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कैल्शियम की कमी के लक्षण, और एक फ़र्क़ जो सब गड़बड़ कर देता है

ख़ून में कैल्शियम कम होना और हड्डी में कैल्शियम कम होना दो अलग चीज़ें हैं, और उनके लक्षण अलग हैं। हड्डी की कमी सालों तक कोई लक्षण नहीं देती।

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NutraHerbal संपादकीय टीम11 min read

Reviewed for accuracy and claims compliance: दावा-अनुपालन समीक्षा (claims review)

“कैल्शियम की कमी” शब्द का इस्तेमाल दो बिलकुल अलग चीज़ों के लिए होता है, और यही सारी उलझन की जड़ है।

पहली: ख़ून में कैल्शियम कम होना (हाइपोकैल्सीमिया)।

यह एक चिकित्सकीय स्थिति है, जिसके साफ़ और तेज़ लक्षण होते हैं, झुनझुनी, ऐंठन, और गंभीर होने पर दौरे। और यह आम नहीं है।

दूसरी: शरीर में कैल्शियम का कुल भंडार कम होना, यानी हड्डी कमज़ोर होना।

और यह आम है, और इसका सबसे ज़रूरी लक्षण यह है कि इसका कोई लक्षण नहीं होता।

सालों तक कुछ नहीं। फिर एक फ़्रैक्चर।

और यह फ़र्क़ जानना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि “हाथ-पैर में झुनझुनी है, कैल्शियम की गोली ले लो” और “हड्डी कमज़ोर है” दो अलग स्थितियाँ हैं, और दोनों का रास्ता अलग है।

यह जानकारी है, चिकित्सकीय सलाह नहीं। और अगर मुँह के आसपास या उँगलियों में झुनझुनी के साथ माँसपेशियों में ऐंठन हो रही है, तो यह गोली ख़रीदने का मामला नहीं है, यह डॉक्टर को दिखाने का मामला है।

पहला तरह: ख़ून में कैल्शियम कम

शरीर ख़ून के कैल्शियम को बहुत कसकर नियंत्रित रखता है, पैराथायरॉइड हार्मोन और विटामिन D के ज़रिए।

और वह उसे बनाए रखने के लिए हड्डी से कैल्शियम निकाल लेता है।

तो ख़ून का कैल्शियम गिरने का मतलब है कि वह व्यवस्था ही गड़बड़ है, न कि आपने दूध कम पिया।

यह जानना ज़रूरी है: केवल आहार में कैल्शियम कम होने से ख़ून का कैल्शियम आम तौर पर नहीं गिरता। वह गिरता है जब कोई असली कारण हो।

लक्षण

मुँह के आसपास, उँगलियों और पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन, और यह सबसे विशिष्ट संकेत है।

माँसपेशियों में ऐंठन, हाथ, पैर, पिंडली।

हाथ की माँसपेशियों का अकड़ जाना (carpopedal spasm)।

थकान, चिड़चिड़ापन, उलझन।

और गंभीर होने पर: दौरे, धड़कन की गड़बड़ी, और साँस की नली की ऐंठन।

कारण, और ये असली हैं

विटामिन D की भारी कमी, और यह भारत में सबसे आम कारण है।

पैराथायरॉइड ग्रंथि की समस्या, और यहाँ एक ख़ास बात: थायरॉइड या गर्दन के ऑपरेशन के बाद पैराथायरॉइड प्रभावित हो सकती है, और वह कैल्शियम गिरा देती है। अगर आपका गर्दन का ऑपरेशन हुआ है और झुनझुनी हो रही है, यह तुरंत बताने की बात है।

गुर्दे की बीमारी।

मैग्नीशियम की कमी, क्योंकि मैग्नीशियम के बिना पैराथायरॉइड हार्मोन ठीक काम नहीं करता। और यह वह कारण है जो छूट जाता है: केवल कैल्शियम देने से ठीक नहीं होता, मैग्नीशियम भी ठीक करना पड़ता है।

