Reviewed for accuracy and claims compliance: दावा-अनुपालन समीक्षा (claims review)
“दूध नहीं पीते? फिर कैल्शियम कहाँ से आएगा?”, यह सवाल बहुत पूछा जाता है और उसका जवाब राहत देने वाला है।
पर पहले एक बात जाँचनी चाहिए, क्योंकि बहुत लोग बेवजह पूरी डेयरी छोड़ देते हैं।
यह लेख जानकारी के लिए है, चिकित्सकीय सलाह नहीं। गुर्दे की बीमारी या पथरी का इतिहास, कैल्शियम की मात्रा डॉक्टर तय करें।
पहले यह जाँचें: दही और छाछ भी नहीं, या सिर्फ़ दूध?
यह सबसे काम का सवाल है और लोग इसे छोड़ देते हैं।
अगर दूध से गैस, पेट फूलना या दस्त होता है, तो वह आम तौर पर लैक्टोज़ की वजह से होता है, दूध की शक्कर, जिसे पचाने के लिए एक एंज़ाइम चाहिए जो बहुत वयस्कों में कम हो जाता है।
और यह भारत और एशिया में बहुत आम है, यह कोई बीमारी नहीं, एक सामान्य अंतर है।
पर यहाँ अहम बात है:
दही और छाछ में लैक्टोज़ कुछ टूट चुका होता है, किण्वन के दौरान बैक्टीरिया उसका एक हिस्सा तोड़ देते हैं। इसलिए जिन्हें दूध नहीं पचता, उनमें से ज़्यादातर दही और छाछ आराम से सह लेते हैं।
और पनीर में लैक्टोज़ और कम होता है।
तो पहला कदम: पूरी डेयरी छोड़ने से पहले दही, छाछ और पनीर आज़माएँ। अगर वे चल जाते हैं, तो आपकी समस्या हल हो गई, और वह सबसे अच्छा हल है, क्योंकि डेयरी का कैल्शियम सबसे अच्छी तरह सोखा जाता है।
और एक तरकीब: दूध खाने के साथ, थोड़ी मात्रा में लेने पर कुछ लोग उसे सह लेते हैं। और लैक्टोज़-मुक्त दूध भी उपलब्ध है।
असली दूध की एलर्जी (लैक्टोज़ असहिष्णुता से अलग, यह प्रोटीन से होती है और बच्चों में ज़्यादा) एक अलग बात है और उसमें पूरी डेयरी छोड़नी पड़ती है।
और अगर डेयरी बिलकुल नहीं
ठीक है, और यह पूरी तरह संभव है।
दो चीज़ें ध्यान में रखनी हैं:
पहली: पौधों का कैल्शियम कम अवशोषित होता है डेयरी के मुक़ाबले, इसलिए मात्रा और संगत दोनों पर ध्यान चाहिए।
दूसरी: डेयरी छोड़ने से प्रोटीन और बी12 भी घटते हैं, और दोनों हड्डी के लिए मायने रखते हैं। इसे अलग से पूरा करना होगा।
सबसे अच्छे बिना-डेयरी स्रोत
क्रम में, सबसे उपयोगी पहले:
1. रागी (नाचनी, फ़िंगर मिलेट), इस सूची में सबसे ऊपर। बहुत अच्छा स्रोत, और यह एक अनाज है, यानी रोज़ के खाने का हिस्सा बन सकता है।
कैसे: रागी का आटा गेहूँ के आटे में मिलाएँ (शुरुआत में चौथाई हिस्सा), रागी की रोटी, रागी का दलिया, या रागी माल्ट।
2. तिल, ख़ास तौर पर काले तिल। अच्छा स्रोत।
कैसे: तिल की चटनी, तिल के लड्डू (चीनी देखें), या भूनकर ऊपर से छिड़कना, सब्ज़ी, दही, सलाद पर। यह सबसे आसान तरीक़ा है।
