं। और विटामिन D तथा कैल्शियम बच्चों में क्यों ज़रूरी हैं, इस पर हमने अलग लेख लिखा है।

पहले: इकाई समझ लें

विटामिन D की मात्रा IU (International Unit) में लिखी जाती है, और कभी माइक्रोग्राम (µg) में।

और बदलने का हिसाब सीधा है:

40 IU = 1 माइक्रोग्राम।

तो 400 IU = 10 µg। और 600 IU = 15 µg।

यह जानना ज़रूरी है क्योंकि कुछ पैक IU में लिखते हैं और कुछ µg में, और माता-पिता दोनों को एक मान लेते हैं।

रोकथाम की मात्रा, उम्र के हिसाब से

ये वे मात्राएँ हैं जो स्वस्थ बच्चे में कमी रोकने के लिए दी जाती हैं।

शिशु, 0 से 12 महीने

रोज़ 400 IU।

और यह हर शिशु के लिए है, स्तनपान करने वाले शिशु के लिए ज़रूरी, और यही इस खंड की मुख्य बात है।

क्यों: माँ के दूध में विटामिन D कम होता है, जब तक माँ ख़ुद भरपूर न हो, और भारत में माँएँ अक्सर नहीं होतीं। तो शिशु को उस दूध से पर्याप्त विटामिन D नहीं मिलता।

और फ़ॉर्मूला दूध पीने वाले शिशु में: फ़ॉर्मूला में विटामिन D मिलाया जाता है। तो डॉक्टर उसकी मात्रा के हिसाब से तय करते हैं, अगर बच्चा अच्छी मात्रा में फ़ॉर्मूला ले रहा है, तो अतिरिक्त कम चाहिए।

कब से शुरू: जन्म के कुछ दिनों के भीतर, और यह आपके बाल रोग विशेषज्ञ का फ़ैसला है।

और यहाँ एक व्यावहारिक बात: शिशु के लिए हमेशा ड्रॉप्स का रूप, और बोतल पर प्रति ड्रॉप मात्रा ज़रूर पढ़ें, क्योंकि “400 IU प्रति ड्रॉप” और “1000 IU प्रति ड्रॉप” दोनों बाज़ार में हैं, और डिब्बे एक जैसे दिखते हैं। यह सबसे आम ग़लती है।

1 से 18 साल

रोज़ 400 से 600 IU, रोकथाम के लिए।

और यह मार्गदर्शन स्रोत के हिसाब से थोड़ा बदलता है, कुछ 400 कहते हैं, कुछ 600। दोनों इसी श्रेणी में हैं और दोनों सुरक्षित हैं।

और भारत में जहाँ धूप कम मिलती है, शहर, फ़्लैट, स्कूल-ट्यूशन, ढका हुआ शरीर, वहाँ यह और ज़्यादा लागू होता है।

और यहाँ एक बात जो माता-पिता को चौंकाती है: खिड़की से आती धूप से विटामिन D नहीं बनता, क्योंकि काँच UVB को रोक देता है। और सुबह 7 बजे की धूप से भी लगभग नहीं बनता, क्योंकि सूरज नीचा होता है। जो बनता है वह लगभग 11 से 2 के बीच बनता है, जो स्कूल का समय है।

इस पर हमने अलग, विस्तृत लेख लिखा है।

किशोर, और यहाँ एक अतिरिक्त कारण है

किशोरावस्था में हड्डी सबसे तेज़ बनती है। जीवनभर की हड्डी का एक बड़ा हिस्सा इन सालों में जमा होता है।

तो यह वह खिड़की है जिसमें कमी का असर सबसे ज़्यादा पड़ता है, और वह बाद में वापस नहीं मिलता।

और किशोर ही सबसे कम धूप लेते हैं और सबसे कम दूध पीते हैं।

कमी का इलाज, और यह अलग बात है

अगर जाँच में कमी मिली है, तो मात्रा ज़्यादा होती है और वह डॉक्टर तय करता है, बच्चे की उम्र, वज़न और स्तर के हिसाब से।

हम यहाँ जानबूझकर इलाज की संख्याएँ नहीं दे रहे, और इसकी वजह साफ़ है: बच्चों में उच्च-मात्रा वाली विटामिन D की ख़ुराक, वज़न के हिसाब से, और निगरानी के साथ दी जाती है। इंटरनेट से उठाई गई संख्या से वह काम नहीं होता।