अवशोषण की समस्याएँ, सीलिएक रोग, आँत की बीमारी, मोटापे की सर्जरी के बाद।

कुछ दवाएँ, और बिसफ़ॉस्फ़ोनेट तथा कुछ कैंसर की दवाएँ।

और नवजात तथा शिशु में, यह एक अलग, महत्वपूर्ण स्थिति है।

तो: ख़ून का कैल्शियम कम होने पर कैल्शियम की गोली खाना अधूरा जवाब है। कारण पता करना असली जवाब है।

दूसरा तरह: हड्डी में कैल्शियम कम, और यह चुप रहता है

यह वह स्थिति है जो भारत में बहुत आम है।

और इसका सबसे ज़रूरी तथ्य यह है:

इसके कोई शुरुआती लक्षण नहीं होते।

न दर्द, न झुनझुनी, न कमज़ोरी। सालों तक कुछ नहीं।

और जो लक्षण लोग इससे जोड़ते हैं, “कैल्शियम की कमी से जोड़ चटकते हैं”, “नाख़ून टूटते हैं”, “बाल झड़ते हैं”, “दाँत कमज़ोर होते हैं”, उनका सबूत कमज़ोर है या नहीं है।

नाख़ून पर सफ़ेद धब्बे, यह कैल्शियम की कमी नहीं है। वह आम तौर पर नाख़ून की जड़ पर छोटी चोट से होता है, और वह सबसे फैला हुआ भ्रम है।

जोड़ चटकना, कैल्शियम से कोई संबंध नहीं।

तो यह कमी कैसे दिखती है?

यह तब दिखती है जब कुछ टूटता है:

कलाई, कूल्हा या रीढ़ का फ़्रैक्चर, छोटी चोट से। लंबाई कम होना, और यह रीढ़ की हड्डियों के दबने से होता है। पीठ का झुकना। और पीठ में दर्द, जो रीढ़ के दबे हुए कशेरुका से हो सकता है।

और जब कमी इतनी बढ़ जाए कि हड्डी नरम हो जाए

यह ऑस्टियोमलेशिया है, और यह ऑस्टियोपोरोसिस से अलग है।

इसमें लक्षण होते हैं:

हड्डियों में दर्द, ख़ासकर कूल्हे, पसली, पिंडली और पीठ में। और दबाने पर दर्द।

माँसपेशियों की कमज़ोरी, ख़ासकर कुर्सी से उठने और सीढ़ी चढ़ने में।

चलते समय लहराना (waddling gait)।

और यह आम तौर पर विटामिन D की भारी कमी से होता है, कैल्शियम की अकेली कमी से नहीं।

और बच्चों में, रिकेट्स

टेढ़े पैर; कलाई और टखने पर सूजन; माथे का उभरा होना; देर से चलना; देर से दाँत निकलना; और छोटी चोट से फ़्रैक्चर।

और शिशु में दौरे, जो कम कैल्शियम से हो सकते हैं।

यह बाल रोग विशेषज्ञ का विषय है। इस पर हमने अलग लेख लिखा है।

ख़ुराक, कितना चाहिए

वयस्क के लिए आम तौर पर रोज़ लगभग 1000 मिलीग्राम तत्व रूप में (elemental) कैल्शियम, सभी स्रोतों से मिलाकर।

और कुछ समूहों में ज़्यादा:

रजोनिवृत्ति के बाद की महिलाएँ और बुज़ुर्ग, लगभग 1200 मिलीग्राम, मार्गदर्शन के हिसाब से। गर्भावस्था और स्तनपान, डॉक्टर की सलाह से। किशोर, 1000 से 1300 मिलीग्राम, क्योंकि हड्डी इन्हीं सालों में सबसे तेज़ बनती है।

और यहाँ वह बात जो सबसे ज़्यादा काम की है और सबसे कम बताई जाती है:

एक बार में 500 मिलीग्राम से ज़्यादा कैल्शियम ठीक से अवशोषित नहीं होता।

अवशोषण की दर मात्रा बढ़ने पर गिरती जाती है।

तो 1000 मिलीग्राम की एक गोली, 500 की दो गोलियों से कम काम करती है।

और यह दूध पर भी लागू होता है, दिन में बाँटकर लेना ज़्यादा असरदार है।

यह मुफ़्त है।

“तत्व रूप” का मतलब, लेबल पढ़ने की बात

यह ज़रूरी है क्योंकि यहाँ लोग धोखा खाते हैं।

कैल्शियम की गोली में जो नमक होता है, उसका पूरा वज़न कैल्शियम नहीं होता।

कैल्शियम कार्बोनेट में लगभग 40 प्रतिशत कैल्शियम। कैल्शियम सिट्रेट में लगभग 21 प्रतिशत।

