Reviewed for accuracy and claims compliance: दावा-अनुपालन समीक्षा (claims review)
इस विषय पर ज़्यादातर लेख “संकल्प” और “घरेलू नुस्ख़े” से शुरू होते हैं।
और इसकी शुरुआत एक चेतावनी से होनी चाहिए, क्योंकि यह जान का मामला है:
भारी शराब पीने वाला व्यक्ति अगर अचानक पूरी तरह बंद कर दे, तो withdrawal जानलेवा हो सकता है।
इसमें दौरे पड़ते हैं, और एक स्थिति जिसे डिलीरियम ट्रेमेंस कहते हैं, जिसमें इलाज के बिना मृत्यु दर काफ़ी ऊँची होती है।
यह एकमात्र नशा नहीं है जिसमें छोड़ना ख़ुद ख़तरनाक है, पर यह सबसे आम है। और इसीलिए “कल से बिलकुल बंद” हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित सलाह नहीं है।
यह जानकारी है, चिकित्सकीय सलाह नहीं। नीचे दी गई स्थितियों में छोड़ना चिकित्सकीय निगरानी में होता है। तत्काल मदद: टेली-मानस 14416।
पहले: किन्हें निगरानी में छोड़ना चाहिए
अगर इनमें से कोई बात लागू होती है, तो डॉक्टर से मिलकर योजना बनाएँ, ख़ुद से अचानक बंद न करें:
- रोज़, या लगभग रोज़ पीना, ख़ास तौर पर सालों से
- बड़ी मात्रा में पीना
- सुबह उठकर हाथ काँपना, पसीना आना, या बेचैनी, और उसके लिए पीना (“सुबह की ज़रूरत”)
- पहले कभी छोड़ने पर दौरा पड़ा हो
- पहले कभी छोड़ने पर भ्रम, डरावने दृश्य दिखना, या बहकी बातें हुई हों
- लिवर की बीमारी
- और साथ में कोई और बीमारी, मधुमेह, हृदय, मिर्गी
- या साथ में नींद की गोलियाँ (बेंज़ोडायाज़ेपीन) भी चल रही हों
इनमें इलाज के साथ छोड़ना (medically supervised detox) होता है, और वह मुश्किल या महँगा नहीं है। सरकारी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज यह करते हैं।
Withdrawal के लक्षण और उनका समय
6 से 12 घंटे: हाथ काँपना, पसीना, जी मिचलाना, बेचैनी, नींद न आना, धड़कन तेज़।
12 से 24 घंटे: कुछ लोगों में आवाज़ें या दृश्य (hallucination), और होश साफ़ रहता है।
24 से 48 घंटे: दौरे का सबसे ज़्यादा ख़तरा।
48 से 72 घंटे और आगे: डिलीरियम ट्रेमेंस, भ्रम, दिशा का पता न चलना, बहुत पसीना, तेज़ धड़कन, बुख़ार, और डरावने दृश्य। यह अस्पताल का मामला है।
और तुरंत अस्पताल ले जाएँ अगर: दौरा पड़े, भ्रम हो, बहुत तेज़ बुख़ार या धड़कन हो, या व्यक्ति को पहचान न आए।
और वह दूसरी ज़रूरी बात: थायमिन
यह सबसे कम जानी जाने वाली और सबसे महत्वपूर्ण बात है।
भारी शराब के सेवन में विटामिन बी1 (थायमिन) की कमी आम है, शराब उसका अवशोषण घटाती है, और भोजन भी कम हो जाता है।
और थायमिन की कमी में दो स्थितियाँ होती हैं:
वर्निक एन्सेफ़लोपैथी, भ्रम, आँखों की हरकत में गड़बड़ी, और चलने में लड़खड़ाहट। यह एक आपातकाल है और इलाज से ठीक हो सकती है।
और इलाज न होने पर वह कोर्साकॉफ़ सिंड्रोम में बदल जाती है, याददाश्त का स्थायी नुक़सान।
और वह बात जो ख़ास तौर पर जाननी चाहिए:
थायमिन की कमी वाले व्यक्ति को ग्लूकोज़ (चीनी या IV ड्रिप) देने से यह स्थिति शुरू या बिगड़ सकती है, इसलिए अस्पतालों में थायमिन पहले या साथ दिया जाता है।
यानी: “कमज़ोरी लग रही है, ग्लूकोज़ पिला दो” इस स्थिति में एक असली ख़तरा है।
व्यावहारिक नतीजा: शराब छोड़ते समय थायमिन दिया जाता है, और यह डॉक्टर की देखरेख में होता है। यह उन कुछ चीज़ों में है जहाँ पूरक की असली, चिकित्सकीय भूमिका है।
