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स्पिरुलिना के फ़ायदे और कैसे लें, और एक दावा जिस पर भरोसा करना ख़तरनाक है

स्पिरुलिना का B12 बड़े हिस्से में निष्क्रिय रूप है, और वह जाँच में दिख सकता है। शाकाहारी व्यक्ति उस पर भरोसा न करे, यह सुरक्षा की बात है।

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NutraHerbal संपादकीय टीम11 min read

Reviewed for accuracy and claims compliance: दावा-अनुपालन समीक्षा (claims review)

स्पिरुलिना के पैक पर जो सबसे बड़ा आँकड़ा होता है, वह सच है: उसमें प्रोटीन 60 से 70 प्रतिशत तक होता है।

और यह वाक़ई असाधारण है, मांस से ज़्यादा, सोया से ज़्यादा।

और फिर हिसाब:

एक ख़ुराक 3 से 5 ग्राम होती है।

यानी लगभग 2 से 3.5 ग्राम प्रोटीन।

और एक अंडे में 6 ग्राम होता है।

तो प्रतिशत सच है और लगभग बेकार है। यह वही हिसाब है जो मोरिंगा के साथ है, और उस पर हमने अलग लिखा है।

और इस लेख में एक दूसरी बात है जो इससे ज़्यादा गंभीर है, और वह सुरक्षा की है:

स्पिरुलिना में जो विटामिन B12 बताया जाता है, वह बड़े हिस्से में निष्क्रिय रूप है, और वह जाँच में गिनकर रिपोर्ट को झूठा आश्वासन दे सकता है।

और B12 की कमी से तंत्रिका का नुक़सान होता है, जो लंबे समय तक रहने पर स्थायी हो सकता है।

तो यह उन कुछ दावों में है जिन्हें हम सबूत की कमी से नहीं, सुरक्षा की वजह से मना करते हैं।

यह जानकारी है, चिकित्सकीय सलाह नहीं। और इस सामग्री की असली गुणवत्ता समस्या माइक्रोसिस्टिन है, जिस पर हमने अलग, पूरा लेख लिखा है, और वह इस लेख से ज़्यादा ज़रूरी है।

यह क्या है

और पहली बात एक सुधार है, जो सोचने का तरीक़ा बदल देती है।

स्पिरुलिना एक शैवाल (algae) नहीं है। वह एक सायनोबैक्टीरिया है, Arthrospira platensis और Arthrospira maxima।

यानी वह एक जीवाणु है, जो प्रकाश-संश्लेषण करता है। इसीलिए वह हरा-नीला है और “नीली-हरी शैवाल” कहलाता है।

और इसके तीन व्यावहारिक नतीजे हैं:

उसकी कोशिका-भित्ति में सेल्यूलोज़ नहीं है। तो उसे पचाने के लिए कोई विशेष प्रसंस्करण नहीं चाहिए, और उसकी पाचनशीलता वाक़ई अच्छी है। (क्लोरेला में यह अलग है।)

उसमें न्यूक्लिक अम्ल ऊँचे होते हैं, क्योंकि एक-कोशिकीय जीव ज़्यादातर मशीनरी है। और इसका यूरिक एसिड से संबंध है, नीचे।

और वह सायनोबैक्टीरिया है, तो उसमें या उसके साथ उगने वाले दूसरे सायनोबैक्टीरिया में विषैले पदार्थ बन सकते हैं। यही माइक्रोसिस्टिन वाली बात है।

फ़ायदे, ईमानदार हिसाब

जहाँ सबूत सबसे अच्छा है: लिपिड

कई छोटे अध्ययनों और उनके पूल किए गए विश्लेषणों में स्पिरुलिना से कुल तथा LDL कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड में मामूली कमी दर्ज है।

और यह संभवतः उसका सबसे अच्छा समर्थित असर है।

सीमाएँ: अध्ययन छोटे, अवधि कम।

रक्तचाप

कुछ छोटे अध्ययनों में मामूली कमी।

एलर्जिक राइनाइटिस

एक छोटे अध्ययन में लक्षणों में सुधार। दिलचस्प, एकल, और बड़े पैमाने पर दोहराया नहीं गया।