तो “1250 मिलीग्राम कैल्शियम कार्बोनेट” का मतलब लगभग 500 मिलीग्राम कैल्शियम है।

और “500 मिलीग्राम कैल्शियम सिट्रेट” का मतलब लगभग 105 मिलीग्राम, जो लगभग कुछ नहीं है।

तो लेबल पर यह देखें: “तत्व रूप में कैल्शियम के समतुल्य (elemental calcium equivalent)”।

और दोनों रूपों में से किसे चुनना है, उसका फ़ैसला एक चीज़ पर टिका है, पेट का अम्ल। इस पर हमने अलग, विस्तृत लेख लिखा है; छोटा जवाब: एसिडिटी की दवा लेते हों या बुज़ुर्ग हों तो सिट्रेट।

और विटामिन D के बिना कैल्शियम अधूरा है

विटामिन D का मुख्य काम आँत से कैल्शियम का अवशोषण कराना है।

तो विटामिन D की कमी में कैल्शियम खाने से भी वह ठीक से अवशोषित नहीं होता।

और यही वजह है कि कैल्शियम के साथ विटामिन D एक तर्कसंगत संयोजन है, और इस श्रेणी में वह उन कुछ संयोजनों में है जो वाक़ई न्यायसंगत है।

और मैग्नीशियम भी, क्योंकि वह पैराथायरॉइड और विटामिन D के चयापचय में ज़रूरी है, और भारतीय आहार में अक्सर कम होता है।

दवाओं के साथ, और यह भारत में सबसे ज़रूरी है

कैल्शियम आँत में दूसरी चीज़ों को बाँध लेता है। तो:

आयरन, कैल्शियम आयरन का अवशोषण घटाता है। कम से कम दो घंटे का अंतर रखें।

और यहाँ वह बात जो भारत में सबसे ज़्यादा मायने रखती है: “रात में आयरन और कैल्शियम की गोली साथ ले लो” एक बहुत आम सलाह है, और वह ग़लत है। ख़ून की कमी और कैल्शियम की ज़रूरत एक ही व्यक्ति में बहुत आम है, और दोनों गोलियाँ साथ लेने से आयरन बेकार हो जाता है।

थायरॉइड की दवा (थायरोक्सिन), चार घंटे का अंतर। कैल्शियम उसका अवशोषण बहुत घटाता है, और यह थायरॉइड के ठीक से नियंत्रित न होने का एक असली कारण है।

बिसफ़ॉस्फ़ोनेट (ऑस्टियोपोरोसिस की दवा), ख़ाली पेट, कैल्शियम से दूर। और यह विडंबना है, क्योंकि यही मरीज़ दोनों लेता है।

कुछ एंटीबायोटिक, टेट्रासाइक्लिन और फ़्लोरोक्विनोलोन। कई घंटे का अंतर।

और थियाज़ाइड मूत्रवर्धक, ये ख़ून का कैल्शियम बढ़ाते हैं, तो साथ में निगरानी।

और डिगॉक्सिन।

सीधा नियम: कैल्शियम अकेला, दूसरी गोलियों से अलग समय पर, और दिन में बाँटकर।

और एक ज़रूरी सावधानी

ज़्यादा कैल्शियम बेहतर नहीं है।

गुर्दे की पथरी, बड़े अध्ययन में कैल्शियम और विटामिन D के पूरक से पथरी का जोखिम बढ़ा हुआ मिला।

और उलटी बात, जो दिलचस्प है: भोजन से मिलने वाला कैल्शियम पथरी का जोखिम घटाता है, क्योंकि वह आँत में ऑक्सलेट को बाँध लेता है और उसे अवशोषित होने से रोकता है।