जो दवाएँ वाक़ई काम करती हैं
यह हिस्सा सबसे ज़्यादा लोगों को पता नहीं होता।
शराब की लत के लिए असरदार दवाएँ मौजूद हैं, और वे भारत में उपलब्ध हैं।
नाल्ट्रेक्सोन, शराब पीने की इच्छा और पीने के बाद मिलने वाले “इनाम” को घटाता है। इसका सबूत अच्छा है। लिवर की जाँच के साथ, और यह opioid लेने वालों में नहीं दिया जाता।
एकैम्प्रोसेट, छोड़ने के बाद दोबारा शुरू न करने में मदद करता है। गुर्दे की स्थिति देखी जाती है।
डाइसल्फ़िरम, शराब पीने पर बहुत बुरी प्रतिक्रिया पैदा करता है (उल्टी, धड़कन, चेहरा लाल)। यह सिर्फ़ निगरानी और सहमति के साथ दिया जाता है, और इसके साथ शराब पीना ख़तरनाक है।
और withdrawal के लिए, बेंज़ोडायाज़ेपीन, कुछ दिनों के लिए, घटती मात्रा में, डॉक्टर की निगरानी में। यह वही दवा वर्ग है जिसकी अपनी लत लगती है, इसलिए यह छोटे, निर्धारित कोर्स के रूप में दिया जाता है, और उसे ख़ुद से जारी नहीं रखना चाहिए।
और थायमिन तथा अन्य विटामिन।
यह साफ़ कहना ज़रूरी है: ये दवाएँ इच्छाशक्ति की जगह नहीं लेतीं, और वे काम करती हैं। और “दवा से छोड़ना कमज़ोरी है” एक ग़लत और नुक़सानदेह धारणा है।
जो मनोवैज्ञानिक इलाज काम करते हैं
और इनका सबूत भी अच्छा है।
संक्षिप्त हस्तक्षेप (brief intervention), कुछ सत्रों की संरचित बातचीत, और इसका सबूत ख़ास तौर पर उन लोगों में अच्छा है जो बहुत ज़्यादा पीते हैं पर जिनमें पूरी निर्भरता नहीं है।
प्रेरणात्मक साक्षात्कार (motivational interviewing)।
CBT, और “relapse prevention”, जिसमें ट्रिगर पहचानना और उनसे निपटने की योजना बनाना सिखाया जाता है।
और पारिवारिक परामर्श।
और सहायता समूह, शराब छोड़ने वालों के समूह (जैसे Alcoholics Anonymous) भारत के लगभग हर बड़े शहर में मौजूद हैं, मुफ़्त हैं, और उनमें मदद मिलती है।
व्यावहारिक रणनीति, जो असल में काम करती है
यह हिस्सा घरेलू नुस्ख़ों की जगह लेता है, क्योंकि यही काम करता है।
एक तारीख़ तय करें, और योजना बनाएँ
और अगर आप ऊपर दी गई निगरानी वाली श्रेणी में हैं, तो वह तारीख़ डॉक्टर के साथ तय करें।
ट्रिगर की सूची बनाएँ
कब पीने की इच्छा सबसे ज़्यादा होती है? शाम का समय, काम के बाद, कुछ लोग, कुछ जगहें, तनाव, अकेलापन, त्योहार, वेतन का दिन।
और हर ट्रिगर के लिए एक वैकल्पिक योजना, कहीं और जाना, किसी को फ़ोन करना, चाय, टहलना।
और यह सबसे व्यावहारिक सलाह है: पहले कुछ हफ़्तों में उन जगहों और लोगों से दूर रहें जहाँ पीना तय है। यह कमज़ोरी नहीं, रणनीति है।
घर से हटा दें
और परिवार को बताएँ। अकेले छोड़ना सबसे मुश्किल तरीक़ा है।
शराब की जगह कुछ रखें
शाम का समय सबसे कमज़ोर होता है। उस समय के लिए कुछ तय करें, टहलना, कसरत, कोई काम, किसी से बात।
और नॉन-अल्कोहलिक पेय, चाय, छाछ, नींबू पानी, हाथ में कुछ होना मदद करता है।
नींद, खाना और व्यायाम
छोड़ने के बाद हफ़्तों तक नींद ख़राब रहती है, यह सामान्य है और यह सुधरती है। और यह दोबारा शुरू करने की एक बड़ी वजह है, इसलिए यह जानना मदद करता है।
नियमित खाना, शुगर गिरने से तलब बढ़ती है।
व्यायाम, मूड और नींद दोनों पर, और इसका सबूत अच्छा है।
