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शाकाहारी लोगों के लिए B12 के स्रोत, और एक मात्रा जो कोई नहीं बताता

B12 का अवशोषण एक बार में लगभग दो माइक्रोग्राम पर रुक जाता है। इसलिए दूध एक बार में ज़्यादा पीने से काम नहीं चलता, और यह बात कहीं नहीं छपती।

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NutraHerbal संपादकीय टीम10 min read

Reviewed for accuracy and claims compliance: दावा-अनुपालन समीक्षा (claims review)

शाकाहारी भोजन में B12 का सवाल दो हिस्सों में है, और लोग आम तौर पर पहला हिस्सा जानते हैं और दूसरा नहीं।

पहला हिस्सा: कौन से खाने में B12 है। यह आसान है, और सूची छोटी है।

दूसरा हिस्सा, जो असल में फ़ैसला करता है: आप एक बार में कितना अवशोषित कर सकते हैं।

और उसका जवाब है: लगभग दो माइक्रोग्राम।

यानी आप एक बार में चार गिलास दूध पीकर पूरे दिन का काम नहीं चला सकते। अवशोषण का रास्ता भर जाता है, और बाक़ी निकल जाता है।

यह एक सीधी, जानी हुई बात है, और वह किसी पैकेट पर या किसी आहार सलाह में नहीं छपती।

यह जानकारी है, चिकित्सकीय सलाह नहीं। और अगर आपको हाथ-पैर में झुनझुनी है, तो यह भोजन बदलने का मामला नहीं है, यह जाँच कराने का मामला है।

पहले: वह सूची

और सूची इसलिए छोटी है क्योंकि B12 पौधों में नहीं बनता। वह सूक्ष्मजीव बनाते हैं, और वह पशु उत्पादों में जमा होता है।

वयस्क की ज़रूरत लगभग 2 से 2.5 माइक्रोग्राम रोज़ है, माइक्रोग्राम, मिलीग्राम नहीं।

और आम भारतीय शाकाहारी भोजन में:

B12, लगभग
दूध, एक कप (200 मि.ली.)~0.9 µg
दही, एक कटोरी~0.8 µg
पनीर, 100 ग्राम~0.8–1 µg
छाछ, एक गिलास~0.3–0.5 µg
चीज़, एक स्लाइस~0.3 µg
अंडा, एक~0.6 µg
खोया/रबड़ीदूध के अनुपात में
रोटी, चावल, दाल, सब्ज़ी, फलशून्य
घीलगभग शून्य

और आख़िरी दो पंक्तियाँ सबसे ज़रूरी हैं।

पूरा अनाज-दाल-सब्ज़ी वाला भोजन, जो भारतीय थाली का 80 प्रतिशत है, B12 के हिसाब से शून्य है।

और घी, यह लोगों को चौंकाता है। B12 पानी में घुलनशील है, और घी बनाने में दूध के ठोस भाग निकल जाते हैं। तो घी में वह नहीं बचता।

अब वह असली बात, अवशोषण की सीमा

B12 के अवशोषण का मुख्य रास्ता एक विशेष वाहक (intrinsic factor) और आँत के एक विशेष हिस्से पर निर्भर है।

और उस रास्ते की क्षमता सीमित है, लगभग 1.5 से 2 माइक्रोग्राम प्रति भोजन।

उसके बाद वह रास्ता भर जाता है।

तो इसके तीन व्यावहारिक नतीजे हैं, और वे तीनों काम के हैं:

1. दूध को दिन में बाँटें

दो कप दूध एक साथ पीने से लगभग उतना ही अवशोषित होता है जितना एक कप से।

और दो कप, दो समय पर, लगभग दुगना देते हैं।

यह मुफ़्त है और यह सबसे कम बताया जाने वाला सुझाव है।

तो व्यावहारिक रूप से: सुबह चाय/दूध, और शाम को दही या छाछ या पनीर, बँटा हुआ।

2. “मैं दूध पीता हूँ” पर्याप्त आश्वासन नहीं है

दो कप दूध रोज़ लगभग ज़रूरत के बराबर देता है।

और “लगभग बराबर” का मतलब है कोई गुंजाइश नहीं।

और उस गुंजाइश को तीन चीज़ें और घटाती हैं:

उबालना, भारतीय दूध हमेशा उबाला जाता है, और B12 गर्मी से कुछ नष्ट होता है।

असली मात्रा, चाय में डाला हुआ थोड़ा दूध एक कप दूध नहीं है। घर का दूध ज़्यादातर चाय में जाता है, और प्रति व्यक्ति हिस्सा छोटा होता है।

और उम्र, उम्र के साथ पेट का अम्ल घटता है, और B12 को भोजन से अलग करने के लिए अम्ल चाहिए।

3. और पूरक में ऊँची मात्रा क्यों होती है

यह सवाल बहुत पूछा जाता है: “ज़रूरत 2 माइक्रोग्राम है, तो गोली में 1500 क्यों?”