तो पथरी के इतिहास में कैल्शियम भोजन से लेना चाहिए, पूरक का फ़ैसला डॉक्टर के साथ।

और हृदय, कुछ विश्लेषणों में कैल्शियम के पूरक और हृदय की घटनाओं के बीच संबंध दर्ज हुआ है। यह विवादित है और अनिर्णीत है, और जो बात ज़्यादा संगत है, वह यह है कि चिंता पूरक से जुड़ी है, भोजन के कैल्शियम से नहीं।

तो हमारी स्थिति: भोजन पहले, पूरक कमी भरने के लिए, और कुल मात्रा सिफ़ारिश की सीमा में, ज़्यादा नहीं।

और एक बहुत आम व्यावहारिक समस्या: कब्ज़। कैल्शियम कार्बोनेट से यह आम है, और यही सबसे बड़ी वजह है जिससे लोग गोली छोड़ देते हैं। पानी, फ़ाइबर, और ज़रूरत पड़ने पर सिट्रेट रूप।

जो हम कह सकते हैं, जो नहीं

कह सकते हैं: कैल्शियम के अनुमत पोषक-कार्य दावे, जब वह मापी गई, सार्थक मात्रा में हो, हड्डियों और दाँतों के सामान्य रख-रखाव के लिए आवश्यक, सामान्य माँसपेशी कार्य, सामान्य तंत्रिका संचार, सामान्य रक्त का थक्का जमना, और सामान्य ऊर्जा चयापचय में योगदान, निर्धारित शब्दावली में; और विटामिन D के अनुमत दावे, जहाँ वह शामिल हो।

नहीं कह सकते: ऑस्टियोपोरोसिस का इलाज, फ़्रैक्चर रोकना, जोड़ों के दर्द का इलाज, नाख़ून या बाल मज़बूत करना।

और “लंबाई बढ़ाना” हम विशेष रूप से मना करते हैं, यह बच्चों के कैल्शियम उत्पादों का सबसे आम दावा है, और वह झूठ है। कैल्शियम बच्चे को उसकी आनुवंशिक संभावना से ज़्यादा लंबा नहीं करता।

और सबसे ईमानदार वाक्य:

ख़ून का कैल्शियम कम होना एक चिकित्सकीय स्थिति है जिसके साफ़ लक्षण हैं और जिसका कारण ढूँढना पड़ता है।

हड्डी का कैल्शियम कम होना आम है और उसका कोई लक्षण नहीं होता, और वह फ़्रैक्चर के रूप में सामने आता है।

और नाख़ून के सफ़ेद धब्बे, जोड़ चटकना और बाल झड़ना, इनका कैल्शियम से संबंध नहीं है।

डॉक्टर के पास कब

तुरंत, और गोली ख़रीदने से पहले:

  • मुँह के आसपास या उँगलियों में झुनझुनी, माँसपेशियों में ऐंठन के साथ
  • हाथ की माँसपेशियों का अकड़ जाना
  • दौरे
  • और ख़ासकर अगर गर्दन या थायरॉइड का ऑपरेशन हुआ है

जल्दी दिखाएँ:

  • छोटी चोट से हड्डी टूटना
  • लंबाई कम होना, या पीठ का झुकना
  • हड्डियों में दर्द, ख़ासकर कूल्हे, पसली या पिंडली में
  • कुर्सी से उठने या सीढ़ी चढ़ने में दिक़्क़त
  • चलते समय लहराना
  • बच्चे में: टेढ़े पैर, कलाई पर सूजन, देर से चलना, बाल रोग विशेषज्ञ

पूरक शुरू करने से पहले पूछें, अगर: पथरी का इतिहास; गुर्दे की बीमारी; पैराथायरॉइड की समस्या या ऊँचा कैल्शियम; सारकॉइडोसिस; डिगॉक्सिन या थियाज़ाइड लेते हैं; थायरोक्सिन, आयरन, बिसफ़ॉस्फ़ोनेट या एंटीबायोटिक लेते हैं (समय का अंतर); गर्भावस्था।

रोकें और दिखाएँ: जी मिचलाना, उल्टी, कब्ज़, बहुत प्यास, बहुत पेशाब, उलझन, बहुत कमज़ोरी, ख़ासकर अगर आप उच्च-मात्रा विटामिन D भी ले रहे हैं।

