Reviewed for accuracy and claims compliance: Claims and compliance review
नया सप्लीमेंट ब्रांड शुरू करने वाले लोग आम तौर पर इस क्रम में चलते हैं, नाम सोचा, लोगो बनवाया, डोमेन लिया, लेबल डिज़ाइन कराया, प्लेट बनवाई, स्टॉक मँगाया, और उसके बाद ट्रेडमार्क के बारे में सोचा।
यह क्रम उलटा है, और यही इस क्षेत्र की सबसे महँगी ग़लती है।
क्योंकि अगर नाम पहले से किसी का है, तो आपने लोगो, लेबल, प्लेट, पैकेजिंग, लिस्टिंग और शुरुआती मार्केटिंग, सब उस नाम पर ख़र्च कर दिया जिसे आप रख नहीं पाएँगे।
यह लेख सही क्रम के बारे में है।
यह जानकारी सामान्य समझ के लिए है, क़ानूनी सलाह नहीं। ट्रेडमार्क के नियम, वर्ग और प्रक्रिया बदलती है और हर मामला अलग होता है। आवेदन से पहले किसी योग्य ट्रेडमार्क वकील या एजेंट से सलाह लें।
क्रम, एक लाइन में
जाँच → नाम तय → आवेदन → उसके बाद लोगो, लेबल और प्लेट।
और “आवेदन” का मतलब रजिस्ट्रेशन मिल जाना नहीं है। आवेदन की तारीख़ मायने रखती है, और रजिस्ट्रेशन में समय लगता है, तो आप आवेदन के बाद काम आगे बढ़ा सकते हैं, लेकिन जाँच से पहले नहीं।
कदम 1: वर्ग समझिए
ट्रेडमार्क पूरे बाज़ार के लिए नहीं मिलता। वह वर्गों में मिलता है।
सप्लीमेंट कारोबार के लिए आम तौर पर जो वर्ग प्रासंगिक होते हैं:
वर्ग 5, औषधीय और आयुर्वेदिक तैयारियाँ, आहार संबंधी सप्लीमेंट। यह सप्लीमेंट ब्रांड का मुख्य वर्ग है।
वर्ग 29 और 30, कुछ खाद्य श्रेणियाँ, जहाँ प्रोडक्ट खाद्य पदार्थ की तरह बिकता है।
वर्ग 3, सौंदर्य प्रसाधन और व्यक्तिगत देखभाल, अगर आपकी रेंज में तेल, क्रीम या शैम्पू हैं।
वर्ग 35, व्यापार और रिटेल सेवाएँ, अगर आप अपने नाम से दुकान या मार्केटप्लेस चलाते हैं।
यह ज़रूरी क्यों है: कोई दूसरा वही नाम किसी और वर्ग में रखे हो सकता है, और वह अपने आप में रुकावट नहीं है, लेकिन समान वर्ग या समान वस्तुओं में हो तो है। और आपकी रेंज बढ़ने पर आपको और वर्ग चाहिए होंगे, इसलिए शुरू में ही सोच लें कि दो साल में क्या बेचेंगे।
कदम 2: जाँच, और तीन अलग-अलग जाँच हैं
लोग एक जाँच करके निश्चिंत हो जाते हैं। तीनों करनी चाहिए।
ट्रेडमार्क रजिस्ट्री पर खोज। सार्वजनिक खोज उपलब्ध है, और उसमें उन वर्गों में समान और मिलते-जुलते नाम देखिए। और “समान” का मतलब केवल अक्षर-दर-अक्षर नहीं है, उच्चारण में मिलते-जुलते नाम भी आपत्ति का आधार बनते हैं।
बाज़ार में खोज। मार्केटप्लेस, दुकानें, और सामान्य इंटरनेट खोज। कोई नाम बिना रजिस्ट्रेशन के भी इस्तेमाल में हो सकता है, और लंबे इस्तेमाल से अधिकार बनते हैं।
और डोमेन तथा सोशल हैंडल की उपलब्धता। यह क़ानूनी जाँच नहीं है, व्यावहारिक है, लेकिन अगर नाम का डोमेन और हैंडल किसी और के पास हैं, तो आपका ब्रांड हमेशा दूसरे नंबर पर दिखेगा।
तीनों में से किसी एक में भी टकराव मिले, तो नाम बदल लेना सस्ता है। बाद में बदलना महँगा है।
कदम 3: नाम ऐसा चुनिए जो रजिस्टर हो सके