जो आम बात कहने लायक़ है:

इलाज की अवधि सीमित होती है, कुछ हफ़्ते, और उसके बाद रख-रखाव की मात्रा पर आ जाते हैं।

और इलाज के बाद दोबारा जाँच होती है।

और कैल्शियम भी देखा जाता है, क्योंकि विटामिन D का मुख्य काम कैल्शियम का अवशोषण है, और कैल्शियम कम हो तो केवल D ठीक करने से हड्डी ठीक नहीं होती।

और वह चेतावनी, 60,000 IU

यह इस लेख का सबसे ज़रूरी हिस्सा है।

भारत में 60,000 IU का सैशे बहुत आम है। वह एक वयस्क का सुधार-ख़ुराक है, हफ़्ते में एक बार के लिए।

और जो होता है:

माता-पिता को वह घर में मिल जाता है, और वे सोचते हैं कि “बच्चे को आधा दे दें”।

या किसी ने कहा कि “बच्चे को महीने में एक दे दो”।

या बच्चे को डॉक्टर ने एक बार लिखा था, और माता-पिता उसे दोहराते रहे।

और यह ख़तरनाक है, क्योंकि बच्चे का शरीर छोटा है और विटामिन D जमा होती है।

तो नियम:

बच्चे को 60,000 IU बाल रोग विशेषज्ञ के बिना कभी न दें।

और अगर उन्होंने दिया है, तो जितनी बार कहा है उतनी ही बार, और कोर्स ख़त्म होने पर रोकें, दोहराएँ नहीं।

विषाक्तता क्या करती है

विटामिन D वसा में घुलनशील है और शरीर में जमा होती है।

ज़्यादा होने पर: हाइपरकैल्सीमिया, ख़ून में कैल्शियम बहुत ज़्यादा।

बच्चे में लक्षण:

उल्टी और जी मिचलाना दूध या खाना छोड़ देना, भूख न लगना कब्ज़ बहुत प्यास, और बहुत पेशाब, और शिशु में डायपर ज़्यादा गीले होना सुस्ती, चिड़चिड़ापन वज़न न बढ़ना और गंभीर मामलों में गुर्दे को नुक़सान, और ऊतकों में कैल्शियम जमना

और शिशु में ये लक्षण आसानी से “पेट ख़राब है” समझ लिए जाते हैं।

इसलिए: अगर बच्चा विटामिन D ले रहा है और उसे उल्टी, भूख न लगना, बहुत प्यास या सुस्ती हो, डॉक्टर को बताएँ, और बताएँ कि क्या और कितना दिया जा रहा था।

भारतीय केंद्रों से विटामिन D की विषाक्तता के मामले दर्ज हुए हैं, और पैटर्न एक ही है: उच्च-मात्रा वाली दवा, ज़्यादा बार।

और “स्टैकिंग”, जोड़ देखें

यह आम है और कोई हिसाब नहीं रखता:

ड्रॉप्स + फ़ॉर्मूला दूध (जिसमें D मिला है) + मल्टीविटामिन सिरप + कैल्शियम-D सिरप।

ये सब जुड़ते हैं।

तो बच्चे को जो कुछ दिया जा रहा है, उसकी एक सूची रखें और डॉक्टर को दिखाएँ।

व्यावहारिक बातें

रूप: शिशु और छोटे बच्चे के लिए ड्रॉप्स। और तेल-आधारित (oil-based) बेहतर है।

कैसे दें: ड्रॉप सीधे मुँह में, गाल की तरफ़, या साफ़ चम्मच पर। पूरी बोतल दूध में न मिलाएँ, अगर बच्चा पूरा दूध न पिए, तो ख़ुराक अधूरी रह जाती है।

खाने के साथ, विटामिन D वसा में घुलनशील है, तो दूध पिलाने के साथ या खाने के साथ अवशोषण बेहतर होता है।

एक ही समय, रोज़, याद रखने के लिए।

और ड्रॉपर गिनें, रोशनी में। रसोई में जल्दी-जल्दी नहीं।

और डिब्बा बंद करके, बच्चों की पहुँच से दूर रखें, क्योंकि यह उन चीज़ों में है जिसकी ज़्यादा मात्रा नुक़सान करती है।

