Reviewed for accuracy and claims compliance: दावा-अनुपालन समीक्षा (claims review)
मुलेठी उन कुछ जड़ी-बूटियों में है जिनके बारे में हम कह सकते हैं: यह वाक़ई काम करती है, और उसका तरीक़ा सीधा तथा समझने योग्य है।
और उसी के साथ यह भी कहना ज़रूरी है: मुलेठी की एक सख़्त समय-सीमा है, जो रक्तचाप और पोटैशियम से जुड़ी है, और वह किसी पैकेट पर नहीं छपती।
तो यह लेख दोनों हिस्से देता है: गले पर उसका असली असर, और वह चार से छह हफ़्ते की सीमा जिसके आगे वह एक अलग चीज़ बन जाती है।
यह जानकारी है, चिकित्सकीय सलाह नहीं। और अगर आपको उच्च रक्तचाप, हृदय या गुर्दे की बीमारी है, या आप गर्भवती हैं, तो मुलेठी आपके लिए नहीं है, और इस पर हमने एक अलग, पूरा लेख लिखा है।
पौधा और शास्त्रीय स्थिति
Glycyrrhiza glabra, प्रयुक्त भाग जड़।
शास्त्रीय नाम यष्टिमधु, जिसका अर्थ है “मीठी लकड़ी”। और नाम सटीक है: वह वाक़ई मीठी है, चीनी से कई गुना ज़्यादा मीठी।
शास्त्रीय वर्गीकरण:
कंठ्य, गले और आवाज़ के लिए हितकारी। और यह उसका सबसे सटीक वर्ग है, जो आधुनिक समझ से सीधे मेल खाता है।
मधुर रस, मीठा रस।
पित्तशामक, पित्त को शांत करने वाली।
व्रण्य, घाव भरने के संदर्भ में।
और रसायन के संदर्भ में भी।
शास्त्रीय योग: यष्टिमधु चूर्ण, सितोपलादि चूर्ण और गले-खाँसी के कई योग।
और यह ध्यान देने लायक़ है कि शास्त्र उसे कंठ्य कहता है, गले का, न कि “खाँसी का इलाज”। यह फ़र्क़ नीचे काम आएगा।
वह वास्तव में क्या करती है
और यहाँ मुलेठी असामान्य है, क्योंकि उसका तरीक़ा भौतिक है, औषधीय नहीं।
वह एक demulcent है।
मतलब: वह गले की सतह पर एक चिकनी, गाढ़ी परत बना देती है।
और गले का दर्द अक्सर इसी वजह से होता है, सूजी हुई, सूखी, छिली हुई सतह पर हवा और निगलने का घर्षण।
तो मुलेठी उस सतह को ढँक देती है, और घर्षण कम हो जाता है।
यह आराम असली है, और वह तुरंत है।
और यहाँ वह बात जो सबसे महत्वपूर्ण है:
यह लक्षण का आराम है, कारण का इलाज नहीं।
मुलेठी वायरस को नहीं मारती। वह जीवाणु संक्रमण को ठीक नहीं करती। वह सिर्फ़ सतह को ढँकती है, जिससे दर्द कम लगता है।
और इसे जानना ज़रूरी है, क्योंकि “आराम मिल गया” और “ठीक हो गया” दो अलग बातें हैं।
और एक जगह जहाँ मानव सबूत ठीक-ठाक है
ऑपरेशन के बाद का गले का दर्द।
जब किसी को बेहोश करने के लिए गले में नली (endotracheal tube) डाली जाती है, तो उसके बाद गला दर्द करता है, यह बहुत आम है।
और मुलेठी के गरारे (licorice gargle) पर इस संदर्भ में यादृच्छिक मानव अध्ययन हैं, और उनमें ऑपरेशन के बाद गले के दर्द में कमी दर्ज है।
यह इस विषय में सबसे ठोस मानव सबूत है, और वह ठीक उसी तर्क से काम करता है, सतह को ढँकना।
और यह दिलचस्प है कि सबसे अच्छा सबूत उस जगह है जिसका विज्ञापन कभी नहीं होता।
खाँसी पर
