Reviewed for accuracy and claims compliance: Claims and compliance review
सप्लीमेंट की बोतल उठाकर लोग सामने की तरफ़ देखते हैं, बड़ा नाम, बड़ा दावा, “1000 mg”, “100% नैचुरल”।
सामने की तरफ़ मार्केटिंग है। जो जानकारी असल में बताती है कि बोतल में क्या है, वह पीछे होती है, सबसे छोटे अक्षरों में, और लगभग कोई नहीं पढ़ता।
यह लेख उस पीछे की तरफ़ के बारे में है, किस क्रम में क्या देखना है, और किस चीज़ के न होने पर बोतल वापस रख देनी चाहिए।
यह जानकारी सामान्य समझ के लिए है, डॉक्टर की सलाह नहीं। किसी बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टर से मिलें, और निर्धारित दवाएँ अपने मन से बंद न करें।
1. वनस्पति का कौन-सा हिस्सा
सबसे पहले यही देखिए, क्योंकि यह सबसे ज़्यादा छूटता है और सबसे ज़्यादा फ़र्क़ डालता है।
“जामुन” लिखा है, या “जामुन की गुठली”? दोनों की संरचना अलग है।
“करेला” लिखा है, या “करेले का फल”? बीज अलग बात है।
“अश्वगंधा” लिखा है, या “अश्वगंधा की जड़”? परंपरा में जड़ का इस्तेमाल होता है; पत्ती सस्ती पड़ती है और अलग चीज़ है।
“गिलोय” लिखा है, या “गिलोय का तना”?
जो ब्रांड हिस्सा नहीं लिखता, वह आम तौर पर और भी बहुत कुछ नहीं लिखता। यह सबसे तेज़ छँटनी है जो आप कर सकते हैं।
2. स्टैंडर्डाइज़ेशन प्रतिशत
यह सबसे छोटे अक्षरों में, कोष्ठक में लिखा होता है, और यही वह नंबर है जो तय करता है कि प्रोडक्ट से कुछ होगा या नहीं।
एक हिसाब देखिए।
“अश्वगंधा एक्सट्रैक्ट 500 mg”, प्रतिशत नहीं लिखा। मान लीजिए 1.5% विदानोलाइड है। तो मिला 7.5 mg।
“अश्वगंधा एक्सट्रैक्ट 300 mg (5% विदानोलाइड)”, मिला 15 mg।
कम mg वाली बोतल दोगुना असरदार हिस्सा दे रही है।
और 500 वाली बोतल सस्ती होगी, पैक पर उदार दिखेगी, और mg गिनने वाले ग्राहक को ज़्यादा लगेगी।
तो mg की तुलना मत कीजिए। प्रतिशत देखिए, और टेस्ट मेथड भी, क्योंकि एक ही चीज़ अलग-अलग तरीक़ों से अलग प्रतिशत देती है।
हर जड़ी-बूटी का अपना मार्कर है: अश्वगंधा में विदानोलाइड, हल्दी में कर्क्यूमिनॉइड, ब्राह्मी में बैकोसाइड, गुड़मार में जिमनेमिक एसिड, गोक्षुर में प्रोटोडायोसिन, शिलाजीत में फुल्विक एसिड, और बोसवेलिया में कुल बोसवेलिक एसिड के साथ AKBA, क्योंकि 65% का आँकड़ा AKBA के बिना भी पूरा हो जाता है।
3. “प्रोप्राइटरी ब्लेंड”, तो बोतल वापस रख दीजिए
अगर लिखा है “प्रोप्राइटरी ब्लेंड 500 mg” और नीचे दस जड़ी-बूटियों के नाम, मात्रा के बिना, तो आपको कुछ नहीं पता।
हो सकता है उसमें 450 mg सस्ती सामग्री और 5 mg वह चीज़ हो जिसके लिए आपने ख़रीदा।
और यह “कंपनी का राज़” नहीं है। ज़्यादातर मामलों में यह मात्राएँ छिपाने का तरीक़ा है, और हमने इस पर अलग से लिखा है।
4. एक्सट्रैक्ट रेशियो
“10:1 एक्सट्रैक्ट” का मतलब है कि दस किलो कच्चे माल से एक किलो एक्सट्रैक्ट बना।
