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FSSAI लाइसेंस कैसे लें, तीन श्रेणियाँ और असली प्रक्रिया

रजिस्ट्रेशन, स्टेट लाइसेंस और सेंट्रल लाइसेंस में से आपको कौन-सा चाहिए, कागज़ात क्या लगते हैं, और लोग कहाँ अटकते हैं।

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NutraHerbal Editorial12 min read

Reviewed for accuracy and claims compliance: Claims and compliance review

हमने अलग से लिखा है कि आपका प्रोडक्ट FSSAI के रास्ते जाएगा या AYUSH के, वह पहला फ़ैसला है और उसे पहले तय कर लेना चाहिए।

यह लेख उसके बाद का है। मान लीजिए तय हो गया कि प्रोडक्ट फ़ूड सप्लीमेंट / न्यूट्रास्यूटिकल के तौर पर जाएगा। अब FSSAI लाइसेंस कैसे लेना है।

और सबसे पहले वह बात जो ज़्यादातर लोगों को नहीं पता होती: FSSAI का एक लाइसेंस नहीं होता। तीन स्तर होते हैं, और ग़लत स्तर पर आवेदन करना सबसे आम देरी की वजह है।

यह जानकारी सामान्य समझ के लिए है, क़ानूनी या नियामक सलाह नहीं। सीमाएँ, शुल्क, फ़ॉर्म और प्रक्रिया समय-समय पर बदलती है। आवेदन से पहले FSSAI के मौजूदा नियम और किसी योग्य सलाहकार से पुष्टि कर लें।

पहले: तीन श्रेणियाँ

ये कारोबार के आकार और दायरे पर तय होती हैं, प्रोडक्ट पर नहीं।

बेसिक रजिस्ट्रेशन, सबसे छोटे कारोबार के लिए। बहुत छोटे सालाना टर्नओवर और छोटे पैमाने की गतिविधि वाले उद्यम। एक राज्य के भीतर, छोटी दुकान या घरेलू स्तर का काम।

स्टेट लाइसेंस, मध्यम आकार के कारोबार के लिए, एक राज्य में काम करते हुए।

सेंट्रल लाइसेंस, बड़े कारोबार, और इसके अलावा कुछ ऐसी स्थितियाँ जिनमें आकार मायने नहीं रखता।

सेंट्रल लाइसेंस लगभग हमेशा ज़रूरी होता है अगर: आप आयात या निर्यात करते हैं, आप एक से ज़्यादा राज्यों में काम करते हैं, आप ई-कॉमर्स पर बेचते हैं, या आप न्यूट्रास्यूटिकल / हेल्थ सप्लीमेंट जैसी विशेष श्रेणियों में हैं।

यह आख़िरी बात सप्लीमेंट ब्रांड के लिए निर्णायक है। इसलिए ज़्यादातर सप्लीमेंट ब्रांड, कारोबार कितना भी छोटा हो, सेंट्रल लाइसेंस के दायरे में आते हैं।

टर्नओवर की सीमाएँ और श्रेणियों की सूची बदलती रहती है, इसलिए यहाँ आँकड़े नहीं दे रहे। FoSCoS पोर्टल पर मौजूदा सीमा देख लें।

दूसरा फ़ैसला: आपको किस तरह का लाइसेंस चाहिए

और यह अलग सवाल है।

मैन्युफ़ैक्चरर लाइसेंस, अगर आप ख़ुद बनाते हैं। इसके लिए प्लांट, लेआउट, मशीनरी की सूची, फ़ूड सेफ़्टी प्लान और तकनीकी व्यक्ति चाहिए।

मार्केटर लाइसेंस, और यही वह श्रेणी है जिसकी ज़्यादातर नए ब्रांड को ज़रूरत होती है। अगर आप किसी थर्ड-पार्टी मैन्युफ़ैक्चरर से बनवाकर अपने ब्रांड नाम से बेचते हैं, तो आप मार्केटर हैं।

ट्रेडर / डिस्ट्रीब्यूटर / रिटेलर, अगर आप सिर्फ़ ख़रीद-बिक्री करते हैं।

यहाँ सबसे बड़ी ग़लतफ़हमी यह है कि “मेरा मैन्युफ़ैक्चरर लाइसेंसधारी है, तो मुझे ज़रूरत नहीं”।

ग़लत। लेबल पर ब्रांड आपका है, इसलिए प्रोडक्ट की ज़िम्मेदारी आपकी है, और आपको अपना लाइसेंस चाहिए। मैन्युफ़ैक्चरर का लाइसेंस उसकी यूनिट को कवर करता है, आपके ब्रांड को नहीं।

कागज़ात, सामान्य सूची

सटीक सूची श्रेणी और राज्य के हिसाब से बदलती है, इसलिए इसे शुरुआती तैयारी समझिए, अंतिम नहीं।

