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विटामिन B12 की कमी के लक्षण और इलाज, और वह जाल जिसमें फ़ॉलिक एसिड फँसा देता है

B12 की कमी से तंत्रिका का नुक़सान ख़ून की कमी के बिना भी हो सकता है, और वह स्थायी हो सकता है। और फ़ॉलिक एसिड ख़ून ठीक कर देता है जबकि नुक़सान चलता रहता है।

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NutraHerbal संपादकीय टीम12 min read

Reviewed for accuracy and claims compliance: दावा-अनुपालन समीक्षा (claims review)

विटामिन B12 की कमी भारत में बहुत आम है, और उसके बारे में जो सबसे ज़रूरी बात है, वह लक्षणों की सूची नहीं है।

सबसे ज़रूरी बात यह है:

B12 की कमी से तंत्रिका (nerve) का नुक़सान ख़ून की कमी के बिना भी हो सकता है।

और अगर वह लंबे समय तक चले, तो वह स्थायी हो सकता है।

और इससे भी ज़्यादा ज़रूरी एक दूसरी बात है, जो एक असली जाल है:

फ़ॉलिक एसिड (folic acid) B12 की कमी से हुई ख़ून की कमी को ठीक कर देता है, और तंत्रिका का नुक़सान चलता रहता है।

यानी रिपोर्ट सुधर जाती है, मरीज़ को लगता है कि ठीक हो गया, और नुक़सान चुपचाप बढ़ता रहता है।

और भारत में “आयरन + फ़ॉलिक एसिड” की गोली बहुत आम है।

तो यह लेख उसी पर है: लक्षण पहचानना, जाँच ठीक कराना, और इलाज सही तरीक़े से कराना।

यह जानकारी है, चिकित्सकीय सलाह नहीं। और अगर आपको हाथ-पैर में झुनझुनी या सुन्नपन है, तो यह अपने मन से पूरक शुरू करने का मामला नहीं है, यह जाँच कराने का मामला है।

B12 क्या करता है

दो बहुत अलग काम, और यही दो तरह के लक्षण समझाते हैं।

पहला: DNA बनाने में। और इसीलिए कमी से ख़ून की कोशिकाएँ ठीक से नहीं बनतीं, वे बड़ी और अपरिपक्व रह जाती हैं। यह मैक्रोसाइटिक (बड़ी कोशिका वाली) ख़ून की कमी है।

दूसरा: तंत्रिकाओं के आवरण (myelin) को बनाए रखने में।

और यह दूसरा काम वह है जो स्थायी नुक़सान कर सकता है।

लक्षण

ख़ून की कमी से जुड़े

थकान, और यह सबसे आम है, और सबसे ज़्यादा नज़रअंदाज़। पीलापन, कभी हल्का पीलिया जैसा रंग। चढ़ने पर साँस फूलना। धड़कन तेज़ लगना। चक्कर।

मुँह और जीभ, और ये बहुत काम के संकेत हैं

जीभ का लाल, चिकना और चिकनी हो जाना, स्वाद की कलिकाएँ (papillae) चपटी हो जाती हैं, और जीभ चमकदार-लाल दिखती है। इसे glossitis कहते हैं, और यह एक क्लासिक संकेत है।

जीभ में जलन या दर्द।

होंठ के कोनों में दरारें।

और मुँह में छाले।

तंत्रिका से जुड़े, और यही सबसे ज़रूरी हैं

हाथों और पैरों में झुनझुनी, सुन्नपन, या “सुइयाँ चुभना”, आम तौर पर दोनों तरफ़, और पैरों से शुरू होकर ऊपर बढ़ना।

पैरों में जलन।

चलने में लड़खड़ाना, संतुलन बिगड़ना, ख़ासकर अंधेरे में या आँख बंद करके, क्योंकि रीढ़ का वह हिस्सा प्रभावित होता है जो स्थिति का बोध देता है।

हाथ से छोटी चीज़ें गिरना, या महसूस न होना।

याददाश्त और एकाग्रता में कमी।

चिड़चिड़ापन, उदासी, या अवसाद जैसे लक्षण।

और गंभीर मामलों में उलझन।

और अब वह बात जो दोहराने लायक़ है:

ये तंत्रिका वाले लक्षण ख़ून की कमी से पहले भी आ सकते हैं, और ख़ून की रिपोर्ट पूरी तरह सामान्य होने पर भी मौजूद हो सकते हैं।

