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Immunity & daily nutrition

बढ़ती उम्र में क्या खाना चाहिए, और जो बदलना पड़ता है

60 के बाद प्रोटीन की ज़रूरत बढ़ती है जबकि भूख घटती है। यही पूरी समस्या है। हर भोजन में प्रोटीन का हिसाब, और वे संकेत जो जाँच माँगते हैं।

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NutraHerbal संपादकीय टीम10 min read

Reviewed for accuracy and claims compliance: दावा-अनुपालन समीक्षा (claims review)

बढ़ती उम्र के खान-पान की सलाह आम तौर पर “हल्का खाओ” होती है।

और यही सलाह सबसे ज़्यादा नुक़सान करती है।

क्योंकि 60 के बाद जो असल में बदलता है वह यह है: प्रोटीन की ज़रूरत बढ़ जाती है, जबकि भूख और खाने की मात्रा घटती जाती है।

यानी थाली छोटी होती जाती है जबकि उसमें ज़्यादा डालने की ज़रूरत होती है। यही पूरी समस्या है, और बाक़ी सब इसका नतीजा है।

यह जानकारी है, चिकित्सकीय सलाह नहीं। गुर्दे की बीमारी, मधुमेह या हृदय की कमज़ोरी में मात्राएँ आपके डॉक्टर तय करते हैं। और बिना कोशिश वज़न घटना एक जाँच का संकेत है।

क्यों भूख घटती है

यह समझना ज़रूरी है, क्योंकि इसे “उम्र” मानकर छोड़ दिया जाता है जबकि इसके कुछ हिस्से ठीक होने वाले हैं।

जो उम्र के साथ होता है:

स्वाद और गंध कम होना, और इसका असर बड़ा है, क्योंकि खाना बेस्वाद लगता है। पेट देर तक भरा महसूस होना। और शारीरिक गतिविधि कम, इसलिए भूख कम।

और जो ठीक हो सकता है, और यह हिस्सा ज़्यादा ज़रूरी है:

दाँत और नक़ली दाँत का ठीक न बैठना, यह सबसे आम और सबसे अनदेखा कारण है। चबा न पाना सीधे खाने की मात्रा घटाता है। मुँह सूखना, और यह बहुत बार दवाओं का असर होता है। निगलने में दिक़्क़त, जिस पर हमने अलग लिखा है। दवाओं का असर, स्वाद बदलना, जी मिचलाना, और भूख घटाना। कई आम दवाएँ यह करती हैं। कब्ज़, भरा हुआ महसूस कराती है। अकेलापन और उदासी, अकेले खाना खाने वाले लोग कम खाते हैं, और यह दर्ज है। और अवसाद, जिसका एक मुख्य लक्षण भूख न लगना है।

तो पहला क़दम आहार बदलना नहीं है। पहला क़दम यह पूछना है कि भूख क्यों कम है।

प्रोटीन, और यही सबसे ज़रूरी हिस्सा है

उम्र के साथ मांसपेशी घटती है (sarcopenia), और उस पर हमने अलग लिखा है। यहाँ आहार की बात है।

दो बातें, और दोनों उलटी लगती हैं:

1. प्रोटीन की ज़रूरत बढ़ती है। बुज़ुर्गों में सामान्य वयस्क से ज़्यादा प्रोटीन की सलाह दी जाती है, क्योंकि शरीर उसे कम कुशलता से इस्तेमाल करता है।

2. और प्रति भोजन की मात्रा मायने रखती है। मांसपेशी बनने की प्रक्रिया शुरू होने के लिए एक भोजन में एक सीमा से ज़्यादा प्रोटीन चाहिए, और वह सीमा उम्र के साथ ऊँची हो जाती है।

इसका व्यावहारिक मतलब: दिन का पूरा प्रोटीन एक भोजन में डालने से काम नहीं चलता। हर भोजन में अलग से प्रोटीन चाहिए, और नाश्ता वहाँ सबसे कमज़ोर है।