और यहाँ एक बात है जो नए ब्रांड को उलझाती है।
जो नाम प्रोडक्ट का वर्णन करता है, वह आम तौर पर रजिस्टर नहीं होता या कमज़ोर होता है।
“हर्बल अश्वगंधा” जैसा नाम वर्णनात्मक है, यह बताता है कि प्रोडक्ट क्या है, तो वह किसी एक के एकाधिकार में नहीं दिया जाता।
जो नाम मज़बूत होते हैं: गढ़े हुए शब्द, या ऐसे शब्द जिनका प्रोडक्ट से सीधा संबंध नहीं है, या मिले-जुले बनावटी शब्द।
और एक व्यावहारिक सलाह: नाम ऐसा हो जिसे फ़ोन पर बोलकर समझाया जा सके और जिसकी स्पेलिंग अनुमान से लिखी जा सके। भारत में दुकानदार से फ़ोन पर ऑर्डर आम बात है, और जो नाम सुनकर लिखा नहीं जाता, वह हर बार एक रुकावट है।
कुछ चीज़ें जिनसे बचें: किसी मौजूदा बड़े ब्रांड से मिलता-जुलता नाम; किसी देवी-देवता या धार्मिक प्रतीक का नाम जहाँ आपत्ति की गुंजाइश हो; भौगोलिक संकेत जो किसी और के अधिकार में हैं; और ऐसा नाम जो अपने आप में एक दावा कर दे, जैसे कोई नाम जिसमें “क्योर” या किसी बीमारी का नाम हो, जो लेबल नियमों के हिसाब से भी समस्या है।
कदम 4: आवेदन
यह काम किसी ट्रेडमार्क वकील या पंजीकृत एजेंट से कराएँ। यह उन कामों में से है जहाँ ख़ुद करने की बचत बाद की जटिलता से बहुत छोटी पड़ती है।
जो तय करना होता है:
शब्द चिह्न या युक्त चिह्न। शब्द चिह्न सिर्फ़ नाम की रक्षा करता है, किसी भी फ़ॉन्ट और रंग में। युक्त चिह्न लोगो के साथ के विशिष्ट रूप की। आम तौर पर दोनों लेने की सलाह दी जाती है, और अगर एक ही लेना हो तो शब्द चिह्न ज़्यादा व्यापक होता है।
कौन-कौन से वर्ग।
आवेदक कौन है, आप व्यक्तिगत रूप से, या कंपनी। बाद में हस्तांतरण संभव है लेकिन अतिरिक्त काम है, तो शुरू में ही तय कर लें।
और छोटे उद्यमों के लिए शुल्क में रियायत उपलब्ध हो सकती है, जिसके लिए दस्तावेज़ चाहिए।
कदम 5: आवेदन के बाद क्या होता है
और इस समयरेखा को समझना ज़रूरी है, क्योंकि लोग रजिस्ट्रेशन का इंतज़ार करते हुए कारोबार रोक देते हैं, जो ज़रूरी नहीं है।
जाँच रिपोर्ट, रजिस्ट्री आपत्तियाँ उठा सकती है, और उनका जवाब देना होता है।
प्रकाशन, चिह्न जर्नल में छपता है।
विरोध की अवधि, कोई तीसरा पक्ष आपत्ति कर सकता है।
और फिर पंजीकरण।
इस पूरी प्रक्रिया में समय लगता है, और वह समय आपके नियंत्रण में नहीं है।
इस बीच आप नाम का इस्तेमाल कर सकते हैं और “TM” का चिह्न लगा सकते हैं। ”®” का चिह्न केवल पंजीकरण के बाद लगता है, उससे पहले लगाना ग़लत है।
और वह ग़लती जो हम बार-बार देखते हैं
हम मैन्युफ़ैक्चरर हैं, तो यह ग़लती हमारे सामने उसी जगह आती है जहाँ वह सबसे महँगी हो चुकी होती है, प्लेट बनने के बाद।
एक क्लाइंट नाम तय करता है, लेबल डिज़ाइन कराता है, हमें आर्टवर्क भेजता है, प्लेट बनती है, और फिर किसी से क़ानूनी नोटिस आता है। या मार्केटप्लेस पर ब्रांड रजिस्ट्री में नाम दर्ज कराते समय पता चलता है कि नाम किसी और का है।
उस समय जो बदलना पड़ता है: नाम, लोगो, लेबल, प्लेट, छपी हुई पैकेजिंग, कार्टन, लिस्टिंग, डोमेन, सोशल हैंडल, और वह शुरुआती मार्केटिंग जिसका कोई निशान नहीं बचता।
