Reviewed for accuracy and claims compliance: दावा-अनुपालन समीक्षा (claims review)
मुँहासों के लिए घरेलू नुस्ख़े इंटरनेट पर भरे पड़े हैं, और उनमें से कुछ त्वचा को वाक़ई नुक़सान पहुँचाते हैं, ख़ासकर वे जिनमें नींबू, बेकिंग सोडा या टूथपेस्ट शामिल हैं।
इस लेख में पहले वे जो सुरक्षित और उपयोगी हैं, फिर वे जिनसे बचना चाहिए।
यह लेख जानकारी के लिए है, चिकित्सकीय सलाह नहीं। गहरे, दर्द भरे मुँहासे जो निशान छोड़ रहे हों, उनमें त्वचा रोग विशेषज्ञ से मिलें, घरेलू उपाय में समय न गँवाएँ।
पहले: मुँहासे होते क्यों हैं
चार चीज़ें मिलकर:
- त्वचा के छिद्रों में अतिरिक्त तेल
- मृत कोशिकाओं से छिद्र बंद होना
- वहाँ मौजूद बैक्टीरिया की बढ़त
- सूजन
और इनके पीछे: हार्मोन (इसीलिए किशोरावस्था में और माहवारी से पहले बढ़ते हैं), आनुवंशिकता, तनाव, नींद, और कुछ हद तक खानपान।
जो वजह नहीं है: गंदगी। मुँहासे चेहरा गंदा होने से नहीं होते, और यह ग़लतफ़हमी सीधे अगली ग़लती तक ले जाती है।
सबसे बड़ी ग़लती
बार-बार और ज़ोर से चेहरा धोना।
यह सबसे आम प्रतिक्रिया है, तैलीय लगता है, तो दिन में चार-पाँच बार धो लो, और रगड़कर।
इससे होता यह है कि त्वचा की सुरक्षा परत टूट जाती है, त्वचा सूख जाती है, और जवाब में और ज़्यादा तेल बनाती है। साथ ही जलन बढ़ती है, जो मुँहासों को लाल और बदतर बनाती है।
सही तरीक़ा: दिन में दो बार, हल्के फ़ेस वॉश से, बिना रगड़े। धोने के बाद चेहरा खिंचा-खिंचा लगे तो फ़ेस वॉश बहुत कड़ा है।
जो घरेलू चीज़ें सुरक्षित और उपयोगी हैं
एलोवेरा जेल
सबसे सुरक्षित विकल्प। जलन कम करता है, हल्का मॉइस्चराइज़र है, और लगभग सबको सूट करता है।
ताज़ा पत्ते से निकालें तो पीला रस निकालकर फेंक दें, वही जलन करता है।
नीम
नीम का पारंपरिक उपयोग इसी संदर्भ में सबसे पुराना है।
बाहरी: नीम की पत्तियाँ उबालकर, ठंडा करके उस पानी से चेहरा धोना। आंतरिक: नीम कैप्सूल या पत्ती, पर गर्भावस्था में और गर्भधारण की कोशिश के दौरान नहीं। यह चेतावनी ज़रूरी है और अक्सर नहीं दी जाती।
हल्दी
जलन कम करने के लिए पारंपरिक रूप से इस्तेमाल। बेसन या दही के साथ, थोड़ी मात्रा में।
सावधानी: ज़्यादा हल्दी से त्वचा पर पीलापन रह सकता है, और कुछ लोगों को इससे जलन होती है। पहले कान के पीछे लगाकर देखें।
मुल्तानी मिट्टी
तैलीय त्वचा के लिए पारंपरिक। हफ़्ते में एक बार काफ़ी है।
रोज़ नहीं, इससे त्वचा बहुत सूख जाती है और फिर वही तेल वाला चक्र शुरू होता है।
शहद
हल्का, और त्वचा पर नरम। कुछ मिनट लगाकर धो लेना।
बर्फ़
किसी बड़े, लाल, दर्द भरे दाने पर, कपड़े में लपेटकर, कुछ मिनट। सूजन और लाली कम करता है।
तुलसी और मंजिष्ठा
पारंपरिक रक्तशोधक श्रेणी की जड़ी-बूटियाँ, आंतरिक उपयोग में।
जो घरेलू नुस्ख़े नुक़सान करते हैं
यह हिस्सा ज़रूरी है क्योंकि ये सब बहुत प्रचलित हैं।
नींबू का रस सीधे चेहरे पर। यह बहुत अम्लीय है, त्वचा की सुरक्षा परत तोड़ता है, और, सबसे ज़रूरी, धूप के साथ मिलकर काले धब्बे और जलन पैदा कर सकता है। यह एक दर्ज की गई प्रतिक्रिया है। नींबू चेहरे पर न लगाएँ।
बेकिंग सोडा। त्वचा का pH बहुत बदल देता है और सुरक्षा परत को नुक़सान पहुँचाता है।