और “फिसलना” योजना का हिस्सा है
एक दिन पी लेना पूरी कोशिश का ख़त्म होना नहीं है।
यह सबसे ज़रूरी बात है, क्योंकि शर्म की वजह से लोग एक फिसलन के बाद पूरी तरह लौट जाते हैं।
योजना यह हो: फिसलने पर अगले दिन फिर शुरू करना, और यह बताना, छिपाना नहीं।
शराब कम करना, जहाँ छोड़ना संभव न लगे
और यह विकल्प असली है।
जिनमें पूरी निर्भरता नहीं है, उनमें मात्रा घटाना एक मान्य और उपयोगी लक्ष्य है।
कैसे: हफ़्ते में कुछ दिन पूरी तरह बिना शराब; गिनती रखना; छोटे गिलास; बीच में पानी; और खाली पेट नहीं।
और यह साफ़ कर दें: जिनमें निर्भरता है, उनमें “कम करना” आम तौर पर काम नहीं करता, वहाँ छोड़ना ही रास्ता है, और वह निगरानी में।
और वह बात जो लोग जानना चाहते हैं: लिवर
शराब छोड़ने पर लिवर में सुधार होता है, और यह अक्सर आश्चर्यजनक रूप से अच्छा होता है।
फ़ैटी लिवर की अवस्था में सुधार हफ़्तों-महीनों में दिखता है।
और सिरोसिस की अवस्था में भी शराब छोड़ना जीवन काल और स्थिति दोनों पर बड़ा फ़र्क़ डालता है, यानी “अब तो देर हो गई” एक ग़लत धारणा है।
और हमने लिवर पर अलग विस्तार से लिखा है।
और जाँचें: लिवर की जाँच (LFT), हीमोग्लोबिन, शुगर, और डॉक्टर की राय से लिवर का अल्ट्रासाउंड या फ़ाइब्रोसिस की जाँच।
उत्पाद की ईमानदार भूमिका, और यहाँ हम सबसे साफ़ रहना चाहते हैं
हम इस श्रेणी में निर्माण करते हैं। इसलिए यह कहना ज़रूरी है।
जो कहा जा सकता है: थायमिन (बी1) और अन्य बी-विटामिन की सामान्य ऊर्जा चयापचय, तंत्रिका तंत्र और सामान्य मानसिक कार्य में मान्यता प्राप्त भूमिका; मैग्नीशियम और ज़िंक की मान्यता प्राप्त भूमिकाएँ; और कुटकी, भूम्यामलकी तथा कालमेघ जैसी शास्त्रीय सामग्री के लिए पारंपरिक उपयोग का कथन।
और पोषक तत्वों की भूमिका यहाँ असली है, भारी शराब के सेवन में थायमिन, फ़ोलेट, बी12, मैग्नीशियम और ज़िंक की कमी आम है, और उन्हें ठीक करना एक वास्तविक चिकित्सकीय कदम है।
जो नहीं कहा जा सकता: शराब की लत का इलाज, शराब छुड़ाना, तलब ख़त्म करना, लिवर ठीक करना, या “नशा मुक्ति”। ये चिकित्सकीय दावे हैं, और औषधि एवं जादुई उपचार (आक्षेपणीय विज्ञापन) अधिनियम इस क्षेत्र पर लागू होता है, चाहे लाइसेंस कोई भी हो।
और जो हम किसी भी शर्त पर नहीं बनाते:
ऐसा उत्पाद जो “बिना बताए खाने में मिलाकर शराब छुड़ाने” का दावा करे। यह भारत में विज्ञापित किया जाता है, यह झूठ है, और यह किसी की सहमति के बिना उसे कुछ देना है, जो ग़लत और ग़ैरक़ानूनी है। और अगर उसमें डाइसल्फ़िरम जैसी कोई चीज़ बिना घोषित हो, तो वह ख़तरनाक भी है।
और सबसे ईमानदार बात, जो हमारे हित के ख़िलाफ़ है:
कोई भी पूरक शराब की लत का इलाज नहीं करता। इस पर हमने अलग, पूरा लेख लिखा है।
जो इलाज करता है वह है: निगरानी में छोड़ना जहाँ ज़रूरी हो, असरदार दवाएँ, परामर्श, और सहायता समूह।
और पूरक की असली जगह एक है, कमी को ठीक करना, डॉक्टर की देखरेख में। और थायमिन के मामले में वह ज़रूरी और चिकित्सकीय है, न कि वैकल्पिक।
मदद कहाँ मिलेगी
टेली-मानस, 14416 (या 1-800-891-4416): मुफ़्त, 24 घंटे, कई भारतीय भाषाओं में।
नशा मुक्त भारत अभियान की हेल्पलाइन, 14446।
