Reviewed for accuracy and claims compliance: दावा-अनुपालन समीक्षा (claims review)
कब्ज़ भारत में सबसे आम पाचन शिकायत है, और इसका सबसे आम “इलाज” भी एक ही है, मेडिकल स्टोर से जुलाब, और वह भी अक्सर रोज़।
इस लेख में वह क्रम है जो वाक़ई काम करता है, और वह आदत जिसे बदलना आधा इलाज है।
यह लेख जानकारी के लिए है, चिकित्सकीय सलाह नहीं। मल में ख़ून, वज़न घटना, या शौच की आदत में अचानक लगातार बदलाव, इनमें डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है।
पहले: कब्ज़ है क्या
रोज़ शौच जाना ज़रूरी नहीं है। हफ़्ते में तीन बार से लेकर दिन में तीन बार तक, यह सब सामान्य की सीमा में आता है।
कब्ज़ का मतलब है:
- हफ़्ते में तीन बार से कम
- मल सख़्त या गोलियों जैसा
- ज़ोर लगाना पड़े, यह सबसे अहम संकेत है
- पूरा न निकलने जैसा अहसास
- पेट भारी रहना
आवृत्ति से ज़्यादा ज़ोर लगाना मायने रखता है। जो व्यक्ति हर दूसरे दिन बिना मेहनत के जाता है, उसे कब्ज़ नहीं है।
वजहें
- पानी कम पीना, सबसे आम
- फ़ाइबर कम, मैदा ज़्यादा, सब्ज़ी-दाल कम
- शारीरिक गतिविधि न होना
- इच्छा को टालना, यह बहुत बड़ा और बहुत अनदेखा कारण है
- अनियमित दिनचर्या और यात्रा
- कुछ दवाएँ, दर्द निवारक, आयरन की गोलियाँ, एंटासिड, रक्तचाप की कुछ दवाएँ
- थायराइड, कम सक्रिय थायराइड में कब्ज़ आम है
- गर्भावस्था
- तनाव
अगर कब्ज़ नई है और किसी दवा के शुरू होने के बाद आई है, तो डॉक्टर से पूछें, दवा ख़ुद बंद न करें।
जो वाक़ई काम करता है, क्रम से
1. पानी, और फ़ाइबर के साथ
यह सबसे ज़रूरी बात है और इसे ग़लत करने से हालत बिगड़ती है।
फ़ाइबर पानी सोखकर मल को नरम और भारी बनाता है। पानी कम हो तो वही फ़ाइबर मल को और सख़्त कर देता है।
बहुत लोग ईसबगोल शुरू करते हैं, पानी नहीं बढ़ाते, तकलीफ़ बढ़ती है, और वे निष्कर्ष निकालते हैं कि फ़ाइबर उन्हें सूट नहीं करता।
नियम: एक चम्मच ईसबगोल के साथ पूरा एक गिलास पानी, और दिन भर में पर्याप्त। पेशाब का रंग हल्का रहना चाहिए।
2. शौच की आदत, यह आधा इलाज है
यह सबसे कम बोला जाने वाला और सबसे असरदार हिस्सा है।
- इच्छा को न टालें। बार-बार टालने से आँतें संकेत भेजना कम कर देती हैं।
- एक नियत समय, आम तौर पर सुबह, नाश्ते के बाद। भोजन के बाद आँतों की गति स्वाभाविक रूप से बढ़ती है; इसका फ़ायदा उठाएँ।
- पैरों के नीचे चौकी रखें। यह छोटी-सी चीज़ वास्तव में फ़र्क़ डालती है, घुटने कूल्हों से ऊपर होने पर बैठने की स्थिति मल निकलने के लिए बेहतर होती है।
- शौचालय में फ़ोन न ले जाएँ। लंबे समय तक बैठना बवासीर की तरफ़ ले जाता है।
- ज़ोर न लगाएँ। न आए तो उठ जाएँ और बाद में आएँ।
3. सुबह गुनगुना पानी
उठते ही एक-दो गिलास गुनगुना पानी। यह सरल, सस्ता और बहुत लोगों में कारगर है।
4. फ़ाइबर बढ़ाएँ, धीरे-धीरे
| स्रोत | कैसे |
|---|---|
| ईसबगोल | रात में, पूरे गिलास पानी के साथ |
| अलसी | पिसी हुई, एक चम्मच |
| भीगे मुनक्का या अंजीर | रात में भिगोकर सुबह |