मुलेठी को पारंपरिक रूप से खाँसी में प्रयुक्त किया जाता है, और उसका तर्क वही है: सूखी, खुजली वाली खाँसी गले की जलन से चलती है, और सतह ढँकने से वह कम होती है।
और यहाँ एक बात जो कहने लायक़ है: खाँसी की दवाओं पर जो अध्ययन हैं, उनमें यह बार-बार मिला है कि demulcent प्रभाव, यानी मिठास और चिपचिपाहट, खाँसी की दवा के फ़ायदे का एक बड़ा हिस्सा है।
यानी शहद और मुलेठी, दोनों, उसी एक चीज़ से काम करते हैं।
और शहद सस्ता, सुरक्षित और उपलब्ध है, और एक साल से बड़े बच्चों में खाँसी के लिए उसका सबूत ठीक-ठाक है। (एक साल से छोटे बच्चे को शहद कभी नहीं, शिशु बोटुलिज़्म का जोखिम।)
तो अगर सवाल यह है कि “गले के लिए सबसे पहले क्या”, तो ईमानदार जवाब शहद और गरम पानी है, मुलेठी नहीं। और हम मुलेठी वाले उत्पाद बनाते हैं।
पेट पर
मुलेठी का पेट के संदर्भ में भी उपयोग है, अम्लता और अपच में, और उसी demulcent तर्क से।
और यहाँ एक महत्वपूर्ण रूप है: DGL (deglycyrrhizinated licorice), जिसमें से वह यौगिक निकाल दिया जाता है जो रक्तचाप की समस्या करता है।
तो पेट के लिए, DGL एक ज़्यादा सुरक्षित विकल्प है, और यह जानने लायक़ है।
अब वह सीमा, और यह लेख का सबसे ज़रूरी हिस्सा है
मुलेठी का मुख्य यौगिक ग्लिसिराइज़िन (glycyrrhizin) है, जड़ में लगभग 2 से 25 प्रतिशत तक।
और वह शरीर में बदलकर एक ऐसा काम करता है जो सीधा और मापने योग्य है:
वह गुर्दे में एक एन्ज़ाइम को रोक देता है, जिसका काम कॉर्टिसोल को निष्क्रिय करना है।
नतीजा: शरीर में सोडियम और पानी रुकता है, और पोटैशियम निकल जाता है।
और उसका परिणाम:
रक्तचाप बढ़ना। पोटैशियम गिरना (hypokalaemia)। सूजन। और पोटैशियम बहुत गिरने पर, माँसपेशियों की कमज़ोरी, ऐंठन, और धड़कन की गड़बड़ी।
और यह काल्पनिक नहीं है। मुलेठी या मुलेठी वाली मिठाई के ज़्यादा सेवन से उच्च रक्तचाप और पोटैशियम की कमी के मामले चिकित्सा साहित्य में दर्ज हैं।
और सबसे ज़रूरी बात: यह मात्रा और अवधि पर निर्भर है।
गले के लिए कुछ दिन, थोड़ी मात्रा, यह वह समस्या नहीं है।
महीनों तक, रोज़, चाय या चूर्ण या कैंडी में, यह वह समस्या है।
तो व्यावहारिक नियम:
लगातार 4 से 6 हफ़्ते से ज़्यादा न लें।
और उच्च रक्तचाप, हृदय की विफलता, गुर्दे की बीमारी, पोटैशियम की कमी, लिवर की बीमारी, या गर्भावस्था हो, तो न लें।
इस पूरे तंत्र पर हमने एक अलग, विस्तृत लेख लिखा है, और वह इस लेख से ज़्यादा ज़रूरी है।
गले के लिए व्यावहारिक तरीक़े
सबसे पहले, और सबसे सस्ता:
गरम पानी में शहद और नींबू। और यही demulcent तर्क है, मुफ़्त में। नमक के पानी के गरारे, गरम पानी में आधा चम्मच नमक। भाप। और पानी ख़ूब पीना।
और फिर मुलेठी:
मुलेठी की लकड़ी चबाना, पारंपरिक, सीधा, और मात्रा अनियंत्रित। मुलेठी का काढ़ा, एक छोटा टुकड़ा या चौथाई चम्मच चूर्ण, एक कप पानी में उबालकर, छानकर। मुलेठी के गरारे, और इसका सबूत सबसे अच्छा है। और चूर्ण शहद के साथ, पारंपरिक।