यह अपने आप में अच्छा या बुरा नहीं है। यह सिर्फ़ एक अनुपात है।
जो देखना है वह यह है कि रेशियो के साथ स्टैंडर्डाइज़ेशन प्रतिशत भी है या नहीं। सिर्फ़ रेशियो लिखा हो तो वह “कितना गाढ़ा” बताता है, “कितना असरदार” नहीं, क्योंकि अलग-अलग तरीक़ों से बना 10:1 अलग निकलता है।
5. वेज / नॉन-वेज चिह्न
और यहाँ एक बात है जो बहुत लोगों को नहीं पता।
कैप्सूल का खोल जिलेटिन का हो सकता है, जो जानवर से आता है, चाहे अंदर की सामग्री पूरी तरह वानस्पतिक हो।
तो चिह्न देखिए, और अगर यह आपके लिए मायने रखता है तो “वेज कैप्सूल” या “HPMC” लिखा ढूँढ़िए।
सिर्फ़ “हर्बल” या “आयुर्वेदिक” लिखा होना इस सवाल का जवाब नहीं है।
6. लाइसेंस नंबर
FSSAI का 14 अंकों का नंबर, या आयुर्वेदिक दवा के लिए AYUSH लाइसेंस नंबर।
नंबर होना चाहिए और पढ़ा जाना चाहिए। और आप उसे संबंधित पोर्टल पर जाँच सकते हैं।
एक बात साफ़ रखें: “FSSAI अप्रूव्ड” जैसा कुछ नहीं होता। लाइसेंस का मतलब है कि कारोबार पंजीकृत है, इसका मतलब यह नहीं कि किसी ने प्रोडक्ट या उसके दावे जाँचकर मंज़ूरी दी है।
7. चेतावनियाँ, और इनका न होना ही संकेत है
अच्छे लेबल पर चेतावनियाँ होती हैं। यह उल्टा लगता है, लेकिन सही है।
जिन चीज़ों की चेतावनी होनी चाहिए:
मुलेठी, रक्तचाप पर असर, ग्लिसिराइज़िन की वजह से।
नीम, गर्भावस्था में और गर्भधारण की कोशिश के दौरान नहीं।
तुलसी, गर्भधारण की कोशिश के दौरान सावधानी।
अश्वगंधा, थायरॉइड की दवा लेने वालों के लिए, और ऑटोइम्यून स्थिति में डॉक्टर से पूछकर।
गिलोय, लंबे सेवन और पहले से जिगर की समस्या में सावधानी।
बायोटिन, कुछ रक्त जाँचों के नतीजे बदल सकता है, जाँच से पहले बताना चाहिए।
अर्जुन, निर्धारित दवाएँ बंद न करें।
स्पाइरुलिना, माइक्रोसिस्टिन जाँच का ज़िक्र।
और सामान्य पंक्तियाँ: गर्भावस्था और स्तनपान में डॉक्टर से पूछें; दवा के साथ डॉक्टर से पूछें; बच्चों की पहुँच से दूर।
जिस बोतल पर कोई चेतावनी नहीं है, वह सुरक्षित प्रोडक्ट नहीं है, वह ऐसा लेबल है जिससे असुविधाजनक बातें हटा दी गई हैं।
8. सेवन की मात्रा और प्रति सर्विंग की जानकारी
यहाँ एक आम चाल है।
सामने लिखा है “1000 mg अश्वगंधा”। पीछे लिखा है “सर्विंग साइज़: 2 कैप्सूल”।
यानी एक कैप्सूल में 500 mg है।
और 60 कैप्सूल की बोतल 60 दिन नहीं, 30 दिन चलेगी। प्रति दिन की लागत दोगुनी है।
हमेशा प्रति सर्विंग और प्रति दिन के हिसाब से देखिए, प्रति बोतल नहीं।
9. एलर्जन
सोया, दूध, मूँगफली, ग्लूटेन, तिल। और “इसी सुविधा में बनाया गया” की जानकारी।
यह सेक्शन छोटा होता है और जिनके लिए मायने रखता है, उनके लिए सबसे ज़रूरी है।
10. बैच नंबर, तारीख़ें और पता
बैच नंबर और एक्सपायरी पढ़े जा सकें, मिटी हुई या धुँधली छपाई संकेत है।
निर्माण की तारीख़ देखिए, सिर्फ़ एक्सपायरी नहीं। दो साल की शेल्फ़ लाइफ़ वाला प्रोडक्ट जो 20 महीने पहले बना है, चार महीने का प्रोडक्ट है।