हर भोजन में प्रोटीन, व्यावहारिक रूप में

नाश्ता, और यह सबसे ज़रूरी है:

दही या दूध के साथ कुछ, एक कटोरी दही 6–7 ग्राम देती है। बेसन या मूँग दाल का चीला, नरम, और 10–11 ग्राम। इडली-सांभर, सांभर ज़्यादा। अंडा, अगर खाते हैं। और दूध के साथ दलिया।

दोपहर और रात:

दाल गाढ़ी, पतली दाल में पानी ज़्यादा, प्रोटीन कम। राजमा, छोले, लोबिया, दाल से लगभग दोगुना। पनीर, नरम, और सबसे घना। सोया चंक्स, किसी सब्ज़ी में, नरम पकाकर। दही हर भोजन के साथ। और मछली, अगर खाते हैं, नरम और हड्डी निकालकर।

और शाम:

छाछ; भीगे बादाम (नरम और छिलका उतारकर); भुना चना अगर चबा सकें; और सत्तू का घोल।

और जहाँ चबाना मुश्किल है, दाल का पानी नहीं, पूरी दाल मसलकर; अंडा फेंटकर; पनीर कद्दूकस; और मूँगफली का पेस्ट। “हल्का” का मतलब “कम प्रोटीन” नहीं होना चाहिए।

कैल्शियम और विटामिन डी

हड्डी के लिए, और गिरने से बचने के लिए।

कैल्शियम भोजन से पहले, दूध, दही, पनीर, छाछ, तिल, रागी, सहजन की पत्तियाँ, हरी पत्तेदार सब्ज़ी, और छोटी मछली हड्डी के साथ।

और विटामिन डी, धूप दिन के बीच, हाथ-पैर खुले; और उम्र के साथ त्वचा की बनाने की क्षमता घटती है, इसलिए जाँच कराने लायक़ है।

और एक बात जो ख़ास तौर पर मायने रखती है: विटामिन डी का बुज़ुर्गों में गिरने के जोखिम पर एक स्वीकृत दावा है, यानी यह सिर्फ़ हड्डी की बात नहीं, गिरने की भी है।

फ़ाइबर और पानी, और कब्ज़

कब्ज़ बुज़ुर्गों में बहुत आम है, और उसकी वजहें जुड़ती हैं: कम फ़ाइबर, कम पानी, कम गतिविधि, और दवाएँ (दर्द की दवाएँ, आयरन, कैल्शियम, और कुछ रक्तचाप की दवाएँ)।

फ़ाइबर: सब्ज़ी, दाल, फल (छीलकर या नरम), साबुत अनाज, और पिसी अलसी।

और पानी, और यह सबसे ज़्यादा छूटता है।

उम्र के साथ प्यास की भावना कमज़ोर पड़ती है, यानी प्यास का इंतज़ार काम नहीं करता।

और बहुत-से बुज़ुर्ग जान-बूझकर पानी कम पीते हैं ताकि रात में उठना न पड़े, या पेशाब रिसने के डर से। यह एक असली और समझने योग्य वजह है, और इसका हल दिन में ज़्यादा और शाम को कम पीना है, न कि कुल कम करना।

और पानी की कमी बुज़ुर्गों में भ्रम का एक आम कारण है, जिसे परिवार “डिमेंशिया” समझ लेता है।

विटामिन बी12, और यह उम्र के साथ ज़्यादा ज़रूरी हो जाता है

उम्र के साथ अवशोषण घटता है, और पेट का अम्ल कम होना (atrophic gastritis) आम है, जो बी12 को भोजन से अलग करने के लिए ज़रूरी है।

और दो चीज़ें इसे और बढ़ाती हैं:

लंबे समय से मेटफ़ॉर्मिन, यह बी12 की कमी का एक दर्ज कारण है, और भारत में बहुत बड़ा समूह है।