तो “हीमोग्लोबिन ठीक है, तो B12 ठीक होगा”, यह अनुमान ग़लत है।

किसे होती है, भारत में कारण

1. शाकाहारी भोजन, सबसे बड़ा कारण

और इसका कारण एक जैविक तथ्य है: B12 पौधों में नहीं बनता।

वह सूक्ष्मजीवों (bacteria) द्वारा बनाया जाता है। तो वह पशु उत्पादों में मिलता है, क्योंकि वे जीव उसे अपने अंदर जमा करते हैं।

शुद्ध शाकाहारी (vegan) भोजन में व्यावहारिक रूप से शून्य।

और दूध-दही वाले शाकाहारी भोजन में थोड़ा होता है, पर आम भारतीय मात्रा में वह अक्सर पर्याप्त नहीं होता।

इस पर हमने अलग लेख लिखा है, क्योंकि “मैं दूध पीता हूँ, मुझे कमी कैसे होगी” सबसे आम सवाल है।

2. दवाएँ, और ये बहुत आम हैं

मेटफ़ॉर्मिन, शुगर की सबसे आम दवा, और उसका B12 अवशोषण पर असर अच्छी तरह दर्ज है। लंबे समय तक मेटफ़ॉर्मिन लेने वालों में B12 की जाँच करानी चाहिए, और यह बहुत कम होती है।

एसिडिटी की दवाएँ (PPI), पैंटोप्राज़ोल, ओमेप्राज़ोल, रैबेप्राज़ोल। B12 को भोजन से अलग करने के लिए पेट का अम्ल चाहिए, और ये दवाएँ उसे कम कर देती हैं। और भारत में ये सालों तक, बिना समीक्षा के चलती हैं।

3. पेट और आँत की समस्याएँ

उम्र के साथ पेट का अम्ल कम होना।

एट्रोफ़िक गैस्ट्राइटिस, और H. pylori संक्रमण।

परनिशियस एनीमिया, एक स्वतः प्रतिरक्षित स्थिति जिसमें शरीर उस कारक को नष्ट कर देता है जो B12 के अवशोषण के लिए ज़रूरी है। यह भोजन से नहीं ठीक होता।

आँत के रोग, सीलिएक, क्रोन्स; और इलियम (छोटी आँत का अंतिम हिस्सा) की सर्जरी, क्योंकि अवशोषण वहीं होता है।

और बैरिएट्रिक (मोटापे की) सर्जरी के बाद।

4. शराब

5. गर्भावस्था और स्तनपान

और यह सबसे गंभीर है, इसलिए अलग:

शाकाहारी माँ के दूध में B12 कम हो सकता है, और शिशु में B12 की कमी विकास तथा तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है, और वह नुक़सान गंभीर हो सकता है।

तो गर्भावस्था और स्तनपान में शाकाहारी माँ के लिए B12 एक वैकल्पिक चीज़ नहीं है। यह डॉक्टर से बात करने की बात है, और ज़रूरी है।

जाँच, और इसे ठीक कराना मायने रखता है

सीरम B12, पहली जाँच। और उसकी एक असली सीमा है: सीमावर्ती (borderline) नतीजे भरोसेमंद नहीं होते, और कुछ स्थितियों में वह सामान्य दिख सकता है जबकि कमी मौजूद है।

CBC और MCV, MCV (कोशिका का औसत आकार) बढ़ा हुआ होना एक संकेत है। और ध्यान दें: अगर आयरन की कमी साथ हो, तो वह MCV को घटाती है, और दोनों मिलकर MCV को सामान्य दिखा सकते हैं। भारत में यह संयोजन आम है, और यह निदान छुपा देता है।

और सीमावर्ती मामलों में:

होमोसिस्टीन और मिथाइलमैलोनिक एसिड (MMA), ये दोनों B12 की कमी में बढ़ते हैं, और MMA ज़्यादा विशिष्ट है।

और कारण पता करने के लिए: फ़ॉलेट; थायरॉइड; और ज़रूरत पड़ने पर परनिशियस एनीमिया के एंटीबॉडी, तथा सीलिएक की जाँच।

और एक व्यावहारिक सुझाव: जाँच से पहले B12 का पूरक शुरू न करें, क्योंकि उससे नतीजा बदल जाता है और कारण पता करना मुश्किल हो जाता है।

इलाज

इंजेक्शन

जब ज़रूरी है:

तंत्रिका के लक्षण हों, और यह सबसे ज़रूरी स्थिति है। गंभीर ख़ून की कमी हो। अवशोषण की समस्या हो, परनिशियस एनीमिया, इलियम की सर्जरी, आँत का रोग।

