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मिलावट वाले हर्बल प्रोडक्ट कैसे पहचानें, और घर पर क्या पहचाना ही नहीं जा सकता

इंटरनेट पर घरेलू जाँच के बहुत नुस्ख़े हैं। उनमें से कुछ काम करते हैं, ज़्यादातर नहीं, और सबसे ख़तरनाक मिलावट किसी भी घरेलू जाँच में नहीं पकड़ी जाती।

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NutraHerbal Editorial12 min read

Reviewed for accuracy and claims compliance: Claims and compliance review

“पानी में डालकर देखिए”, “हथेली पर रगड़िए”, “आग पर रखिए”, हर्बल प्रोडक्ट की जाँच के ऐसे नुस्ख़े बहुत मिलते हैं।

सच यह है कि इनमें से कुछ वाक़ई काम करते हैं, कुछ का कोई आधार नहीं है, और जो मिलावट सबसे ज़्यादा नुक़सान पहुँचाती है, वह घर पर किसी भी तरीक़े से पकड़ी नहीं जा सकती।

यह लेख तीनों हिस्सों के बारे में ईमानदारी से है, क्योंकि यह मान लेना कि आपने घर पर जाँच कर ली है, कई बार उस जाँच से भी ज़्यादा जोखिम भरा होता है जो आपने नहीं की।

यह जानकारी सामान्य समझ के लिए है, डॉक्टर की सलाह नहीं। किसी भी बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टर से मिलें, और निर्धारित दवाएँ अपने मन से बंद न करें।

पहले: “मिलावट” के चार अलग-अलग मतलब हैं

और यही पूरी उलझन की जड़ है, क्योंकि लोग चारों को एक ही शब्द से बुलाते हैं।

एक, सस्ती चीज़ मिलाना। आटा, स्टार्च, चावल का पाउडर, चोकर, रेत, चूना।

दो, दूसरी वनस्पति बदल देना। शतावरी की जगह सफ़ेद मूसली, असली शिलाजीत की जगह राल या गुड़-मिश्रण, केसर की जगह रंगी हुई मक्के की जुल्फ़ें।

तीन, बिना बताए असली दवा मिला देना। स्टेरॉइड, दर्द निवारक, नींद की दवा, या मधुमेह की दवा, आयुर्वेदिक लेबल वाले प्रोडक्ट में।

चार, प्रदूषक। भारी धातुएँ, कीटनाशक अवशेष, और फफूँद से बने विषैले पदार्थ।

पहले दो को आप कुछ हद तक घर पर पकड़ सकते हैं। आख़िरी दो को बिलकुल नहीं। और आख़िरी दो ही असल में नुक़सान पहुँचाते हैं।

जो घरेलू जाँच वाक़ई कुछ बताती हैं

इन्हें सीमित भरोसे के साथ इस्तेमाल करें, ये “साफ़ है” नहीं बतातीं, बस कुछ मोटी गड़बड़ पकड़ लेती हैं।

पानी में घोलने पर रेत या खनिज मिलावट। चूर्ण को पानी में डालकर कुछ मिनट छोड़िए। रेत और भारी खनिज नीचे बैठ जाते हैं। यह पकड़ में आती है।

स्टार्च के लिए आयोडीन। हल्दी या किसी चूर्ण में आटा-स्टार्च मिला हो तो आयोडीन टिंक्चर की एक बूँद से नीला-काला रंग आता है। लेकिन ध्यान रखें, कई असली चूर्ण में भी प्राकृतिक स्टार्च होता है, तो यह जाँच हाँ-ना वाली नहीं है, मात्रा का अंदाज़ा देती है।

हल्दी में चाक या चूना। गिलास में गुनगुने पानी में डालने पर असली हल्दी धीरे-धीरे घुलकर नीचे जमती है और पानी गहरा पीला होता है; चूना मिला होने पर पानी में सफ़ेदी और तलछट अलग दिखती है।

गंध। यह सबसे कम तकनीकी और सबसे काम की जाँच है। अश्वगंधा की जड़ की अपनी तीव्र, थोड़ी घोड़े जैसी गंध होती है; त्रिफला की अपनी कसैली; ब्राह्मी की अपनी। गंध बिल्कुल न हो, या बहुत ज़्यादा “सुगंधित” हो, तो दोनों सवाल पैदा करते हैं।

तेल में चिकनाई की परख। बाल के तेल को हथेली पर रगड़िए, अगर चिपचिपाहट मिनरल ऑयल जैसी है और वह त्वचा में जाती ही नहीं, तो बोतल में ज़्यादातर कैरियर है और अर्क बहुत कम।

और रंग का असामान्य रूप से चटख होना। प्राकृतिक रंग मंद होते हैं। चटख नारंगी “केसर”, चमकदार हरा “ब्राह्मी”, या बहुत गहरा लाल “मंजिष्ठा”, रंग मिलाया गया हो सकता है।