और वह उपयोग जो सबसे वैध है

कुपोषण में।

और यह सबसे ईमानदार बात है: स्पिरुलिना का सबसे गंभीर ऐतिहासिक उपयोग पोषण-पुनर्वास कार्यक्रमों में रहा है, जहाँ कम मात्रा में सघन सूक्ष्म पोषक तत्व देना ही लक्ष्य था।

वह काम गंभीर है। और वह एक “वेलनेस” शेल्फ़ से बहुत अलग संदर्भ है।

फ़ाइकोसायनिन

वह नीला रंगद्रव्य, जिस पर सबसे ज़्यादा शोध रुचि है, antioxidant और सूजन-विरोधी गतिविधि प्रयोगशाला में।

जहाँ सबूत नहीं है

“डिटॉक्स” और “भारी धातु निकालना”, और यह विडंबनापूर्ण है, क्योंकि इस सामग्री की ख़ुद की मुख्य समस्या संदूषण है।

प्रतिरक्षा बढ़ाना, और वह एक सावधानी भी है, नीचे।

ख़ून की कमी का इलाज, नहीं।

वज़न घटाना, नहीं।

और कैंसर, नहीं।

और निर्णायक नियामक तथ्य: स्पिरुलिना के लिए कोई स्वीकृत स्वास्थ्य दावा नहीं है।

और वह B12 वाली बात, पूरी

यह इस लेख का सबसे ज़रूरी हिस्सा है।

स्पिरुलिना के लेबल पर अक्सर विटामिन B12 लिखा होता है, कभी प्रभावशाली मात्रा में।

और उसमें जो है, वह बड़े हिस्से में pseudo-B12 है, यानी ऐसे यौगिक जो B12 जैसे दिखते हैं और मनुष्य में काम नहीं करते।

और दो नतीजे हैं, और दूसरा पहले से बुरा है:

एक: वह आपकी B12 की ज़रूरत पूरी नहीं करता।

और दो: वे निष्क्रिय रूप कुछ जाँचों में B12 जैसे गिने जा सकते हैं।

तो स्पिरुलिना लेने वाले की रिपोर्ट ठीक दिख सकती है, जबकि वह कार्यात्मक रूप से कमी में है।

और B12 की कमी का सबसे गंभीर नतीजा तंत्रिका का नुक़सान है, जो ख़ून की कमी के बिना भी हो सकता है, और जो लंबे समय तक रहने पर स्थायी हो सकता है। इस पर हमने अलग, पूरा लेख लिखा है।

तो साफ़ शब्दों में:

B12 के लिए स्पिरुलिना पर भरोसा न करें।

अगर आप शुद्ध शाकाहारी (vegan) हैं, तो आपको B12 का पूरक चाहिए, साइनोकोबालामिन या मिथाइलकोबालामिन, और स्पिरुलिना उसका विकल्प नहीं है।

हम स्पिरुलिना बेचते हैं, और यह बात हम उसके पन्ने पर भी लिखते हैं।

कैसे लें

मात्रा: आम तौर पर 3 से 5 ग्राम रोज़, यानी एक छोटा चम्मच। पैक के हिसाब से।

और शुरुआत 1 ग्राम से, कुछ दिन, क्योंकि कुछ लोगों को शुरू में पेट में गड़बड़, गैस या हल्का सिर दर्द होता है।

कब: खाने के साथ। ख़ाली पेट कुछ लोगों को मितली देता है।

किसके साथ:

नींबू पानी या किसी खट्टे रस में, और यह दो काम करता है: स्वाद ढकता है, और विटामिन सी नॉन-हीम आयरन के अवशोषण में मदद करता है।

नारियल पानी में।

छाछ में, काला नमक और जीरे के साथ।

और स्मूदी में, केला स्वाद तथा रंग दोनों संभाल लेता है।

और स्वाद: स्पिरुलिना का स्वाद तेज़, “तालाब जैसा”, और कुछ लोगों के लिए मुश्किल है। यह सबसे आम कारण है जिससे लोग छोड़ देते हैं।

और जो नहीं करना:

गरम पानी या चाय में, क्योंकि गर्मी फ़ाइकोसायनिन (वह नीला रंगद्रव्य) को नुक़सान पहुँचाती है, और वही उसका सबसे शोध किया गया अंश है।