और लंबे समय से एसिडिटी की दवा (PPI)।

तो: 60 के बाद, शाकाहारी भोजन में, या मेटफ़ॉर्मिन पर, बी12 जाँच कराने लायक़ है। हमने इस पर अलग विस्तार से लिखा है।

नमक, चीनी और चिकनाई

नमक, रक्तचाप के लिए घटाएँ, और वह अचार, पापड़, नमकीन तथा पैकेट के खाने से आता है।

और एक सावधानी: स्वाद कम लगने पर लोग नमक बढ़ा देते हैं। उसकी जगह नींबू, काली मिर्च, हींग, धनिया, जीरा, और ताज़ी जड़ी-बूटियाँ, ये स्वाद देते हैं बिना नमक बढ़ाए, और यह एक व्यावहारिक, काम का बदलाव है।

चिकनाई, बंद न करें। बुज़ुर्गों में कैलोरी की कमी ज़्यादा आम समस्या है, और घी तथा तेल कैलोरी का घना स्रोत हैं। प्रकार बदलें, सरसों, मूँगफली, तिल, चावल की भूसी, और ट्रांस फ़ैट हटाएँ।

चीनी, मधुमेह में मात्रा के हिसाब से, और बाक़ी में सीमित।

और यह ज़रूरी है: कम खाना असली ख़तरा है

यह लेख का उलटा-सा लगने वाला हिस्सा है और सबसे ज़रूरी है।

60 के बाद ज़्यादा खाना नहीं, कम खाना बड़ी समस्या है।

क्योंकि कम खाने से: मांसपेशी घटती है, कमज़ोरी आती है, गिरने का जोखिम बढ़ता है, घाव देर से भरते हैं, संक्रमण की आशंका बढ़ती है, और अस्पताल से उबरना मुश्किल हो जाता है।

और एक बात जो परिवार को जाननी चाहिए: हल्का बढ़ा हुआ वज़न बुज़ुर्गों में अपने आप नुक़सान का संकेत नहीं है, और बिना कोशिश वज़न घटना हमेशा चिंता की बात है।

तो 70 साल के व्यक्ति को “वज़न कम करो” कहने से पहले डॉक्टर से पूछना चाहिए। उस उम्र में लक्ष्य मांसपेशी और ताक़त बनाए रखना है, वज़न की संख्या नहीं।

वजन घटने के वे संकेत जो जाँच माँगते हैं

बिना कोशिश वज़न घटना, यह सबसे ज़रूरी एक संकेत है। कपड़े ढीले होना, या अंगूठी ढीली होना। खाना आधा छोड़ देना। और कमज़ोरी, जो रोज़ के काम रोके।

और जाँचें जो काम की हैं: हीमोग्लोबिन और फ़ेरिटिन, बी12, विटामिन डी, थायराइड, शुगर, गुर्दे और लिवर की जाँच, कैल्शियम, और एल्ब्यूमिन, और डॉक्टर की राय से थायराइड तथा कैंसर की जाँच, क्योंकि बिना वजह वज़न घटने की वजह ढूँढी जाती है।

कम खाने पर मात्रा कैसे बढ़ाएँ

व्यावहारिक तरीक़े, जो वाक़ई काम करते हैं।

छोटे हिस्से, ज़्यादा बार, तीन बड़े भोजन के बजाय पाँच-छह छोटे।

कैलोरी घनी बनाएँ, घी, तेल, मलाई, दूध का पाउडर, मूँगफली का पेस्ट, पिसे मेवे, खिचड़ी, दलिया, दाल या सूप में। छोटी मात्रा, ज़्यादा पोषण।