अपने डॉक्टर या सरकारी अस्पताल से, और लगभग हर सरकारी मेडिकल कॉलेज में मनोचिकित्सा विभाग तथा नशा मुक्ति (de-addiction) केंद्र होता है, जहाँ इलाज कम ख़र्च में या मुफ़्त होता है।
AIIMS और NIMHANS जैसे संस्थानों के केंद्र, और टेली-परामर्श।
और सहायता समूह, AA की बैठकें लगभग हर बड़े शहर में, मुफ़्त; और परिवार के लिए अलग समूह (Al-Anon)।
और इस पर हमने अलग, विस्तृत लेख लिखा है, किस तरह की मदद कहाँ मिलती है और उसका ख़र्च क्या है।
डॉक्टर के पास कब
तुरंत:
- छोड़ने के बाद दौरा
- भ्रम, दिशा का पता न चलना, या डरावने दृश्य दिखना, डिलीरियम ट्रेमेंस
- बहुत तेज़ धड़कन, पसीना और बुख़ार
- उल्टी में ख़ून, या काला मल
- पेट बहुत फूलना, या आँखों का पीला पड़ना
- भ्रम के साथ चलने में लड़खड़ाहट और आँखों की हरकत में गड़बड़ी, वर्निक, और यह आपातकाल है
- ख़ुद को नुक़सान पहुँचाने के विचार, टेली-मानस 14416
छोड़ने से पहले:
- रोज़ या भारी मात्रा में पीना
- सुबह हाथ काँपना या पसीना
- पहले कभी दौरा या भ्रम हुआ हो
- लिवर की बीमारी, मिर्गी, मधुमेह या हृदय रोग
- साथ में नींद की गोलियाँ
- गर्भावस्था, और गर्भावस्था में शराब की कोई सुरक्षित मात्रा नहीं मानी जाती
निचोड़
- भारी शराब अचानक बंद करना जानलेवा हो सकता है, दौरे और डिलीरियम ट्रेमेंस
- “कल से बिलकुल बंद” हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित सलाह नहीं है
- निगरानी चाहिए अगर: रोज़ पीना, सुबह काँपना, पहले दौरा, या लिवर की बीमारी
- दौरे का सबसे ज़्यादा ख़तरा 24–48 घंटे में
- डिलीरियम ट्रेमेंस 48–72 घंटे बाद, अस्पताल का मामला
- निगरानी में छोड़ना सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है
- थायमिन की कमी आम है, और वर्निक एन्सेफ़लोपैथी एक आपातकाल है
- थायमिन के बिना ग्लूकोज़ देना स्थिति बिगाड़ सकता है, “ग्लूकोज़ पिला दो” एक असली ख़तरा है
- असरदार दवाएँ मौजूद हैं: नाल्ट्रेक्सोन, एकैम्प्रोसेट, डाइसल्फ़िरम
- “दवा से छोड़ना कमज़ोरी है”, यह ग़लत और नुक़सानदेह धारणा है
- withdrawal की दवा छोटे, निर्धारित कोर्स में, ख़ुद जारी न रखें
- संक्षिप्त हस्तक्षेप और CBT का सबूत अच्छा है
- सहायता समूह मुफ़्त हैं और लगभग हर शहर में हैं
- ट्रिगर की सूची बनाएँ, और हर एक के लिए योजना
- पहले हफ़्तों में उन जगहों से दूर रहें, यह रणनीति है, कमज़ोरी नहीं
- शाम का समय सबसे कमज़ोर है, उसके लिए कुछ तय करें
- छोड़ने के बाद नींद हफ़्तों ख़राब रहती है, यह सामान्य है और सुधरती है
- फिसलना योजना का हिस्सा है, शर्म ही पूरी वापसी की वजह बनती है
- निर्भरता न हो तो मात्रा घटाना एक मान्य लक्ष्य है
- निर्भरता हो तो “कम करना” आम तौर पर काम नहीं करता
- सिरोसिस में भी छोड़ना बड़ा फ़र्क़ डालता है, “देर हो गई” ग़लत है
- कोई पूरक लत का इलाज नहीं करता
- पूरक की असली जगह कमी ठीक करना है, और थायमिन में वह चिकित्सकीय है
- “बिना बताए खाने में मिलाने” वाला उत्पाद झूठ और ग़लत है, हम वह नहीं बनाते
- टेली-मानस 14416; नशा मुक्त भारत 14446
संरचना की जानकारी: B-complex capsule। और पढ़ें: why no supplement cures addiction, where to get real help in India, और शराब और लिवर, कितना नुक़सान।
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