टूथपेस्ट। यह मशहूर नुस्ख़ा त्वचा को सुखाता और जलाता है। जो “सूख गया” लगता है, वह असल में रासायनिक जलन है।
चीनी या अख़रोट के छिलके से रगड़ना। कड़े स्क्रब त्वचा में बारीक़ दरारें बनाते हैं और सूजन बढ़ाते हैं। सक्रिय मुँहासों पर स्क्रब बिलकुल नहीं।
मुँहासे फोड़ना। यह सबसे आम और सबसे महँगी ग़लती है, इससे संक्रमण फैलता है और निशान पक्के हो जाते हैं।
बहुत सारी चीज़ें एक साथ। चार अलग-अलग नुस्ख़े रोज़ आज़माना जलन का सबसे तेज़ रास्ता है।
रोज़ की आदतें
- तकिये का कवर हफ़्ते में दो बार बदलें
- फ़ोन की स्क्रीन साफ़ रखें, वह गाल से लगता है
- बाल चेहरे से दूर रखें, ख़ासकर तेल लगाने के बाद
- बार-बार चेहरा न छुएँ
- मेकअप हटाकर सोएँ
- नॉन-कॉमेडोजेनिक लिखा हुआ मॉइस्चराइज़र चुनें
- सनस्क्रीन लगाएँ, यह ज़रूरी है, ख़ासकर अगर आप कोई एक्टिव इस्तेमाल कर रहे हों; और यह निशान गहरे होने से बचाता है
तैलीय त्वचा को भी मॉइस्चराइज़र चाहिए। बिना मॉइस्चराइज़र की सूखी त्वचा ज़्यादा तेल बनाती है। हल्का, जेल वाला चुनें।
खानपान, सच क्या है
कई सालों तक कहा जाता रहा कि खाने का मुँहासों से कोई संबंध नहीं। अब तस्वीर थोड़ी बदली है।
जिनका कुछ आधार है:
- ज़्यादा चीनी और मैदा, रक्त शर्करा में तेज़ उछाल पैदा करने वाले भोजन का संबंध देखा गया है
- दूध, ख़ासकर स्किम्ड दूध, कुछ अध्ययनों में संबंध मिला है; दही और पनीर में यह संबंध उतना नहीं दिखता
जिनका आधार कमज़ोर है:
- तला हुआ खाना, लोकप्रिय मान्यता, मज़बूत प्रमाण नहीं
- चॉकलेट, यह ज़्यादातर उसमें मौजूद चीनी की बात है
व्यावहारिक सलाह: चीनी और मैदा कम करना वैसे भी अच्छा है। पूरा दूध छोड़ने से पहले कुछ हफ़्ते आज़माकर देखें कि फ़र्क़ पड़ता है या नहीं, हर किसी पर नहीं पड़ता।
और सबसे ज़रूरी: नींद और तनाव का असर इस शिकायत में साफ़ दिखता है।
कितना समय लगता है
त्वचा का चक्र हफ़्तों का होता है।
- किसी भी उपाय को छह से आठ हफ़्ते दें
- निशान महीनों लेते हैं, और कुछ गहरे निशान घरेलू उपाय से नहीं जाते
- जो उत्पाद “सात दिन में” का वादा करे, उस पर भरोसा न करें
डॉक्टर के पास कब जाएँ
- गहरे, दर्द भरे, गाँठ जैसे मुँहासे, ये निशान छोड़ते हैं, और इनका असरदार इलाज मौजूद है
- निशान बनने लगें, देर न करें
- छह-आठ हफ़्ते के उपाय से सुधार न हो
- मुँहासों का मन पर असर पड़ रहा हो, यह एक वाजिब कारण है
- महिलाओं में साथ में अनियमित माहवारी और चेहरे पर अनचाहे बाल, PCOS की जाँच
- अचानक, तेज़ी से बढ़ने वाले मुँहासे
एक बात ज़ोर देकर: गहरे निशान छोड़ने वाले मुँहासों में महीनों घरेलू उपाय करते रहना सबसे महँगी देरी है। निशान बनने के बाद उन्हें हटाना कहीं ज़्यादा मुश्किल और महँगा है।
निचोड़
- दिन में दो बार, हल्के से धोएँ, बार-बार और रगड़कर नहीं
- नींबू, बेकिंग सोडा, टूथपेस्ट चेहरे पर न लगाएँ
- फोड़ें नहीं, निशान पक्के हो जाते हैं
- एलोवेरा, नीम, हल्दी, सुरक्षित विकल्प
- तैलीय त्वचा को भी मॉइस्चराइज़र चाहिए
- चीनी और मैदा कम, नींद पूरी
- छह से आठ हफ़्ते दें
- निशान बनने लगें तो डॉक्टर, तुरंत
अगर आप इस श्रेणी में उत्पाद बनवा रहे हैं, तो नीम कैप्सूल और नीम का सामग्री पृष्ठ देखें, गर्भावस्था संबंधी चेतावनी वहाँ विस्तार से है।
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