और यह ज़रूर जाँचें: अगर आपका थायरॉइड ठीक नियंत्रित नहीं हो रहा, या आयरन की गोली से हीमोग्लोबिन नहीं बढ़ रहा, देखें कि आप कैल्शियम साथ में नहीं ले रहे।

निचोड़

  1. “कैल्शियम की कमी” दो अलग चीज़ों के लिए इस्तेमाल होता है
  2. ख़ून का कैल्शियम कम होना एक चिकित्सकीय स्थिति है, और आम नहीं
  3. हड्डी का कैल्शियम कम होना आम है और चुप रहता है
  4. शरीर ख़ून का कैल्शियम हड्डी से निकालकर बनाए रखता है
  5. तो ख़ून का कैल्शियम गिरना आहार की बात नहीं, व्यवस्था की बात है
  6. मुँह के आसपास और उँगलियों में झुनझुनी सबसे विशिष्ट संकेत है
  7. गर्दन या थायरॉइड के ऑपरेशन के बाद झुनझुनी तुरंत बताने की बात है
  8. मैग्नीशियम की कमी एक छूट जाने वाला कारण है
  9. हड्डी की कमी के कोई शुरुआती लक्षण नहीं होते
  10. नाख़ून के सफ़ेद धब्बे कैल्शियम की कमी नहीं हैं
  11. जोड़ चटकने का कैल्शियम से कोई संबंध नहीं
  12. यह कमी फ़्रैक्चर, लंबाई कम होने और पीठ झुकने से दिखती है
  13. ऑस्टियोमलेशिया में लक्षण होते हैं, हड्डी का दर्द और कमज़ोरी
  14. और वह आम तौर पर विटामिन D की भारी कमी से होता है
  15. बच्चों में रिकेट्स, टेढ़े पैर, कलाई पर सूजन, देर से चलना
  16. वयस्क को लगभग 1000 मि.ग्रा. तत्व-रूप कैल्शियम रोज़
  17. रजोनिवृत्ति के बाद और बुज़ुर्गों में लगभग 1200
  18. किशोरों में 1000–1300, क्योंकि हड्डी तभी बनती है
  19. एक बार में 500 मि.ग्रा. से ज़्यादा ठीक से अवशोषित नहीं होता
  20. तो 1000 की एक गोली, 500 की दो से कम काम करती है
  21. और यह दूध पर भी लागू होता है, बाँटकर लें
  22. कार्बोनेट में ~40% कैल्शियम; सिट्रेट में ~21%
  23. “500 मि.ग्रा. कैल्शियम सिट्रेट” = लगभग 105 मि.ग्रा. कैल्शियम
  24. लेबल पर “तत्व रूप में समतुल्य” देखें
  25. विटामिन D के बिना कैल्शियम ठीक से अवशोषित नहीं होता
  26. कैल्शियम आयरन का अवशोषण घटाता है, दो घंटे का अंतर
  27. “रात में आयरन और कैल्शियम साथ” एक आम और ग़लत सलाह है
  28. थायरोक्सिन से चार घंटे का अंतर
  29. बिसफ़ॉस्फ़ोनेट ख़ाली पेट, कैल्शियम से दूर
  30. ज़्यादा कैल्शियम बेहतर नहीं, पथरी का जोखिम दर्ज है
  31. भोजन का कैल्शियम पथरी का जोखिम घटाता है, ऑक्सलेट बाँधकर
  32. हृदय की चिंता पूरक से जुड़ी है, भोजन से नहीं, और विवादित है
  33. कब्ज़ सबसे आम वजह है जिससे लोग गोली छोड़ देते हैं
  34. “लंबाई बढ़ाना” एक झूठा दावा है

संरचना: Calcium & D3 Capsule, Vitamin D3 Drops। और पढ़ें: calcium citrate vs carbonate, कैल्शियम के लिए क्या खाना चाहिए, दूध न पीने वाले कैल्शियम कैसे लें, और विटामिन D की कमी के लक्षण।

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Reviewed by

Tarun Vashisht

Head of Ayurvedic Formulations & Regulatory Quality

Ayurvedic physician and pharmacognosy specialist with over 15 years of experience overseeing GMP-certified herbal extractions, classical proprietary formulations, and AYUSH/FSSAI regulatory compliance for direct-selling and retail nutraceutical brands.

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