जो घरेलू जाँच कुछ नहीं बतातीं

और इनपर भरोसा करके लोग निश्चिंत हो जाते हैं, जो सबसे बड़ी समस्या है।

“असली शिलाजीत आग पर नहीं जलता।” यह जाँच भरोसेमंद नहीं है। राल, मोम और गुड़-मिश्रण भी तरह-तरह से व्यवहार करते हैं, और शुद्धता का फ़ैसला इससे नहीं होता।

“असली शिलाजीत गर्म पानी में पूरी तरह घुल जाता है।” आंशिक रूप से सही संकेत, लेकिन निर्णायक नहीं, और नक़ली मिश्रण भी घुल सकते हैं।

“असली शहद पानी में नहीं घुलता / धागे जैसी धार बनाता है / रुई में भिगोकर जलती है।” इनमें से कोई भी जाँच शहद में शर्करा-सीरप की मिलावट नहीं पकड़ती। आज की मिलावट प्रयोगशाला में पकड़ने के लिए भी विशेष तरीक़े माँगती है।

“असली अश्वगंधा में कड़वाहट होती है।” कड़वाहट होती है, लेकिन स्टैंडर्डाइज़ेशन प्रतिशत का अंदाज़ा स्वाद से नहीं लगता। 1.5% विदानोलाइड और 5% विदानोलाइड वाले चूर्ण में स्वाद का फ़र्क़ आपको नहीं बताएगा कि कौन-सा कितना असरदार है।

और सबसे ज़रूरी बात: किसी भी घरेलू जाँच से भारी धातु, कीटनाशक अवशेष, फफूँद का विष, या मिलाई गई दवा नहीं पकड़ी जाती। एक भी नहीं।

जो मिलावट असल में ख़तरनाक है

और यही वह हिस्सा है जिसके लिए यह लेख लिखा गया है।

बिना बताए मिलाई गई दवा। आयुर्वेदिक लेबल वाले कुछ प्रोडक्ट में स्टेरॉइड, दर्द निवारक या अन्य दवाएँ मिली पाई गई हैं। इसका संकेत यह होता है: प्रोडक्ट “बहुत जल्दी और बहुत ज़्यादा” असर करता है, और बंद करने पर हालत पहले से ख़राब लगती है।

अगर कोई “आयुर्वेदिक” प्रोडक्ट दो दिन में जोड़ों का दर्द पूरी तरह ख़त्म कर रहा है, तो यह अच्छी ख़बर नहीं है। यह सवाल है। स्टेरॉइड लंबे समय तक अनजाने में लेने के गंभीर नतीजे होते हैं, और लोग उन्हें “दवा” मानकर नहीं, “जड़ी-बूटी” मानकर लेते रहते हैं।

भारी धातुएँ। जड़ से बनने वाले और खनिज-आधारित उत्पादों में जोखिम ज़्यादा है, शिलाजीत, कुछ भस्म, और खेतों की मिट्टी से आने वाली जड़ें।

कीटनाशक अवशेष, ख़ासकर बड़े पैमाने पर उगाई जाने वाली वनस्पतियों में।

और फफूँद का विष, जो नमी में रखे गए कच्चे माल में बनता है।

इनमें से किसी के लिए भी आपके पास घर पर कोई रास्ता नहीं है। इसका एक ही जवाब है, बैच-वार प्रयोगशाला रिपोर्ट।

तो आप असल में क्या कर सकते हैं

ये पाँच काम घरेलू नुस्ख़ों से कई गुना ज़्यादा उपयोगी हैं।

लेबल पर इस्तेमाल किया गया हिस्सा देखें। “जामुन” की जगह “जामुन की गुठली”। “करेला” की जगह “करेले का फल”। “अश्वगंधा” की जगह “अश्वगंधा की जड़”। जो ब्रांड हिस्सा नहीं लिखता, वह आम तौर पर और भी कुछ नहीं लिखता।

स्टैंडर्डाइज़ेशन प्रतिशत और टेस्ट मेथड देखें। “बोसवेलिया 65% बोसवेलिक एसिड” के साथ AKBA का आँकड़ा है या नहीं।

“प्रोप्राइटरी ब्लेंड” लिखा प्रोडक्ट छोड़ दें। जहाँ मात्राएँ नहीं लिखीं, वहाँ तुलना का कोई रास्ता नहीं है।

बैच की टेस्ट रिपोर्ट माँगें। ब्रांड को ईमेल लिखिए और उस बैच नंबर की भारी धातु और माइक्रोबायोलॉजी रिपोर्ट माँगिए। जो ब्रांड भेज देता है, वह भरोसे का सबसे मज़बूत संकेत है जो आपको मिल सकता है, और जो टाल देता है, उसने भी जवाब दे दिया है।

और लाइसेंस नंबर जाँचें। FSSAI का 14 अंकों का नंबर या AYUSH लाइसेंस, संबंधित पोर्टल पर।