और निर्माता का पूरा नाम-पता। “मेड इन इंडिया” पता नहीं है।
अब वही बोतल एक बार और, उल्टे क्रम में
दुकान में दो मिनट हैं तो इस क्रम से चलिए।
पीछे पलटिए। सामने की तरफ़ पढ़ने की ज़रूरत नहीं है।
इनग्रीडिएंट सूची में हिस्सा ढूँढ़िए। न मिले, वापस रखिए।
स्टैंडर्डाइज़ेशन प्रतिशत ढूँढ़िए। न मिले, वापस रखिए, अगर आप असर के लिए ख़रीद रहे हैं।
“प्रोप्राइटरी ब्लेंड” दिखे, वापस रखिए।
सर्विंग साइज़ देखिए और प्रति दिन की लागत निकालिए।
चेतावनियाँ देखिए। एक भी नहीं, वापस रखिए।
लाइसेंस नंबर, वेज चिह्न, बैच और तारीख़ें देखिए।
और अगर सब ठीक है, तो एक काम और: ब्रांड को उस बैच नंबर के साथ ईमेल लिखकर भारी धातु और माइक्रोबायोलॉजी रिपोर्ट माँगिए। जो भेज देता है, वही सबसे मज़बूत संकेत है।
छोटा सारांश
- सामने की तरफ़ मार्केटिंग है; काम की जानकारी पीछे है
- सबसे पहले वनस्पति का इस्तेमाल किया गया हिस्सा देखिए
- “जामुन” और “जामुन की गुठली” एक चीज़ नहीं
- “अश्वगंधा” और “अश्वगंधा की जड़” एक चीज़ नहीं
- हिस्सा न लिखने वाला ब्रांड आम तौर पर और कुछ भी नहीं लिखता
- स्टैंडर्डाइज़ेशन प्रतिशत सबसे काम का नंबर है
- 500 mg × 1.5% = 7.5 mg; 300 mg × 5% = 15 mg
- कम mg वाली बोतल दोगुना असर दे सकती है
- mg की तुलना मत कीजिए, प्रतिशत और टेस्ट मेथड देखिए
- हर जड़ी-बूटी का अपना मार्कर है
- बोसवेलिया पर 65% के साथ AKBA भी देखिए
- “प्रोप्राइटरी ब्लेंड” दिखे तो बोतल वापस रख दीजिए
- एक्सट्रैक्ट रेशियो गाढ़ापन बताता है, असर नहीं
- वेज / नॉन-वेज चिह्न, जिलेटिन खोल जानवर से आता है
- “हर्बल” लिखा होना इस सवाल का जवाब नहीं है
- FSSAI का 14 अंकों का नंबर पोर्टल पर जाँच सकते हैं
- “FSSAI अप्रूव्ड” जैसा कुछ नहीं होता
- अच्छे लेबल पर चेतावनियाँ होती हैं
- मुलेठी और रक्तचाप; नीम और गर्भावस्था; तुलसी और गर्भधारण
- अश्वगंधा और थायरॉइड दवा; गिलोय और जिगर
- बायोटिन रक्त जाँच बदल सकता है; अर्जुन के साथ दवा बंद न करें
- बिना किसी चेतावनी वाला लेबल सुरक्षित नहीं, साफ़ किया हुआ है
- सर्विंग साइज़ दो कैप्सूल हो तो सामने का 1000 mg आधा है
- 60 कैप्सूल तब 30 दिन चलेंगे, प्रति दिन की लागत दोगुनी
- एलर्जन सेक्शन छोटा है और कुछ लोगों के लिए सबसे ज़रूरी
- बैच और एक्सपायरी पढ़े जाने चाहिए; धुँधली छपाई संकेत है
- निर्माण तारीख़ भी देखिए, सिर्फ़ एक्सपायरी नहीं
- “मेड इन इंडिया” पता नहीं है
- दुकान में उल्टे क्रम से चलिए, पीछे से शुरू
- और बैच नंबर के साथ ब्रांड से टेस्ट रिपोर्ट माँगिए
आगे पढ़ें: लेबल कम्प्लायंस, शब्दावली. संबंधित लेख: how to read a supplement label properly, extract ratios and standardisation decoded, proprietary blend, why it usually hides something, और मिलावट वाले हर्बल प्रोडक्ट कैसे पहचानें.
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