और जो नहीं करना:
रोज़, महीनों तक, “गले के लिए अच्छी है” मानकर लेना। यही वह आदत है जिससे रक्तचाप की समस्या होती है।
और बच्चों को नियमित रूप से देना, बाल रोग विशेषज्ञ के बिना नहीं।
और जब गले का दर्द जड़ी का विषय नहीं है
यह हिस्सा ज़रूरी है, क्योंकि गले के दर्द में कुछ चीज़ें इंतज़ार की नहीं हैं।
तुरंत डॉक्टर के पास:
निगलने में तकलीफ़, या मुँह खोलने में तकलीफ़ लार न निगल पाना, या लार गिरना साँस लेने में तकलीफ़, या आवाज़ में घुटन गर्दन में एक तरफ़ बहुत सूजन और बहुत तेज़ दर्द एक तरफ़, मुँह खुलने में दिक़्क़त के साथ, यह गले का फोड़ा हो सकता है
और जल्दी दिखाएँ:
तेज़ बुख़ार के साथ गले में सफ़ेद मवाद जैसे धब्बे और गर्दन की गाँठें, यह जीवाणु संक्रमण (strep) हो सकता है, जिसका एंटीबायोटिक से इलाज ज़रूरी है, क्योंकि उसकी अनुपचारित जटिलताएँ हृदय और गुर्दे तक जा सकती हैं। गले का दर्द जो दो हफ़्ते से ज़्यादा चले आवाज़ का बैठा रहना तीन हफ़्ते से ज़्यादा, और यह ख़ास तौर पर तब ज़रूरी है जब आप धूम्रपान या तंबाकू का सेवन करते हों निगलने में लगातार अटकना, या वज़न घटना और गले में एक तरफ़ लगातार दर्द, कान तक जाता हुआ
और यहाँ नुक़सान जड़ी से नहीं होता, देरी से होता है।
जो हम कह सकते हैं, जो नहीं
कह सकते हैं: वनस्पति नाम (Glycyrrhiza glabra) और प्रयुक्त भाग (जड़); पारंपरिक/शास्त्रीय उपयोग का कथन, साफ़ तौर पर उसी रूप में, जिसमें कंठ्य वर्गीकरण को शास्त्रीय वर्गीकरण के रूप में बताया जाए; मात्रा; और फ़ॉर्मुलेशन में मौजूद विटामिन-खनिजों के स्वीकृत दावे।
और तथ्य: मुलेठी के लिए कोई स्वीकृत स्वास्थ्य दावा नहीं है।
नहीं कह सकते: गले के संक्रमण का इलाज, खाँसी का इलाज, अल्सर का इलाज, प्रतिरक्षा बढ़ाना, अस्थमा में फ़ायदा।
और जो हम ज़रूरी मानते हैं: “लगातार 4–6 हफ़्ते से ज़्यादा न लें”; और “उच्च रक्तचाप, हृदय या गुर्दे की बीमारी, या गर्भावस्था में न लें”, पढ़ने लायक़ आकार में।
और सबसे ईमानदार वाक्य:
मुलेठी गले पर वाक़ई असर करती है, और उसका तरीक़ा भौतिक है, वह सतह को ढँक देती है, जिससे घर्षण और दर्द कम होता है।
वह संक्रमण का इलाज नहीं है, और “आराम मिलना” तथा “ठीक होना” दो अलग बातें हैं।
और शहद वही काम करता है, सस्ते में।
और मुलेठी की चार से छह हफ़्ते की सीमा असली है, क्योंकि उसका मुख्य यौगिक सोडियम रोकता है और पोटैशियम निकालता है।
डॉक्टर के पास कब
मुलेठी लें ही नहीं, अगर: उच्च रक्तचाप; हृदय की विफलता; गुर्दे की बीमारी; पोटैशियम की कमी; लिवर की बीमारी; गर्भावस्था।
पहले पूछें, अगर आप लेते हैं: मूत्रवर्धक दवा (पोटैशियम); डिगॉक्सिन (पोटैशियम गिरने से उसकी विषाक्तता बढ़ती है); स्टेरॉयड; रक्तचाप की दवा; शुगर की दवा; वॉरफ़ैरिन; या स्तनपान करा रही हैं; या बच्चे को देना है।