कुछ ख़ास चीज़ें जिन पर ज़्यादा ध्यान चाहिए

शिलाजीत। सबसे अधिक मिलावट वाली श्रेणियों में से एक। बैच-वार भारी धातु रिपोर्ट के बिना न ख़रीदें, और “हिमालय से” जैसे वाक्य किसी जाँच का विकल्प नहीं हैं।

केसर। रंगे हुए रेशे, मक्के की जुल्फ़ें और भारी करने के लिए मिलाया गया पदार्थ आम हैं।

शहद। घरेलू जाँचें यहाँ लगभग बेकार हैं।

शतावरी। सफ़ेद मूसली से बदली जाती है, और सूखे चूर्ण में अंतर दिखता नहीं।

और “हर्बल” बाल तेल। बोतल में क्या है, कैरियर तेल और सुगंध, या वाक़ई अर्क, यह सवाल हमने अलग से लिखा है।

छोटा सारांश

  1. “मिलावट” के चार अलग मतलब हैं और लोग चारों को एक कहते हैं
  2. सस्ती चीज़ मिलाना, वनस्पति बदलना, दवा मिलाना, और प्रदूषक
  3. पहले दो कुछ हद तक घर पर पकड़े जा सकते हैं
  4. आख़िरी दो बिलकुल नहीं, और वही नुक़सान पहुँचाते हैं
  5. पानी में घोलने पर रेत और खनिज बैठ जाते हैं, यह जाँच काम करती है
  6. आयोडीन से स्टार्च दिखता है, लेकिन प्राकृतिक स्टार्च भी होता है
  7. गंध सबसे कम तकनीकी और सबसे काम की जाँच है
  8. गंध न होना और बहुत सुगंधित होना, दोनों सवाल हैं
  9. तेल हथेली पर रगड़ें, मिनरल ऑयल जैसी चिपचिपाहट संकेत है
  10. असामान्य रूप से चटख रंग प्राकृतिक नहीं होता
  11. शिलाजीत का “आग में न जलना” भरोसेमंद जाँच नहीं है
  12. शहद की घरेलू जाँचें शर्करा-सीरप की मिलावट नहीं पकड़तीं
  13. स्वाद से स्टैंडर्डाइज़ेशन प्रतिशत का अंदाज़ा नहीं लगता
  14. 1.5% और 5% विदानोलाइड का फ़र्क़ जीभ नहीं बताएगी
  15. कोई भी घरेलू जाँच भारी धातु, कीटनाशक या मिलाई गई दवा नहीं पकड़ती
  16. बिना बताए मिलाई गई दवा सबसे ख़तरनाक श्रेणी है
  17. संकेत: बहुत जल्दी और बहुत ज़्यादा असर, और बंद करने पर बिगड़ना
  18. दो दिन में दर्द पूरी तरह ख़त्म होना अच्छी ख़बर नहीं, सवाल है
  19. अनजाने में लंबे समय तक स्टेरॉइड लेने के गंभीर नतीजे होते हैं
  20. भारी धातु का जोखिम जड़ और खनिज-आधारित उत्पादों में ज़्यादा
  21. इनका एक ही जवाब है, बैच-वार प्रयोगशाला रिपोर्ट
  22. लेबल पर इस्तेमाल किया गया हिस्सा देखिए
  23. जो ब्रांड हिस्सा नहीं लिखता, वह आम तौर पर और कुछ भी नहीं लिखता
  24. स्टैंडर्डाइज़ेशन प्रतिशत और टेस्ट मेथड देखिए
  25. बोसवेलिया पर AKBA का आँकड़ा है या नहीं
  26. “प्रोप्राइटरी ब्लेंड” वाला प्रोडक्ट छोड़ दीजिए
  27. ब्रांड से उस बैच की टेस्ट रिपोर्ट माँगिए
  28. जो भेज देता है वही सबसे मज़बूत संकेत है; टालने वाले ने भी जवाब दे दिया
  29. लाइसेंस नंबर पोर्टल पर जाँचिए
  30. शिलाजीत, केसर, शहद, शतावरी और “हर्बल” तेल पर ज़्यादा ध्यान
  31. “हिमालय से” किसी जाँच का विकल्प नहीं है
  32. घर पर जाँच कर लेने का भरोसा, कई बार जाँच न करने से ज़्यादा जोखिम भरा है

आगे पढ़ें: लेबल कम्प्लायंस, कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफ़ैक्चरर कैसे चुनें. संबंधित लेख: the five most adulterated herbal ingredients in India, heavy metals in herbal supplements, सप्लीमेंट लेबल पर क्या देखना चाहिए, और what a GMP certificate does and does not mean.

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Reviewed by

Tarun Vashisht

Head of Ayurvedic Formulations & Regulatory Quality

Ayurvedic physician and pharmacognosy specialist with over 15 years of experience overseeing GMP-certified herbal extractions, classical proprietary formulations, and AYUSH/FSSAI regulatory compliance for direct-selling and retail nutraceutical brands.

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