और योजना: आम तौर पर शुरुआत में कई ख़ुराक नज़दीकी अंतराल पर, फिर रख-रखाव की ख़ुराक नियमित अंतराल पर। यह आपका डॉक्टर तय करेगा, और यह स्थिति पर निर्भर है।

मुँह से ऊँची मात्रा

और यह वह बात है जो कम लोग जानते हैं:

ऊँची मात्रा में मुँह से B12 (आम तौर पर 1000 से 2000 माइक्रोग्राम रोज़) अवशोषण की समस्या वाले मरीज़ों में भी काम करता है।

वजह: B12 के अवशोषण का मुख्य रास्ता सीमित क्षमता वाला है, पर एक छोटा हिस्सा सीधे, निष्क्रिय प्रसार (passive diffusion) से भी अवशोषित होता है। और जब मात्रा बहुत ऊँची हो, तो वह छोटा हिस्सा ही पर्याप्त हो जाता है।

यह अध्ययनों में दिखाया गया है, परनिशियस एनीमिया में भी।

तो इंजेक्शन से डरने वाले मरीज़ के लिए एक विकल्प मौजूद है, और यह फ़ैसला डॉक्टर का है, ख़ासकर जब तंत्रिका के लक्षण हों।

और जीभ के नीचे रखने वाली (sublingual) गोलियाँ, अध्ययनों में वे सामान्य मुँह से लेने वाली गोली से बेहतर नहीं निकलीं। वे ठीक हैं, और उनके लिए अतिरिक्त पैसा देने का कारण नहीं है।

कितने दिन

और यह ज़रूरी है:

अगर कारण स्थायी है, शाकाहारी भोजन, परनिशियस एनीमिया, आँत की सर्जरी, तो इलाज जीवनभर का है।

“तीन महीने की कोर्स पूरी कर ली, अब ठीक हूँ”, यह सबसे आम ग़लती है। कमी वापस आ जाती है, क्योंकि कारण वहीं है।

सुधार कब दिखेगा

ख़ून: एक हफ़्ते में नई कोशिकाएँ बननी शुरू, और हीमोग्लोबिन कुछ हफ़्तों में सुधरता है।

जीभ और मुँह: कुछ हफ़्तों में।

तंत्रिका: धीमा, महीनों। और यहाँ वह बात: जितनी देर कमी रही, उतनी कम पूरी वापसी की संभावना। लंबे समय की कमी से हुआ नुक़सान आंशिक रूप से बना रह सकता है।

यही इस पूरे लेख का कारण है: देरी ही असली नुक़सान है।

और एक चीज़ जिसकी निगरानी ज़रूरी है

गंभीर कमी में इलाज शुरू करने पर पोटैशियम गिर सकता है, क्योंकि नई कोशिकाएँ तेज़ी से बनने पर पोटैशियम उनमें चला जाता है।

तो गंभीर मामलों में डॉक्टर पोटैशियम की निगरानी करते हैं, और यह एक कारण है कि गंभीर कमी का इलाज अपने मन से नहीं करना चाहिए।

और वह जाल, फ़ॉलिक एसिड

यह इस लेख का सबसे ज़रूरी खंड है।

B12 और फ़ॉलेट, दोनों DNA बनाने के एक ही रास्ते में काम करते हैं।

तो दोनों की कमी से एक ही तरह की ख़ून की कमी होती है, बड़ी कोशिकाओं वाली।

और यहाँ समस्या है:

अगर किसी को B12 की कमी है और आप उसे फ़ॉलिक एसिड दे दें, तो ख़ून की कमी सुधर जाती है।

और तंत्रिका का नुक़सान चलता रहता है, क्योंकि वह काम फ़ॉलेट नहीं कर सकता।

नतीजा: हीमोग्लोबिन ठीक, MCV ठीक, रिपोर्ट ठीक, और झुनझुनी बढ़ती जा रही है।

और भारत में इसका एक ढाँचागत कारण है:

“आयरन + फ़ॉलिक एसिड” की गोली बहुत व्यापक रूप से दी जाती है, गर्भावस्था में, किशोरियों को, ख़ून की कमी में।

और वह ज़रूरी तथा उपयोगी है। पर वह B12 की कमी को ढँक सकती है।

तो व्यावहारिक नियम:

अगर किसी को बड़ी कोशिकाओं वाली ख़ून की कमी है, तो फ़ॉलिक एसिड शुरू करने से पहले B12 की जाँच होनी चाहिए।

और अगर आपको झुनझुनी या सुन्नपन है और आप आयरन-फ़ॉलिक एसिड ले रहे हैं, तो यह अपने डॉक्टर से B12 के बारे में पूछने की बात है।

कुछ भ्रम जो दूर करने लायक़ हैं

“किण्वित (fermented) खाना B12 देता है”, इडली, डोसा, अचार। इनमें थोड़ा हो सकता है, और भरोसेमंद मात्रा में नहीं। इसे अपनी ज़रूरत का आधार न बनाएँ।

“स्पिरुलिना से B12 मिलता है।” स्पिरुलिना में जो होता है वह बड़े हिस्से में pseudo-B12 है, यानी एक ऐसा रूप जो मनुष्य में काम नहीं करता, और जो जाँच में B12 जैसा दिख सकता है। शैवाल पर B12 के लिए भरोसा न करें।

“धूप से B12 बनता है।” नहीं, वह विटामिन D है।

“B12 ज़्यादा लेने से नुक़सान है।” B12 पानी में घुलनशील है और उसकी विषाक्तता बहुत कम है; अतिरिक्त पेशाब से निकल जाता है। तो ऊँची मात्रा की चिंता इस विटामिन में सबसे कम है, और यही वजह है कि ऊँची मात्रा वाली मुँह की गोली काम करती है।

और “B12 से एनर्जी आती है।” अगर कमी है, तो सुधरने पर थकान कम होती है। अगर कमी नहीं है, तो B12 का इंजेक्शन ऊर्जा नहीं देता, और वह एक बहुत आम, बहुत बेकार ख़र्च है।

जो हम कह सकते हैं, जो नहीं

कह सकते हैं: विटामिन B12 के लिए अनुमत पोषक-कार्य (nutrient function) दावे, जब वह उत्पाद में मापी गई, सार्थक मात्रा में हो, जैसे सामान्य ऊर्जा-उत्पादक चयापचय, तंत्रिका तंत्र का सामान्य कार्य, लाल रक्त कोशिकाओं का सामान्य निर्माण, और थकान तथा क्लांति में कमी में योगदान, इनकी निर्धारित शब्दावली में।

और यह फ़र्क़ ज़रूरी है: विटामिन और खनिजों के लिए स्वीकृत दावे मौजूद हैं, जड़ी-बूटियों के लिए नहीं। तो B12 उन कुछ चीज़ों में है जिनके बारे में हम वाक़ई कुछ कह सकते हैं।

नहीं कह सकते: एनीमिया का इलाज, तंत्रिका रोग का इलाज, याददाश्त बढ़ाना, “एनर्जी बूस्ट”, अवसाद का इलाज।

और सबसे ईमानदार वाक्य:

B12 की कमी का सबसे ख़तरनाक हिस्सा ख़ून की कमी नहीं, तंत्रिका का नुक़सान है, और वह ख़ून की रिपोर्ट सामान्य होने पर भी हो सकता है।

फ़ॉलिक एसिड रिपोर्ट सुधार देता है और नुक़सान नहीं रोकता।

और अगर कारण स्थायी है, तो इलाज जीवनभर का है, तीन महीने का नहीं।

डॉक्टर के पास कब

जल्दी, और अपने मन से पूरक से पहले:

  • हाथ-पैर में झुनझुनी, सुन्नपन या जलन, यह जाँच कराने का मामला है
  • चलने में लड़खड़ाना या संतुलन बिगड़ना
  • जीभ का लाल, चिकना या जलने वाला होना
  • लगातार थकान और पीलापन
  • याददाश्त या एकाग्रता में साफ़ गिरावट
  • बड़ी कोशिकाओं वाली ख़ून की कमी (MCV बढ़ा हुआ) रिपोर्ट में मिली हो

जाँच ज़रूर कराएँ, अगर आप:

  • शुद्ध शाकाहारी (vegan) हैं, और गर्भवती या स्तनपान कराती शाकाहारी माँ के लिए यह ज़रूरी है
  • लंबे समय से मेटफ़ॉर्मिन लेते हैं
  • लंबे समय से एसिडिटी की दवा (PPI) लेते हैं
  • आँत की या मोटापे की सर्जरी हुई है
  • उम्र 60 से ज़्यादा है और थकान या झुनझुनी है