जवाब: मुख्य रास्ते के अलावा एक दूसरा, छोटा रास्ता भी है, निष्क्रिय प्रसार (passive diffusion), जो जो भी मौजूद हो उसका लगभग एक प्रतिशत अवशोषित कर लेता है, और उसकी कोई सीमा नहीं है।

तो 1000 माइक्रोग्राम की गोली से उस रास्ते से ही लगभग 10 माइक्रोग्राम मिल जाता है।

और यही वजह है कि ऊँची मात्रा वाली मुँह की गोली उन मरीज़ों में भी काम करती है जिनका मुख्य अवशोषण रास्ता ख़राब है।

वे स्रोत जिन पर भरोसा नहीं करना चाहिए

और यह खंड ज़रूरी है, क्योंकि ये तीनों बातें बहुत प्रचलित हैं।

किण्वित (fermented) भोजन

इडली, डोसा, ढोकला, कांजी, अचार।

इनमें थोड़ा B12 हो सकता है, यह इस पर निर्भर करता है कि कौन से सूक्ष्मजीव उगे।

और मात्रा कम, अनिश्चित, और घर पर अनमापनीय है।

तो इन्हें अपनी ज़रूरत का आधार न बनाएँ। खाना अच्छा है; B12 की योजना नहीं है।

स्पिरुलिना और शैवाल

और यह सबसे ज़रूरी चेतावनी है।

स्पिरुलिना में जो होता है वह बड़े हिस्से में pseudo-B12 है, यानी एक मिलता-जुलता रूप जो मनुष्य में काम नहीं करता।

और इससे भी बुरा: वह कुछ जाँचों में B12 जैसा गिना जा सकता है।

तो स्पिरुलिना लेने वाले की रिपोर्ट अच्छी दिख सकती है जबकि उसे कुछ नहीं मिल रहा।

हम स्पिरुलिना पाउडर बेचते हैं, और यह बात हम उसके पन्ने पर भी लिखते हैं।

मशरूम, समुद्री सिवार, और “मिट्टी से”

कुछ मशरूम और समुद्री शैवाल में थोड़ा सक्रिय B12 दर्ज है, और मात्रा अनिश्चित है।

नोरी (एक समुद्री शैवाल) सबसे ज़्यादा चर्चा में है, और वह भारतीय भोजन का हिस्सा नहीं है।

तो: एक दिलचस्प तथ्य, एक भरोसेमंद योजना नहीं।

और “दही में बैक्टीरिया है तो B12 बनेगा”

दही का B12 दूध से आता है। किण्वन शून्य से B12 नहीं बनाता।

तो वास्तव में क्या करें

अगर आप दूध-दही खाते हैं (lacto-vegetarian)

दिन में दो-तीन बार, बँटा हुआ डेयरी:

सुबह: एक कप दूध, या दही। दोपहर: एक कटोरी दही या छाछ। शाम/रात: पनीर, या दूध।

और यह लगभग ज़रूरत तक पहुँचा देता है, अगर आप वाक़ई यह सब खाते हैं।

और फिर भी जाँच कराएँ, क्योंकि “लगभग” में कोई गुंजाइश नहीं है, और कमी सालों में चुपचाप बनती है।

अगर आप शुद्ध शाकाहारी (vegan) हैं

यहाँ कोई बहस नहीं है:

पूरक अनिवार्य है।

भोजन से इसका कोई भरोसेमंद रास्ता नहीं है। यह आहार की कोई कमी नहीं है, यह जीव विज्ञान का तथ्य है, क्योंकि B12 पौधे नहीं बनाते।

और फ़ोर्टिफ़ाइड (संवर्धित) उत्पाद, कुछ सोया/ओट दूध और न्यूट्रिशनल यीस्ट में B12 मिलाया जाता है। लेबल देखें, और भारत में ये सीमित हैं।