| पपीता, अमरूद, सेब | छिलके सहित |
| हरी सब्ज़ियाँ, लौकी, तोरी | पकी हुई, भरपूर |
| दाल और साबुत अनाज | मैदा की जगह |
एक दिन में बहुत ज़्यादा फ़ाइबर शुरू न करें, इससे गैस और फूलना होगा। दो हफ़्तों में धीरे-धीरे बढ़ाएँ।
5. चलना
शारीरिक गतिविधि आँतों की गति बढ़ाती है। रोज़ बीस-तीस मिनट।
6. त्रिफला
त्रिफला का पारंपरिक उपयोग इसी के लिए है और यह सबसे आज़माई हुई चीज़ है।
रात में गुनगुने पानी के साथ, और चौथाई चम्मच से शुरू करें। ज़्यादा मात्रा से ढीला मल होता है, और लोग घबराकर छोड़ देते हैं।
7. दही और छाछ
पाचन और नियमितता दोनों के लिए।
अब जुलाब की आदत
यह हिस्सा ज़रूरी है।
बहुत से लोग सालों से रोज़ या हर दूसरे दिन जुलाब ले रहे होते हैं, और अक्सर उन्हें ख़ुद लगता है कि यह ठीक नहीं है।
उत्तेजक जुलाब, जो आँतों को ज़बरदस्ती चलाते हैं, लंबे समय तक रोज़ लेने के लिए नहीं हैं। कई लोगों को लगता है कि इसके बिना अब काम ही नहीं चलता, और वह चक्र तोड़ना मुश्किल लगता है।
निकलने का रास्ता, संक्षेप में:
- पहले ऊपर की सारी चीज़ें ठीक से करें, पानी, फ़ाइबर, समय, चलना
- ईसबगोल जैसे बल्क बनाने वाले फ़ाइबर पर जाएँ, जो उत्तेजक नहीं हैं
- उत्तेजक जुलाब की मात्रा धीरे-धीरे कम करें, एक साथ नहीं
- अपने डॉक्टर की मदद लें, यह ऐसा काम है जिसमें मार्गदर्शन काम आता है
अगर आप सालों से रोज़ जुलाब ले रहे हैं, तो यह अकेले करने वाली चीज़ नहीं है।
जो नहीं करना चाहिए
- रोज़ उत्तेजक जुलाब
- फ़ाइबर बढ़ाकर पानी न बढ़ाना
- एरंडी का तेल (अरंडी) नियमित रूप से, यह तेज़ है और रोज़ के लिए नहीं
- ख़ून आने को नज़रअंदाज़ करना
- महीनों तक घरेलू उपाय करते रहना जब सुधार न हो
बच्चों और बुज़ुर्गों में
बच्चों में: अक्सर शौच रोकने की आदत से शुरू होता है, स्कूल में जाना पसंद न करना, या एक बार दर्द होने के बाद डर। ज़बरदस्ती या डाँट उल्टा काम करती है। पानी, फल और नियमित समय, और ज़रूरत हो तो बाल रोग विशेषज्ञ से।
बुज़ुर्गों में: दवाएँ, कम पानी, कम गतिविधि, तीनों मिलकर। यह ज़्यादा आम है और ज़्यादा ध्यान माँगता है।
डॉक्टर के पास कब जाएँ
- मल में ख़ून, या मल काला
- बिना कोशिश वज़न घटना
- शौच की आदत में अचानक लगातार बदलाव, ख़ासकर चालीस की उम्र के बाद
- मल की मोटाई में लगातार बदलाव
- तेज़ दर्द, उल्टी, पेट का फूलना और हवा भी न निकलना
- कब्ज़ के साथ कभी दस्त, लंबे समय से
- घरेलू उपाय से कई हफ़्तों में सुधार न हो
- परिवार में आँत के कैंसर का इतिहास
निचोड़
- ज़ोर लगाना पड़े, यह कब्ज़ का असली संकेत है, आवृत्ति नहीं
- पानी और फ़ाइबर साथ, अकेला फ़ाइबर उल्टा पड़ता है
- शौच का नियत समय और इच्छा न टालना, आधा इलाज
- पैरों के नीचे चौकी, छोटी चीज़, असली फ़र्क़
- त्रिफला, कम मात्रा से शुरू
- फ़ाइबर धीरे-धीरे बढ़ाएँ
- रोज़ जुलाब की ज़रूरत पड़ना डॉक्टर से मिलने का संकेत है
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