और कैल्शियम की गोली या चाय-कॉफ़ी के साथ, आयरन के अवशोषण के लिए।

और सहेजना: हवाबंद, अंधेरा, ठंडा। रंगद्रव्य रोशनी से भी नष्ट होते हैं, और फीका पड़ा पाउडर पुराना है।

सावधानियाँ, और पहली दो अनिवार्य हैं

फ़ेनिलकीटोनूरिया (PKU)

स्पिरुलिना में प्रोटीन ऊँचा है, तो फ़ेनिलएलानिन भी।

PKU वाले व्यक्ति को स्पिरुलिना नहीं लेना चाहिए। यह पूर्ण है, और यह लेबल पर कम ही होता है।

माइक्रोसिस्टिन

सायनोबैक्टीरिया लिवर को नुक़सान पहुँचाने वाले विषैले पदार्थ (microcystins) बना सकते हैं, और खुले तालाब में उगाए गए स्पिरुलिना में दूसरे सायनोबैक्टीरिया का संदूषण हो सकता है।

यह इस सामग्री की असली सुरक्षा समस्या है, और वह दर्ज है।

तो: बैच-वार माइक्रोसिस्टिन की जाँच वैकल्पिक नहीं है। इस पर हमने अलग, पूरा लेख लिखा है।

यूरिक एसिड और गठिया

और यह कम बताई जाने वाली बात है।

एक-कोशिकीय जीवों में न्यूक्लिक अम्ल ऊँचे होते हैं, और वे प्यूरीन में बदलते हैं, और प्यूरीन यूरिक एसिड में।

तो स्पिरुलिना प्रति ग्राम एक सार्थक प्यूरीन स्रोत है।

और गठिया या ऊँचे यूरिक एसिड में यह पूछने लायक़ है। (और यही बात क्लोरेला पर ज़्यादा लागू होती है, जिसमें न्यूक्लिक अम्ल और ऊँचे हैं।)

स्वतः प्रतिरक्षित रोग

स्पिरुलिना पर प्रतिरक्षा-उत्तेजक गतिविधि की रिपोर्ट है।

तो रुमेटॉइड आर्थराइटिस, ल्यूपस, सोरायसिस, या थायरॉइड के स्वतः प्रतिरक्षित रोग में पूछें।

और प्रत्यारोपण के बाद, प्रतिरक्षा दबाने वाली दवाओं के साथ, नहीं, बिना अपनी टीम की अनुमति के।

और यह विडंबनापूर्ण है, क्योंकि “इम्यूनिटी बढ़ाना” उसका एक बिकने वाला दावा है।

और बाक़ी

वॉरफ़ैरिन, स्पिरुलिना में विटामिन K है। INR देखने वाले डॉक्टर को बताएँ; नियम मात्रा स्थिर रखना है।

लिवर की बीमारी, माइक्रोसिस्टिन के सवाल की वजह से पूछें।

गर्भावस्था और स्तनपान, संदूषण के जोखिम की वजह से सावधानी; डॉक्टर से पूछें।

बच्चे, बाल रोग विशेषज्ञ से, उसी कारण से।

और गुर्दे की बीमारी, पूछें।

ख़रीदते समय

जीव का नाम, Arthrospira platensis या maxima, और केवल “नीली-हरी शैवाल” नहीं, क्योंकि वह शब्द Aphanizomenon flos-aquae को भी ढकता है, जो एक प्राकृतिक झील से काटा जाता है और जिसका संदूषण का प्रोफ़ाइल अलग तथा ख़राब है।

बैच-वार माइक्रोसिस्टिन की जाँच, आँकड़े और सीमा के साथ। यही सबसे ज़रूरी है।

बैच-वार भारी धातु की जाँच।

सूक्ष्मजैविक जाँच।

उगाने का तरीक़ा, नियंत्रित तालाब या बंद फ़ोटोबायोरिएक्टर, जंगली कटाई नहीं।

और रंग, अच्छा स्पिरुलिना गहरा हरा-नीला होता है। फीका, भूरा-हरा पाउडर पुराना है या गर्मी से ख़राब।