पहचान और पते का प्रमाण आवेदक और निदेशकों / साझेदारों का।

कारोबार का गठन दस्तावेज़, कंपनी का इनकॉर्पोरेशन सर्टिफ़िकेट, पार्टनरशिप डीड, या प्रोप्राइटरशिप का प्रमाण।

परिसर का प्रमाण, किरायानामा या मालिकाना दस्तावेज़, और NOC जहाँ ज़रूरी हो।

प्रोडक्ट की सूची उस श्रेणी के साथ जिसमें वह आता है।

मार्केटर के लिए: मैन्युफ़ैक्चरर का वैध FSSAI लाइसेंस और उसके साथ का समझौता।

मैन्युफ़ैक्चरर के लिए: यूनिट का लेआउट प्लान, मशीनरी की सूची और क्षमता, पानी की जाँच रिपोर्ट, तकनीकी व्यक्ति का विवरण, और फ़ूड सेफ़्टी मैनेजमेंट सिस्टम का प्लान।

और न्यूट्रास्यूटिकल श्रेणी में, प्रोडक्ट से जुड़े दस्तावेज़, कम्पोज़िशन, लेबल का ड्राफ़्ट, और जहाँ लागू हो, सामग्री के स्वीकार्य होने का आधार।

प्रक्रिया, कदम-दर-कदम

एक, FoSCoS पोर्टल पर रजिस्टर करें। यही FSSAI का आवेदन पोर्टल है।

दो, सही श्रेणी और सही प्रकार चुनें। यहाँ ग़लती सबसे भारी पड़ती है, क्योंकि ग़लत श्रेणी में भरा आवेदन बाद में अस्वीकार होता है और आप शुरू से शुरू करते हैं।

तीन, कारोबार की जानकारी और प्रोडक्ट की श्रेणियाँ भरें। प्रोडक्ट श्रेणी वही चुनें जिसमें आप असल में काम करेंगे, और ज़रूरत से ज़्यादा भी न चुनें।

चार, दस्तावेज़ अपलोड करें। स्कैन साफ़ हो, नाम हर दस्तावेज़ में एक जैसा हो।

पाँच, शुल्क जमा करें। श्रेणी और अवधि के हिसाब से। लाइसेंस एक से पाँच साल के लिए लिया जा सकता है।

छह, जाँच। मैन्युफ़ैक्चरिंग यूनिट के लिए परिसर का निरीक्षण होता है। मार्केटर के लिए आम तौर पर दस्तावेज़ों की जाँच।

सात, प्रश्न आएँ तो समय पर जवाब दें। पोर्टल पर पूछे गए सवालों का जवाब देने की समय-सीमा होती है, और उसे चूकने पर आवेदन बंद हो जाता है।

आठ, लाइसेंस जारी होने पर नंबर लेबल पर जाए। 14 अंकों का नंबर, और वह लेबल पर दिखाई देना चाहिए।

लोग कहाँ अटकते हैं

हमारे अनुभव में, पाँच जगहें बार-बार दोहराई जाती हैं।

ग़लत श्रेणी। स्टेट लाइसेंस के लिए आवेदन, जबकि ई-कॉमर्स या न्यूट्रास्यूटिकल होने की वजह से सेंट्रल चाहिए था।

मैन्युफ़ैक्चरर का लाइसेंस अपना समझ लेना। ऊपर समझाया गया।

प्रोडक्ट श्रेणी बहुत सीमित चुनना, और फिर छह महीने बाद नया फ़ॉर्मेट लाने पर संशोधन के चक्कर में पड़ना।

लेबल का ड्राफ़्ट नियमों से मेल न खाना। यह लाइसेंस के बाद की समस्या है लेकिन साथ ही सोचनी चाहिए, लाइसेंस मिल जाने का मतलब यह नहीं कि आपका लेबल सही है।

और पते का बेमेल। जो पता लाइसेंस पर है, वही लेबल पर और वही GST पर होना चाहिए।

लाइसेंस मिलने के बाद

लाइसेंस शुरुआत है, अंत नहीं।

लेबल पर 14 अंकों का नंबर और “FSSAI” का लोगो, निर्धारित तरीक़े से।

वार्षिक रिटर्न, जहाँ लागू हो।

नवीनीकरण समय से, वैधता ख़त्म होने के बाद का काम बिना लाइसेंस का काम है।

किसी भी बदलाव पर संशोधन, नया प्रोडक्ट, नया पता, नया मैन्युफ़ैक्चरर, कारोबार के गठन में बदलाव।

रिकॉर्ड रखना, बैच के रिकॉर्ड, टेस्ट रिपोर्ट, शिकायतें, और वापसी की व्यवस्था।

और जो लाइसेंस आपको नहीं देता

यह सबसे ज़रूरी हिस्सा है, और सबसे ज़्यादा नज़रअंदाज़ होता है।

FSSAI लाइसेंस आपको बीमारी ठीक करने का दावा करने की अनुमति नहीं देता।

लाइसेंस का मतलब है कि आप खाद्य कारोबार के लिए पंजीकृत हैं। क्लेम का मामला अलग है और उसके अपने नियम हैं।

और ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज़ (ऑब्जेक्शनेबल एडवर्टाइज़मेंट्स) एक्ट कुछ बीमारियों के विज्ञापन पर रोक लगाता है, यह रोक इस बात से नहीं हटती कि आपके पास कौन-सा लाइसेंस है।

विटामिन और मिनरल के लिए पोषक-तत्व से जुड़े कुछ निर्धारित कथन मौजूद हैं। वनस्पतियों के लिए इस तरह के स्वीकृत स्वास्थ्य-दावे नहीं हैं, और इसीलिए “इम्यूनिटी बूस्ट करता है” या “शुगर जड़ से ख़त्म” जैसी पंक्तियाँ लिखने का कोई रास्ता नहीं निकलता, लाइसेंस होने के बाद भी नहीं।

हमने इस पर अलग से लिखा है कि किस तरह के क्लेम आपकी लिस्टिंग हटवा देते हैं।

छोटा सारांश

  1. पहले तय करें: FSSAI का रास्ता या AYUSH का
  2. FSSAI का एक लाइसेंस नहीं, तीन स्तर हैं
  3. बेसिक रजिस्ट्रेशन, स्टेट लाइसेंस, सेंट्रल लाइसेंस
  4. ग़लत स्तर पर आवेदन सबसे आम देरी की वजह है
  5. आयात-निर्यात, एक से ज़्यादा राज्य, ई-कॉमर्स, सेंट्रल लाइसेंस
  6. न्यूट्रास्यूटिकल और हेल्थ सप्लीमेंट भी विशेष श्रेणी में हैं
  7. इसलिए ज़्यादातर सप्लीमेंट ब्रांड सेंट्रल के दायरे में आते हैं
  8. टर्नओवर की सीमाएँ बदलती हैं, FoSCoS पर मौजूदा देखें
  9. दूसरा फ़ैसला: मैन्युफ़ैक्चरर, मार्केटर, या ट्रेडर लाइसेंस
  10. तीसरे पक्ष से बनवाकर अपने ब्रांड से बेचना = मार्केटर
  11. “मेरे मैन्युफ़ैक्चरर का लाइसेंस है, मुझे ज़रूरत नहीं”, ग़लत
  12. उसका लाइसेंस उसकी यूनिट कवर करता है, आपका ब्रांड नहीं
  13. कागज़ात: पहचान, गठन दस्तावेज़, परिसर का प्रमाण, प्रोडक्ट सूची
  14. मार्केटर को मैन्युफ़ैक्चरर का लाइसेंस और समझौता देना होता है
  15. मैन्युफ़ैक्चरर को लेआउट, मशीनरी, पानी की रिपोर्ट, तकनीकी व्यक्ति
  16. आवेदन FoSCoS पोर्टल से होता है
  17. श्रेणी और प्रकार सही चुनें, ग़लती पर शुरू से शुरू
  18. प्रोडक्ट श्रेणियाँ न बहुत सीमित, न ज़रूरत से ज़्यादा
  19. लाइसेंस एक से पाँच साल के लिए लिया जा सकता है
  20. मैन्युफ़ैक्चरिंग यूनिट का निरीक्षण होता है
  21. पोर्टल के सवालों की समय-सीमा चूकने पर आवेदन बंद हो जाता है
  22. 14 अंकों का नंबर लेबल पर दिखना चाहिए
  23. लाइसेंस, लेबल और GST का पता एक ही होना चाहिए
  24. बाद में: वार्षिक रिटर्न, समय से नवीनीकरण, हर बदलाव पर संशोधन
  25. बैच रिकॉर्ड, टेस्ट रिपोर्ट और शिकायत व्यवस्था रखनी होती है
  26. और लाइसेंस आपको बीमारी ठीक करने का दावा नहीं देता
  27. क्लेम का मामला लाइसेंस से अलग है
  28. मैजिक रेमेडीज़ एक्ट की रोक लाइसेंस से नहीं हटती
  29. विटामिन-मिनरल के लिए निर्धारित कथन हैं; वनस्पतियों के लिए नहीं
  30. लाइसेंस मिल जाना इस बात का सबूत नहीं कि आपका लेबल सही है

आगे पढ़ें: आयुर्वेदिक मैन्युफ़ैक्चरिंग के लाइसेंस, भारत में सप्लीमेंट ब्रांड कैसे शुरू करें, लेबल कम्प्लायंस. संबंधित लेख: FSSAI vs AYUSH, कौन-सा रास्ता, लेबल पर क्या लिखना ज़रूरी है, the claims that get your listing pulled, और मैन्युफ़ैक्चरर कैसे चुनें.

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Reviewed by

Tarun Vashisht

Head of Ayurvedic Formulations & Regulatory Quality

Ayurvedic physician and pharmacognosy specialist with over 15 years of experience overseeing GMP-certified herbal extractions, classical proprietary formulations, and AYUSH/FSSAI regulatory compliance for direct-selling and retail nutraceutical brands.

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