और जो बिक चुका है उस पर पुराना नाम रहता है, जो अपने आप में एक अलग समस्या है।
इसीलिए हम क्लाइंट से आर्टवर्क के साथ यह भी पूछते हैं कि नाम की जाँच हुई है या नहीं। यह हमारा काम नहीं है और हम क़ानूनी राय नहीं देते, लेकिन प्लेट बनाने से पहले एक सवाल पूछ लेना सस्ता है।
छोटी चेकलिस्ट
वर्ग तय किए, और दो साल आगे की रेंज सोचकर। ट्रेडमार्क रजिस्ट्री पर खोज, समान और मिलते-जुलते नामों के लिए। मार्केटप्लेस और सामान्य इंटरनेट खोज। डोमेन और सोशल हैंडल की उपलब्धता। नाम वर्णनात्मक नहीं है। नाम फ़ोन पर बोलकर समझाया जा सकता है। नाम में कोई बीमारी या दावा नहीं है। वकील या पंजीकृत एजेंट के ज़रिए आवेदन। शब्द चिह्न, और संभव हो तो युक्त चिह्न भी। आवेदक का नाम सही, व्यक्ति या कंपनी, तय करके। आवेदन संख्या मिल गई। और उसके बाद लोगो, लेबल और प्लेट।
छोटा सारांश
- सही क्रम: जाँच → नाम तय → आवेदन → फिर लोगो, लेबल, प्लेट
- उल्टा क्रम इस क्षेत्र की सबसे महँगी ग़लती है
- ट्रेडमार्क वर्गों में मिलता है, पूरे बाज़ार के लिए नहीं
- सप्लीमेंट का मुख्य वर्ग 5 है
- खाद्य श्रेणियों के लिए 29 और 30, पर्सनल केयर के लिए 3
- रिटेल सेवाओं के लिए 35
- दो साल आगे की रेंज सोचकर वर्ग चुनें
- तीन अलग जाँच करनी हैं, एक नहीं
- रजिस्ट्री पर खोज, और उच्चारण में मिलते-जुलते नाम भी देखें
- बाज़ार में खोज, बिना रजिस्ट्रेशन के इस्तेमाल से भी अधिकार बनते हैं
- डोमेन और हैंडल की उपलब्धता व्यावहारिक जाँच है
- किसी एक में टकराव मिले तो नाम बदलना अभी सस्ता है
- वर्णनात्मक नाम कमज़ोर होते हैं या रजिस्टर नहीं होते
- गढ़े हुए या असंबंधित शब्द मज़बूत होते हैं
- नाम फ़ोन पर बोलकर समझाया जा सके और स्पेलिंग अनुमान से लिखी जा सके
- भारत में फ़ोन पर ऑर्डर आम है, यह असली बाधा है
- बड़े ब्रांड से मिलता-जुलता नाम न लें
- नाम में बीमारी या दावा न हो, लेबल नियमों में भी समस्या है
- आवेदन वकील या पंजीकृत एजेंट से कराएँ
- शब्द चिह्न नाम की रक्षा करता है, युक्त चिह्न लोगो के रूप की
- एक ही लेना हो तो शब्द चिह्न ज़्यादा व्यापक है
- आवेदक व्यक्ति है या कंपनी, शुरू में तय करें
- छोटे उद्यमों के लिए शुल्क रियायत हो सकती है
- आगे: जाँच रिपोर्ट, प्रकाशन, विरोध की अवधि, पंजीकरण
- इस दौरान नाम इस्तेमाल कर सकते हैं और “TM” लगा सकते हैं
- ”®” केवल पंजीकरण के बाद, पहले लगाना ग़लत है
- प्लेट बनने के बाद नाम बदलने पर सब कुछ बदलता है
- और जो बिक चुका है उस पर पुराना नाम रह जाता है
- प्लेट से पहले एक सवाल पूछ लेना सस्ता है
आगे पढ़ें: सप्लीमेंट ब्रांड कैसे शुरू करें, लेबल कम्प्लायंस. संबंधित लेख: choosing a category you can actually win, minimum order quantity, why it exists, लेबल पर क्या लिखना ज़रूरी है, और FSSAI लाइसेंस कैसे लें.
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