और परंपरा इसे जानती थी, तिल के लड्डू सर्दियों में बनते हैं, और तिल-गुड़ का संयोजन पुराना है।
3. सहजन (मोरिंगा) की पत्तियाँ, बहुत अच्छा, ताज़ा और सूखी दोनों।
कैसे: सब्ज़ी, दाल में, या सूखा पाउडर ऊपर से।
4. कैल्शियम-सेट टोफ़ू, पैकेट देखें, क्योंकि सब टोफ़ू कैल्शियम से सेट नहीं होता। जो होता है, वह बहुत अच्छा स्रोत है।
5. बादाम, मुट्ठी भर रोज़। भिगोकर।
6. हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, पर सही वाली
मेथी, सरसों का साग, बथुआ, चौलाई, इनमें ऑक्सलेट कम है, इसलिए अवशोषण ठीक है।
और पालक नहीं, उसमें कैल्शियम है पर ऑक्सलेट भी बहुत, जो उसी कैल्शियम को बाँध लेता है। पालक कैल्शियम का भरोसेमंद स्रोत नहीं है।
7. राजमा, चना, लोबिया, सोयाबीन, मध्यम, और साथ में प्रोटीन भी।
8. अमरंथ (राजगिरा), अच्छा, और व्रत में भी चलता है।
9. सूखे अंजीर और खजूर, मध्यम।
10. फ़ोर्टिफ़ाइड पौधा-आधारित दूध, सोया, बादाम या ओट का दूध जिसमें कैल्शियम मिलाया गया हो।
और यहाँ एक ज़रूरी बात: सादा घर का बादाम का दूध कैल्शियम का स्रोत नहीं है, उसमें बादाम बहुत पतला हो जाता है। फ़ोर्टिफ़ाइड पैकेट वाला देखें, और लेबल पर कैल्शियम की मात्रा पढ़ें। और इस्तेमाल से पहले हिलाएँ, कैल्शियम नीचे बैठ जाता है।
11. छोटी मछली हड्डी सहित, मांसाहारियों के लिए, और सबसे कम बताया जाने वाला अच्छा स्रोत।
अवशोषण बढ़ाने के तरीक़े
यह मात्रा जितना ही मायने रखता है।
1. विटामिन डी, सबसे पहले।
इसके बिना कैल्शियम का बड़ा हिस्सा सोखा नहीं जाता। और भारत में कमी बहुत आम है।
जाँच कराएँ, और मात्रा डॉक्टर तय करें।
और वीगन लोगों के लिए एक ख़ास बात: ज़्यादातर विटामिन D3 भेड़ के ऊन (लैनोलिन) से बनता है। लाइकेन से बना D3 वीगन विकल्प है और उपलब्ध है। D2 पौधों से आता है पर ख़ून का स्तर बनाए रखने में कम प्रभावी है।
2. भिगोना, अंकुरित करना, ख़मीर उठाना, फ़ाइटेट घटता है, अवशोषण बढ़ता है। दाल रातभर भिगोएँ; इडली-ढोकले का घोल।
3. मात्रा बाँटें, शरीर एक बार में लगभग 500 मिग्रा तक बेहतर सोखता है।
4. नमक कम, वह पेशाब से कैल्शियम निकालता है।
5. ऑक्सलेट वाली चीज़ें अलग समय पर, पालक और कैल्शियम का स्रोत एक ही थाली में नहीं।
जो डेयरी के साथ-साथ छूट जाता है
यह हिस्सा ज़रूरी है और इसे अक्सर भुला दिया जाता है।
प्रोटीन। हड्डी का ढाँचा काफ़ी हद तक प्रोटीन का है। दही-पनीर छोड़ने का मतलब प्रोटीन का एक बड़ा स्रोत छोड़ना है।
पूरा करें: दाल (गाढ़ी), राजमा, छोले, सोया, टोफ़ू, मूँगफली, मेवे, सत्तू, और ज़रूरत हो तो प्लांट प्रोटीन पाउडर।
विटामिन बी12.