रोकें और दिखाएँ: सूजन (पैर, चेहरा); रक्तचाप बढ़ना; माँसपेशियों में कमज़ोरी या ऐंठन; धड़कन अनियमित लगना; बहुत थकान; सिर दर्द, ये पोटैशियम और सोडियम के असंतुलन के संकेत हैं।
आपातकाल (गले के लिए): निगलने या साँस लेने में तकलीफ़; लार न निगल पाना; मुँह न खुलना; गर्दन में एक तरफ़ बहुत सूजन।
जल्दी दिखाएँ: तेज़ बुख़ार के साथ गले में मवाद के धब्बे; दो हफ़्ते से ज़्यादा गले का दर्द; तीन हफ़्ते से ज़्यादा आवाज़ बैठना, ख़ासकर तंबाकू के सेवन के साथ; निगलने में अटकना; वज़न घटना।
निचोड़
- मुलेठी गले पर वाक़ई काम करती है, और उसका तरीक़ा भौतिक है
- शास्त्रीय नाम यष्टिमधु, “मीठी लकड़ी”
- शास्त्रीय वर्ग कंठ्य, गले और आवाज़ के लिए
- शास्त्र उसे “खाँसी का इलाज” नहीं, “गले का” कहता है
- वह एक demulcent है, गले की सतह पर परत बनाती है
- गले का दर्द अक्सर सूखी, छिली सतह पर घर्षण से होता है
- परत बनने से घर्षण और दर्द कम होता है, और यह आराम असली है
- पर यह लक्षण का आराम है, कारण का इलाज नहीं
- वह वायरस नहीं मारती और जीवाणु संक्रमण ठीक नहीं करती
- सबसे अच्छा मानव सबूत ऑपरेशन के बाद के गले के दर्द पर है
- मुलेठी के गरारे पर यादृच्छिक अध्ययन हैं, और वे उसी तर्क से काम करते हैं
- खाँसी की दवाओं के अध्ययन में demulcent प्रभाव एक बड़ा हिस्सा निकला
- यानी शहद और मुलेठी उसी एक चीज़ से काम करते हैं
- शहद सस्ता है और एक साल से बड़े बच्चों में उसका सबूत ठीक है
- एक साल से छोटे बच्चे को शहद कभी नहीं, शिशु बोटुलिज़्म
- पेट के लिए DGL एक ज़्यादा सुरक्षित रूप है
- मुख्य यौगिक ग्लिसिराइज़िन है, जड़ में 2 से 25 प्रतिशत
- वह गुर्दे में कॉर्टिसोल को निष्क्रिय करने वाला एन्ज़ाइम रोकता है
- नतीजा: सोडियम और पानी रुकता है, पोटैशियम निकलता है
- परिणाम: रक्तचाप बढ़ना, पोटैशियम गिरना, सूजन
- पोटैशियम बहुत गिरने पर माँसपेशी की कमज़ोरी और धड़कन की गड़बड़ी
- ये मामले चिकित्सा साहित्य में दर्ज हैं
- यह मात्रा और अवधि पर निर्भर है, कुछ दिन समस्या नहीं है
- लगातार 4 से 6 हफ़्ते से ज़्यादा न लें
- उच्च रक्तचाप, हृदय, गुर्दे की बीमारी और गर्भावस्था में न लें
- सबसे सस्ता पहला क़दम: गरम पानी, शहद, नमक के गरारे, भाप
- मुलेठी के गरारे का सबूत चबाने से बेहतर है
- निगलने या साँस में तकलीफ़, लार गिरना, आपातकाल
- बुख़ार के साथ मवाद के धब्बे, जीवाणु संक्रमण हो सकता है
- तीन हफ़्ते से ज़्यादा आवाज़ बैठना, ज़रूर दिखाएँ
- मुलेठी के लिए कोई स्वीकृत स्वास्थ्य दावा नहीं है
सामग्री की जानकारी: मुलेठी और वासा। संरचना: Panch Tulsi Drops, Immunity Drops। और पढ़ें: the blood pressure caution that matters और mulethi for skin brightening।
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