और जिसके लिए पैसे न दें: B12 का आँकड़ा। अगर कोई स्पिरुलिना का लेबल B12 को एक फ़ायदे के रूप में बेच रहा है, तो वह उस लेबल पर कम भरोसा करने का कारण है।

जो हम कह सकते हैं, जो नहीं

कह सकते हैं: जीव का नाम और उगाने का तरीक़ा; प्रोटीन तथा फ़ाइकोसायनिन की मात्रा तथ्य के रूप में; माइक्रोसिस्टिन और भारी धातु की जाँच के नतीजे; और केवल उन पोषक तत्वों के स्वीकृत दावे जो मापी गई, सार्थक मात्रा में हैं।

और तथ्य: स्पिरुलिना के लिए कोई स्वीकृत स्वास्थ्य दावा नहीं है।

नहीं कह सकते: डिटॉक्स, भारी धातु निकालना, इम्यूनिटी बढ़ाना, ख़ून की कमी का इलाज, वज़न घटाना, संपूर्ण प्रोटीन स्रोत, या विटामिन B12 देना।

और तीन चीज़ें हम विशेष रूप से मना करते हैं:

कोई भी B12 का दावा, क्योंकि वह निष्क्रिय रूप है, और उस पर भरोसा करने वाले शाकाहारी को तंत्रिका का नुक़सान हो सकता है। यह इस साइट पर उन कुछ दावों में है जिन्हें हम सुरक्षा के आधार पर मना करते हैं।

“संपूर्ण प्रोटीन” को ख़रीदने का कारण बनाना, क्योंकि एक ख़ुराक आधे अंडे के बराबर है।

और “डिटॉक्स” या “भारी धातु निकालना”, ख़ासकर एक ऐसी सामग्री के लिए जिसकी ख़ुद की मुख्य समस्या संदूषण है।

और सबसे ईमानदार वाक्य:

स्पिरुलिना वाक़ई 60 से 70 प्रतिशत प्रोटीन है, और एक ख़ुराक लगभग 3 ग्राम देती है, यानी आधा अंडा, ऊँची कीमत पर।

वह एक शैवाल नहीं, सायनोबैक्टीरिया है, इसीलिए वह अच्छी तरह पचता है और इसीलिए उसमें विष का सवाल है।

उसका B12 बड़े हिस्से में निष्क्रिय है और जाँच को झूठा आश्वासन दे सकता है, तो शाकाहारी व्यक्ति उस पर भरोसा न करे।

उसका सबसे अच्छा समर्थित असर लिपिड पर मामूली कमी है।

और उसका सबसे वैध उपयोग पोषण-पुनर्वास है, जहाँ प्रति ग्राम सघनता ही लक्ष्य है।

डॉक्टर के पास कब

न लें, अगर: फ़ेनिलकीटोनूरिया (PKU) है, यह पूर्ण है।

पहले पूछें, अगर:

  • कोई स्वतः प्रतिरक्षित रोग है, या प्रतिरक्षा दबाने वाली दवा लेते हैं, या प्रत्यारोपण हुआ है
  • गठिया या ऊँचा यूरिक एसिड है, न्यूक्लिक अम्ल से प्यूरीन
  • वॉरफ़ैरिन या एसिट्रोम लेते हैं, विटामिन K; INR देखने वाले को बताएँ
  • लिवर की बीमारी है, माइक्रोसिस्टिन के सवाल की वजह से
  • गर्भवती हैं या स्तनपान कराती हैं
  • बच्चे को देना है, बाल रोग विशेषज्ञ से
  • गुर्दे की बीमारी है

और अगर आप शुद्ध शाकाहारी हैं, तो यह ज़रूर करें: विटामिन B12 की जाँच कराएँ, और एक असली B12 पूरक लें। स्पिरुलिना को उसमें न गिनें।

पूरक की जगह जाँच कराएँ, अगर: थकान, पीलापन, चढ़ने पर साँस फूलना (हीमोग्लोबिन और फ़ेरिटिन, और कारण); हाथ-पैर में झुनझुनी या सुन्नपन (B12); बिना वजह वज़न घटना; या जोड़ों में सूजन के साथ गठिया का इतिहास।