और धूप, बच्चों के लिए

शिशु (6 महीने से कम): सीधी धूप से बचाएँ। उनकी त्वचा बहुत नाज़ुक है, और उनके लिए सनस्क्रीन की सलाह आम तौर पर नहीं दी जाती। तो शिशु के लिए जवाब धूप नहीं, पूरक है।

बड़े बच्चे: खेलने का समय बाहर, और वह अच्छा है, हड्डी, आँखों और वज़न, तीनों के लिए।

और यह ध्यान रखें: जो धूप विटामिन D बनाती है वह लगभग 11 से 2 के बीच की है, और वह गर्मियों में भारत में बहुत तेज़ होती है। तो बच्चों के लिए संतुलन यह है: बाहर खेलना हाँ, झुलसाने वाली धूप में लंबा समय नहीं।

और धूप से विटामिन D की विषाक्तता नहीं होती, शरीर उसे ख़ुद नियंत्रित करता है। विषाक्तता सिर्फ़ पूरक से होती है।

कब जाँच कराएँ

हर बच्चे की जाँच ज़रूरी नहीं है। रोकथाम की मात्रा के लिए जाँच की ज़रूरत नहीं होती।

जाँच तब, जब:

टेढ़े पैर, कलाई या टखने पर सूजन, माथे का उभरा होना, रिकेट्स के संकेत देर से चलना, या चलने में लड़खड़ाना देर से दाँत निकलना हड्डी या पैरों में दर्द की शिकायत छोटी चोट से हड्डी टूटना बार-बार दौरे पड़ना शिशु में, कम कैल्शियम से हो सकता है वज़न या लंबाई न बढ़ना और माँ में कमी हो, स्तनपान करने वाले शिशु में

और यह ज़रूरी है: टेढ़े पैर या देर से चलना ख़ुद से पूरक शुरू करने का मामला नहीं है, यह बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाने का मामला है। रिकेट्स के कई कारण होते हैं, और उनमें से सब विटामिन D नहीं हैं।

जो हम कह सकते हैं, जो नहीं

कह सकते हैं: विटामिन D के अनुमत पोषक-कार्य दावे, जब वह मापी गई, सार्थक मात्रा में हो, कैल्शियम और फ़ॉस्फ़ोरस के सामान्य अवशोषण में योगदान, ख़ून में कैल्शियम का सामान्य स्तर, हड्डियों, दाँतों और माँसपेशियों के सामान्य कार्य का रख-रखाव, और प्रतिरक्षा तंत्र का सामान्य कार्य, निर्धारित शब्दावली में; और बच्चों के उत्पादों में हड्डियों के सामान्य विकास से जुड़ा दावा।

नहीं कह सकते: रिकेट्स का इलाज, लंबाई बढ़ाना, “इम्यूनिटी बूस्ट”, बुद्धि या पढ़ाई में सुधार, बार-बार बीमार होना रोकना।

और “लंबाई बढ़ाना” हम विशेष रूप से मना करते हैं, यह बच्चों के पूरकों का सबसे आम और सबसे बेईमान दावा है, और वह चिंतित माता-पिता को बेचा जाता है।

और सबसे ईमानदार वाक्य:

शिशु को रोज़ 400 IU चाहिए, और वह माँ के दूध से नहीं मिलता, यह दूध की कमी नहीं, एक जैविक तथ्य है।

1 से 18 साल में रोज़ 400 से 600 IU।

और 60,000 IU का सैशे बच्चे को डॉक्टर के बिना कभी नहीं, क्योंकि यह उन कुछ पूरकों में है जहाँ “थोड़ा और” वाक़ई नुक़सान करता है।

डॉक्टर के पास कब

तुरंत रोकें और दिखाएँ, अगर विटामिन D लेते हुए बच्चे में: उल्टी या जी मिचलाना; दूध/खाना छोड़ना; कब्ज़; बहुत प्यास; बहुत पेशाब या डायपर ज़्यादा गीले; सुस्ती या चिड़चिड़ापन; वज़न न बढ़ना, और बताएँ कि कौन सी दवा, कितनी, कितनी बार दी गई।

अभी जाँचें, अगर यह लागू हो: बच्चे को 60,000 IU का सैशे दिया गया हो, या दोहराया गया हो, डॉक्टर से बात करें।

बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाएँ:

  • टेढ़े पैर, कलाई/टखने पर सूजन, माथे का उभार
  • देर से चलना या दाँत निकलना
  • हड्डी या पैर में दर्द
  • छोटी चोट से फ़्रैक्चर
  • शिशु में दौरे
  • वज़न या लंबाई न बढ़ना

और माँ के लिए: गर्भावस्था और स्तनपान में अपना विटामिन D देखें, क्योंकि शिशु का स्तर आपके स्तर पर निर्भर करता है।

निचोड़

  1. माँ के दूध में विटामिन D कम होता है, यह दूध की कमी नहीं, जीव विज्ञान है
  2. इसीलिए शिशुओं के लिए अलग से विटामिन D की सलाह है
  3. 40 IU = 1 माइक्रोग्राम; तो 400 IU = 10 µg
  4. 0 से 12 महीने: रोज़ 400 IU
  5. फ़ॉर्मूला पीने वाले शिशु में डॉक्टर फ़ॉर्मूला की मात्रा देखकर तय करते हैं
  6. शिशु के लिए हमेशा ड्रॉप्स
  7. “400 IU प्रति ड्रॉप” और “1000 IU प्रति ड्रॉप” दोनों बिकते हैं, यह पढ़ें
  8. 1 से 18 साल: रोज़ 400 से 600 IU
  9. काँच UVB रोक देता है, खिड़की की धूप से कुछ नहीं बनता
  10. सुबह 7 बजे की धूप से लगभग कुछ नहीं बनता
  11. जो बनता है वह लगभग 11 से 2 के बीच बनता है, स्कूल का समय
  12. किशोरावस्था में जीवनभर की हड्डी का बड़ा हिस्सा जमा होता है
  13. और वह खिड़की बाद में वापस नहीं मिलती
  14. कमी का इलाज डॉक्टर वज़न और स्तर के हिसाब से तय करते हैं
  15. इलाज की अवधि सीमित होती है, फिर रख-रखाव पर आते हैं
  16. कैल्शियम भी देखा जाता है, D का काम उसे अवशोषित करना है
  17. 60,000 IU एक वयस्क का सुधार-ख़ुराक है
  18. बच्चे को वह डॉक्टर के बिना कभी न दें
  19. और कोर्स ख़त्म होने पर रोकें, दोहराएँ नहीं
  20. विटामिन D जमा होती है, ज़्यादा होने पर हाइपरकैल्सीमिया
  21. बच्चे में लक्षण: उल्टी, भूख न लगना, कब्ज़, बहुत प्यास, बहुत पेशाब, सुस्ती
  22. शिशु में ये “पेट ख़राब” समझ लिए जाते हैं
  23. भारतीय केंद्रों से विषाक्तता के मामले दर्ज हुए हैं
  24. स्टैकिंग जोड़ें: ड्रॉप्स + फ़ॉर्मूला + मल्टीविटामिन + कैल्शियम सिरप
  25. ड्रॉप सीधे मुँह में या चम्मच पर; पूरी बोतल दूध में न मिलाएँ
  26. खाने या दूध के साथ, यह वसा में घुलनशील है
  27. 6 महीने से कम शिशु को सीधी धूप से बचाएँ, जवाब पूरक है
  28. धूप से विषाक्तता नहीं होती; वह सिर्फ़ पूरक से होती है
  29. रोकथाम की मात्रा के लिए जाँच ज़रूरी नहीं
  30. टेढ़े पैर या देर से चलना, डॉक्टर को दिखाएँ, पूरक ख़ुद शुरू न करें
  31. “लंबाई बढ़ाना” सबसे बेईमान बाल-पूरक दावा है

संरचना: Vitamin D3 Drops, Calcium & D3 Capsule। और पढ़ें: why deficiency is so common in India, vitamin D drops vs capsule vs weekly sachet, बच्चों के लिए विटामिन D और कैल्शियम, और विटामिन D की कमी के लक्षण।

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Tarun Vashisht

Head of Ayurvedic Formulations & Regulatory Quality

Ayurvedic physician and pharmacognosy specialist with over 15 years of experience overseeing GMP-certified herbal extractions, classical proprietary formulations, and AYUSH/FSSAI regulatory compliance for direct-selling and retail nutraceutical brands.

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