और यह वीगन लोगों के लिए सबसे गंभीर बात है: कोई भरोसेमंद पौधा स्रोत नहीं है। दूध-दही से कुछ मिलता था; वह भी हट गया।
और बी12 की कमी से तंत्रिका का नुक़सान होता है, जो देर तक चले तो स्थायी हो सकता है।
तो: वीगन हैं तो बी12 सप्लीमेंट मानकर चलें, और जाँच कराएँ। और स्पिरुलिना बी12 का स्रोत नहीं है, उसमें जो रूप है वह मनुष्यों के लिए उपयोगी नहीं है।
हड्डी के लिए जो कैल्शियम से ज़्यादा मायने रखता है
वज़न उठाने वाला व्यायाम।
हड्डी भार के जवाब में मज़बूत होती है, यही उसका तंत्र है। और यह कैल्शियम से ज़्यादा असरदार है।
चलना, सीढ़ियाँ, और सबसे ज़्यादा प्रतिरोध व्यायाम।
तैराकी और साइकिल हड्डी के लिए कम करते हैं, बहुत अच्छे व्यायाम हैं, पर हड्डी पर भार नहीं डालते।
और महिलाओं के लिए: वज़न उठाने से “भारी” नहीं दिखतीं। यह ग़लतफ़हमी उन्हें उसी व्यायाम से दूर रखती है जो उनके लिए सबसे ज़रूरी है।
और धूम्रपान बंद, नमक कम, ज़्यादा शराब कम, तीनों हड्डी पर सीधा असर डालते हैं।
एक व्यावहारिक दिन, बिना डेयरी
| समय | क्या |
|---|---|
| सुबह | 15–30 मिनट धूप, खुली त्वचा पर |
| नाश्ता | रागी का दलिया, या रागी मिला आटा; + भीगे बादाम |
| दोपहर | दाल/राजमा + मेथी या सरसों का साग + रोटी (रागी मिली); ऊपर से भुने तिल |
| शाम | भुने चने, या फ़ोर्टिफ़ाइड सोया दूध |
| रात | सोया/टोफ़ू या दाल + सब्ज़ी |
| व्यायाम | हफ़्ते में 2–3 दिन प्रतिरोध; बाक़ी दिन चलना |
| सप्लीमेंट | जाँच के आधार पर, विटामिन डी, बी12, और ज़रूरत हो तो कैल्शियम |
और तिल छिड़कने की आदत, यह सबसे आसान और सबसे कम किया जाने वाला बदलाव है।
गोली के बारे में
भोजन पहले। पर अगर भोजन से पूरा न हो, और बिना डेयरी यह मुश्किल हो सकता है, तो गोली एक जायज़ विकल्प है।
कैल्शियम सिट्रेट बेहतर सोखा जाता है और खाली पेट भी लिया जा सकता है। कार्बोनेट सस्ता है और खाने के साथ लेना चाहिए।
और लेबल पर “एलिमेंटल कैल्शियम” देखें, यौगिक का वज़न नहीं।
और थायराइड की दवा से चार घंटे, आयरन से अलग समय।
वीगन हैं तो कैप्सूल का खोल देखें, जेलेटिन के बजाय HPMC (सेल्यूलोज़)।
किन्हें जाँच करानी चाहिए
- रजोनिवृत्ति के बाद महिलाएँ
- जो डेयरी बिलकुल नहीं लेते
- वीगन, बी12 ज़रूर
- जिनकी मामूली चोट से हड्डी टूटी हो, यह जाँच का कारण है
- जो लंबे समय से स्टेरॉयड लेते हों
- जो एसिडिटी की दवा लंबे समय से लेते हों
- बहुत दुबले लोग
जाँचें: विटामिन डी, बी12, कैल्शियम, और डॉक्टर कहें तो हड्डी घनत्व।
निचोड़
- पहले दही, छाछ और पनीर आज़माएँ, दूध न पचने वाले ज़्यादातर लोग इन्हें सह लेते हैं
- डेयरी का कैल्शियम सबसे अच्छी तरह सोखा जाता है, इसलिए उसे बेवजह न छोड़ें
- बिना डेयरी: रागी सबसे ऊपर, फिर तिल, सहजन, कैल्शियम-सेट टोफ़ू, बादाम
- पालक भरोसेमंद नहीं, मेथी, सरसों, बथुआ, चौलाई बेहतर
- सादा घर का बादाम दूध कैल्शियम का स्रोत नहीं, फ़ोर्टिफ़ाइड देखें, और हिलाएँ
- विटामिन डी पहले, उसके बिना कैल्शियम बेकार जाता है
- वीगन: D3 लाइकेन से, क्योंकि आम D3 ऊन से बनता है
- दाल भिगोएँ और अंकुरित करें, फ़ाइटेट घटता है
- प्रोटीन अलग से पूरा करें, हड्डी का ढाँचा प्रोटीन का है
- वीगन: बी12 सप्लीमेंट मानकर चलें, कोई भरोसेमंद पौधा स्रोत नहीं; स्पिरुलिना नहीं
- तिल ऊपर से छिड़कने की आदत, सबसे आसान बदलाव
- वज़न उठाने वाला व्यायाम कैल्शियम से ज़्यादा असरदार
- गोली में “एलिमेंटल कैल्शियम” देखें; थायराइड की दवा से चार घंटे दूर
संरचना की जानकारी: कैल्शियम + D3 + K2 और प्लांट प्रोटीन पाउडर। स्रोत और मात्रा पर: कैल्शियम के लिए क्या खाना चाहिए। शाकाहारियों की कमियों पर: the four nutrients Indian vegetarians most often lack।
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