रोकें और दिखाएँ: आँखों का पीला पड़ना, गाढ़ा पेशाब, लगातार जी मिचलाना (लिवर, और स्पिरुलिना का ज़िक्र करें); चकत्ते; या गठिया का दौरा।

निचोड़

  1. स्पिरुलिना वाक़ई 60 से 70 प्रतिशत प्रोटीन है
  2. और एक ख़ुराक 3 से 5 ग्राम होती है
  3. यानी लगभग 2 से 3.5 ग्राम प्रोटीन, आधा अंडा
  4. तो प्रतिशत सच है और लगभग बेकार
  5. और यह प्रोटीन ख़रीदने का सबसे महँगा तरीक़ा है
  6. वह शैवाल नहीं, सायनोबैक्टीरिया है
  7. उसकी भित्ति में सेल्यूलोज़ नहीं, पाचनशीलता अच्छी है
  8. उसमें न्यूक्लिक अम्ल ऊँचे हैं, क्योंकि एक-कोशिकीय जीव मशीनरी है
  9. और उसमें सायनोबैक्टीरियल विष का सवाल है
  10. लेबल पर जो B12 है, वह बड़े हिस्से में निष्क्रिय pseudo-B12 है
  11. तो वह ज़रूरत पूरी नहीं करता
  12. और वह कुछ जाँचों में गिनकर रिपोर्ट को झूठा आश्वासन देता है
  13. B12 की कमी से तंत्रिका का नुक़सान ख़ून की कमी के बिना भी होता है
  14. और लंबे समय तक रहने पर वह स्थायी हो सकता है
  15. तो B12 के लिए स्पिरुलिना पर भरोसा न करें
  16. सबसे अच्छा समर्थित असर लिपिड पर मामूली कमी है
  17. रक्तचाप पर कुछ छोटे अध्ययन
  18. एलर्जिक राइनाइटिस में एक छोटा अध्ययन
  19. सबसे वैध उपयोग पोषण-पुनर्वास है
  20. फ़ाइकोसायनिन सबसे शोध किया गया अंश है
  21. “डिटॉक्स” विडंबनापूर्ण है, इसकी ख़ुद की समस्या संदूषण है
  22. मात्रा 3 से 5 ग्राम; शुरुआत 1 ग्राम से
  23. खाने के साथ लें, ख़ाली पेट मितली देता है
  24. नींबू के साथ: स्वाद ढकता है और आयरन का अवशोषण बढ़ाता है
  25. गरम पानी या चाय में न डालें, फ़ाइकोसायनिन गर्मी से नष्ट होता है
  26. हवाबंद, अंधेरा, ठंडा, फीका पाउडर पुराना है
  27. PKU में स्पिरुलिना नहीं, यह पूर्ण है
  28. माइक्रोसिस्टिन की बैच-वार जाँच वैकल्पिक नहीं है
  29. न्यूक्लिक अम्ल से प्यूरीन, गठिया में पूछें
  30. प्रतिरक्षा-उत्तेजक गतिविधि स्वतः प्रतिरक्षित रोगों में सावधानी है
  31. और यह उसके “इम्यूनिटी” दावे की विडंबना है
  32. जीव का नाम देखें, केवल “नीली-हरी शैवाल” नहीं
  33. अच्छा स्पिरुलिना गहरा हरा-नीला होता है
  34. और B12 का आँकड़ा उस लेबल पर कम भरोसा करने का कारण है

सामग्री की जानकारी: स्पिरुलिना, मोरिंगा, व्हीटग्रास। संरचना: Spirulina Powder, Multi-Green Blend, B-Complex Capsule। और पढ़ें: the microcystin problem nobody mentions, spirulina’s protein content and vegan nutrition, spirulina vs chlorella vs moringa, और शाकाहारी लोगों के लिए B12 के स्रोत।

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Reviewed by

Tarun Vashisht

Head of Ayurvedic Formulations & Regulatory Quality

Ayurvedic physician and pharmacognosy specialist with over 15 years of experience overseeing GMP-certified herbal extractions, classical proprietary formulations, and AYUSH/FSSAI regulatory compliance for direct-selling and retail nutraceutical brands.

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