अगर आप मेटफ़ॉर्मिन या एसिडिटी की दवा लेते हैं

जाँच कराएँ, भले आप मांसाहारी हों।

मेटफ़ॉर्मिन का B12 अवशोषण पर असर अच्छी तरह दर्ज है, और यह जाँच बहुत कम होती है।

और PPI (पैंटोप्राज़ोल, ओमेप्राज़ोल) अम्ल घटाकर अवशोषण घटाते हैं।

और अगर आप गर्भवती हैं या स्तनपान कराती हैं

यह सबसे ज़रूरी स्थिति है।

शाकाहारी माँ के दूध में B12 कम हो सकता है, और शिशु में उसकी कमी विकास तथा तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है।

और वह नुक़सान गंभीर हो सकता है।

तो यह अपने मन से तय करने की चीज़ नहीं है, यह डॉक्टर से बात करने की चीज़ है, गर्भावस्था की योजना के समय से।

पूरक, व्यावहारिक बातें

मात्रा: रख-रखाव के लिए आम तौर पर कुछ सौ से 1500 माइक्रोग्राम; कमी ठीक करने के लिए इससे ज़्यादा, डॉक्टर के हिसाब से।

रूप: साइनोकोबालामिन और मिथाइलकोबालामिन, दोनों काम करते हैं। मिथाइल वाला महँगा बिकता है और उसका अतिरिक्त फ़ायदा साबित नहीं है। इस पर हमने अलग लेख लिखा है, जिसमें “साइनाइड” वाले डर का हिसाब भी है।

जीभ के नीचे वाली गोलियाँ, सामान्य गोली से बेहतर नहीं निकलीं। अतिरिक्त पैसा देने का कारण नहीं।

इंजेक्शन, भोजन की कमी के लिए ज़रूरी नहीं। तंत्रिका के लक्षण, गंभीर कमी, या अवशोषण की समस्या में डॉक्टर तय करते हैं।

अवधि: अगर कारण स्थायी है, शाकाहारी भोजन, तो पूरक भी स्थायी है। “तीन महीने की कोर्स” इस विषय की सबसे आम ग़लती है।

और सुरक्षा: B12 पानी में घुलनशील है और उसकी विषाक्तता बहुत कम है। अतिरिक्त पेशाब से निकल जाता है। तो ऊँची मात्रा की चिंता यहाँ सबसे कम है।

और जाँच से पहले पूरक शुरू न करें, क्योंकि उससे नतीजा बेकार हो जाता है।

जो हम कह सकते हैं, जो नहीं

कह सकते हैं: विटामिन B12 के लिए अनुमत पोषक-कार्य दावे, जब वह मापी गई, सार्थक मात्रा में हो, सामान्य ऊर्जा-उत्पादक चयापचय में योगदान, तंत्रिका तंत्र का सामान्य कार्य, लाल रक्त कोशिकाओं का सामान्य निर्माण, होमोसिस्टीन का सामान्य चयापचय, और थकान तथा क्लांति में कमी, निर्धारित शब्दावली में।

और यह फ़र्क़ जानने लायक़ है: विटामिन-खनिजों के लिए स्वीकृत दावे होते हैं; जड़ी-बूटियों के लिए आम तौर पर नहीं।

नहीं कह सकते: एनीमिया का इलाज, तंत्रिका रोग का इलाज, “एनर्जी बूस्ट”, याददाश्त बढ़ाना।

और सबसे ईमानदार वाक्य:

शाकाहारी भोजन में B12 के स्रोत सिर्फ़ डेयरी और अंडा हैं, और रोटी-दाल-चावल-सब्ज़ी शून्य देते हैं।

अवशोषण एक बार में लगभग दो माइक्रोग्राम पर रुक जाता है, इसलिए डेयरी को दिन में बाँटना मुफ़्त और असरदार है।

और शुद्ध शाकाहारी भोजन में पूरक एक विकल्प नहीं, एक ज़रूरत है, क्योंकि B12 पौधे नहीं बनाते।

डॉक्टर के पास कब

जाँच कराएँ, भोजन बदलने से पहले, अगर:

  • हाथ-पैर में झुनझुनी, सुन्नपन या जलन
  • चलने में लड़खड़ाना, ख़ासकर अंधेरे में
  • जीभ लाल, चिकनी या जलने वाली
  • लगातार थकान और पीलापन
  • याददाश्त या एकाग्रता में साफ़ गिरावट
  • रिपोर्ट में MCV बढ़ा हुआ

जाँच ज़रूर कराएँ, अगर आप:

  • शुद्ध शाकाहारी (vegan) हैं
  • शाकाहारी हैं और गर्भवती हैं, योजना बना रही हैं, या स्तनपान कराती हैं, यह सबसे ज़रूरी है
  • लंबे समय से मेटफ़ॉर्मिन या PPI लेते हैं
  • आँत की या मोटापे की सर्जरी हुई है
  • 60 से ऊपर हैं और थकान या झुनझुनी है

और यह ज़रूर पूछें: झुनझुनी है और आयरन-फ़ॉलिक एसिड ले रहे हैं, B12 की जाँच हुई है? फ़ॉलिक एसिड ख़ून की रिपोर्ट ठीक कर देता है और तंत्रिका का नुक़सान नहीं रोकता।

निचोड़

  1. B12 पौधों में नहीं बनता, सूक्ष्मजीव बनाते हैं
  2. वयस्क की ज़रूरत लगभग 2 से 2.5 माइक्रोग्राम रोज़
  3. एक कप दूध में लगभग 0.9 µg; एक कटोरी दही में ~0.8 µg
  4. रोटी, चावल, दाल, सब्ज़ी और फल, शून्य
  5. घी में लगभग शून्य, क्योंकि B12 ठोस भाग के साथ निकल जाता है
  6. अवशोषण का मुख्य रास्ता प्रति भोजन लगभग 1.5–2 µg पर भर जाता है
  7. तो एक साथ दो कप दूध लगभग एक कप जितना ही देता है
  8. डेयरी को दिन में बाँटना मुफ़्त और असरदार है
  9. “मैं दूध पीता हूँ” में कोई गुंजाइश नहीं बचती
  10. उबालने से कुछ B12 नष्ट होता है, और भारतीय दूध हमेशा उबलता है
  11. चाय में थोड़ा दूध एक कप दूध नहीं है
  12. उम्र के साथ पेट का अम्ल घटता है और अवशोषण घटता है
  13. गोली में 1000+ µg क्यों, क्योंकि एक दूसरा रास्ता भी है
  14. निष्क्रिय प्रसार लगभग 1% लेता है, बिना किसी सीमा के
  15. इसीलिए ऊँची मात्रा की गोली अवशोषण की समस्या में भी काम करती है
  16. किण्वित भोजन अनिश्चित और अनमापनीय है, योजना का आधार नहीं
  17. स्पिरुलिना में बड़े हिस्से में pseudo-B12 होता है, जो काम नहीं करता
  18. और वह जाँच में गिनकर रिपोर्ट को झूठा आश्वासन दे सकता है
  19. दही का B12 दूध से आता है, किण्वन से नहीं बनता
  20. lacto-vegetarian: दिन में दो-तीन बार बँटा हुआ डेयरी
  21. और फिर भी जाँच, कमी सालों में चुपचाप बनती है
  22. vegan: पूरक अनिवार्य है, यह जीव विज्ञान का तथ्य है
  23. मेटफ़ॉर्मिन लेने वालों की जाँच होनी चाहिए, और वह होती नहीं
  24. गर्भावस्था और स्तनपान में शाकाहारी माँ के लिए यह डॉक्टर का विषय है
  25. शिशु में कमी का नुक़सान गंभीर हो सकता है
  26. साइनो और मिथाइल दोनों रूप काम करते हैं
  27. sublingual गोलियाँ सामान्य गोली से बेहतर नहीं निकलीं
  28. भोजन की कमी के लिए इंजेक्शन ज़रूरी नहीं
  29. कारण स्थायी हो तो पूरक भी स्थायी, “तीन महीने की कोर्स” सबसे आम ग़लती
  30. B12 की विषाक्तता बहुत कम है; अतिरिक्त पेशाब से निकल जाता है
  31. जाँच से पहले पूरक शुरू न करें

संरचना: B-Complex Capsule। और पढ़ें: विटामिन B12 की कमी के लक्षण और इलाज, why Indian vegetarians run short, methylcobalamin vs cyanocobalamin, और शाकाहारी डाइट में प्रोटीन कैसे पूरा करें।

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Reviewed by

Tarun Vashisht

Head of Ayurvedic Formulations & Regulatory Quality

Ayurvedic physician and pharmacognosy specialist with over 15 years of experience overseeing GMP-certified herbal extractions, classical proprietary formulations, and AYUSH/FSSAI regulatory compliance for direct-selling and retail nutraceutical brands.

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