तुरंत: उलझन; चलने में अचानक बहुत दिक़्क़त; गंभीर ख़ून की कमी के लक्षण (बहुत साँस फूलना, सीने में दर्द, बेहोशी जैसा लगना)।

और यह ज़रूर पूछें: अगर आपको झुनझुनी है और आप आयरन-फ़ॉलिक एसिड ले रहे हैं, B12 की जाँच हुई है या नहीं।

निचोड़

  1. B12 की कमी से तंत्रिका का नुक़सान ख़ून की कमी के बिना भी हो सकता है
  2. और लंबे समय तक रहे तो वह स्थायी हो सकता है
  3. “हीमोग्लोबिन ठीक है तो B12 ठीक होगा”, यह अनुमान ग़लत है
  4. फ़ॉलिक एसिड ख़ून की कमी ठीक कर देता है और तंत्रिका का नुक़सान नहीं रोकता
  5. भारत में आयरन+फ़ॉलिक एसिड की गोली व्यापक है और वह B12 की कमी ढँक सकती है
  6. बड़ी कोशिका वाली ख़ून की कमी में फ़ॉलिक एसिड से पहले B12 की जाँच
  7. B12 दो काम करता है: DNA बनाना, और तंत्रिका का आवरण बनाए रखना
  8. जीभ का लाल, चिकना होना (glossitis) एक क्लासिक संकेत है
  9. झुनझुनी आम तौर पर दोनों पैरों से शुरू होकर ऊपर बढ़ती है
  10. अंधेरे में संतुलन बिगड़ना रीढ़ के प्रभावित होने का संकेत है
  11. B12 पौधों में नहीं बनता, वह सूक्ष्मजीव बनाते हैं
  12. vegan भोजन में व्यावहारिक रूप से शून्य
  13. दूध-दही से थोड़ा मिलता है, और आम भारतीय मात्रा में अक्सर पर्याप्त नहीं
  14. मेटफ़ॉर्मिन का B12 अवशोषण पर असर अच्छी तरह दर्ज है
  15. एसिडिटी की दवा (PPI) अवशोषण घटाती है, और सालों चलती है
  16. परनिशियस एनीमिया भोजन से ठीक नहीं होता
  17. अवशोषण इलियम में होता है, वहाँ सर्जरी हुई हो तो कमी होती है
  18. शाकाहारी माँ के दूध में कमी शिशु के विकास को प्रभावित करती है
  19. सीरम B12 सीमावर्ती मामलों में भरोसेमंद नहीं
  20. आयरन की कमी साथ हो तो MCV सामान्य दिख सकता है, निदान छुप जाता है
  21. सीमावर्ती मामलों में होमोसिस्टीन और MMA; MMA ज़्यादा विशिष्ट
  22. जाँच से पहले पूरक शुरू न करें
  23. तंत्रिका के लक्षण, गंभीर एनीमिया, या अवशोषण की समस्या में इंजेक्शन
  24. ऊँची मात्रा में मुँह से B12 अवशोषण की समस्या में भी काम करता है
  25. क्योंकि एक हिस्सा निष्क्रिय प्रसार से अवशोषित होता है
  26. sublingual गोलियाँ सामान्य गोली से बेहतर नहीं निकलीं
  27. कारण स्थायी हो तो इलाज जीवनभर का है
  28. “तीन महीने की कोर्स” सबसे आम ग़लती है
  29. तंत्रिका का सुधार महीनों लेता है और अधूरा रह सकता है
  30. गंभीर कमी में इलाज शुरू करने पर पोटैशियम गिर सकता है
  31. किण्वित भोजन भरोसेमंद B12 स्रोत नहीं है
  32. स्पिरुलिना में बड़े हिस्से में pseudo-B12 होता है, जो काम नहीं करता
  33. B12 की विषाक्तता बहुत कम है, अतिरिक्त पेशाब से निकल जाता है
  34. कमी न हो तो B12 का इंजेक्शन ऊर्जा नहीं देता

संरचना: B-Complex Capsule। और पढ़ें: why Indian vegetarians run short, शाकाहारी लोगों के लिए B12 के स्रोत, methylcobalamin vs cyanocobalamin, और vegan B12, non-negotiable and why।

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Reviewed by

Tarun Vashisht

Head of Ayurvedic Formulations & Regulatory Quality

Ayurvedic physician and pharmacognosy specialist with over 15 years of experience overseeing GMP-certified herbal extractions, classical proprietary formulations, and AYUSH/FSSAI regulatory compliance for direct-selling and retail nutraceutical brands.

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