पानी भोजन के साथ कम, बीच में ज़्यादा, भोजन से पहले ज़्यादा पानी पेट भर देता है।

स्वाद बढ़ाएँ, ऊपर दी गई जड़ी-बूटियों और नींबू से।

साथ में खाना, अकेले खाने वाले कम खाते हैं। यह एक असली हस्तक्षेप है।

दाँत ठीक कराएँ, यह अक्सर पूरी समस्या हल कर देता है।

और दवाओं की समीक्षा, अगर भूख किसी दवा से गिरी है, तो वह बदली जा सकती है।

और जो आहार से बाहर है पर ज़्यादा काम करता है

वज़न उठाने वाली कसरत।

और यह ज़रूरी है: प्रोटीन अकेले मांसपेशी नहीं बनाता। प्रोटीन कच्चा माल है; निर्देश मांसपेशी पर भार डालने से आता है।

और बुज़ुर्गों में यह सुरक्षित और असरदार है, बैठकर-उठना, एड़ी उठाना, और हल्का वज़न। डॉक्टर या फ़िज़ियोथेरेपिस्ट की सलाह से।

और चलना, तथा संतुलन की कसरत, गिरने से बचाव के लिए।

उत्पाद की ईमानदार भूमिका

हम इस श्रेणी में निर्माण करते हैं, इसलिए सीमा साफ़।

जो कहा जा सकता है: प्रोटीन की सामान्य मांसपेशी द्रव्यमान और हड्डियों के रखरखाव में मान्यता प्राप्त भूमिका; कैल्शियम की सामान्य हड्डियों में भूमिका; विटामिन डी की कैल्शियम के अवशोषण, हड्डी, मांसपेशी के कार्य, और 60 से ऊपर अस्थिरता तथा मांसपेशी की कमज़ोरी से जुड़े गिरने के जोखिम को कम करने में मान्यता प्राप्त भूमिका; विटामिन बी12 और फ़ोलेट की मान्यता प्राप्त भूमिकाएँ; और शास्त्रीय सामग्री के लिए पारंपरिक उपयोग का कथन।

जो नहीं कहा जा सकता: कमज़ोरी का इलाज, मांसपेशी बनाना, उम्र का असर रोकना, या भूख बढ़ाना।

और सबसे ईमानदार बात: इस लेख की सबसे असरदार चीज़ें हैं, दाँत ठीक कराना, दवाओं की समीक्षा, हर भोजन में प्रोटीन, साथ में खाना, और वज़न उठाने वाली कसरत। इनमें से कोई हमारा उत्पाद नहीं है।

और पूरक की असली जगह दो है: जहाँ जाँच में कमी निकले, विटामिन डी, बी12 और आयरन, जो इस उम्र में सबसे आम हैं, और जहाँ भूख कम होने की वजह से थाली से पूरा न हो रहा हो। वहाँ एक प्रोटीन या पोषक पाउडर वाक़ई काम का है, और यह एक वैध ज़रूरत है।

डॉक्टर के पास कब

जल्दी:

  • बिना कोशिश वज़न घटना, यह सबसे ज़रूरी संकेत है
  • खाना आधा छोड़ना, या भूख लगातार कम
  • निगलने में दिक़्क़त, या खाते समय खाँसी, जिस पर हमने अलग लिखा है
  • दाँत या नक़ली दाँत ठीक न बैठना
  • मुँह सूखना, दवाओं की समीक्षा
  • कब्ज़ जो न सुधरे
  • बार-बार गिरना या लड़खड़ाना
  • कमज़ोरी जो रोज़ के काम रोके
  • भ्रम, और इसमें पानी की कमी तथा संक्रमण पहले देखे जाते हैं
  • मन लगातार उदास, या अकेलापन, और इसका इलाज है
  • मेटफ़ॉर्मिन पर हैं और बी12 कभी नहीं जाँचा
  • और गुर्दे, हृदय या मधुमेह की बीमारी, अपनी प्रोटीन, नमक और तरल की मात्रा पूछें

निचोड़

  1. “हल्का खाओ” इस उम्र में सबसे नुक़सानदेह सलाह है
  2. प्रोटीन की ज़रूरत बढ़ती है जबकि भूख घटती है, यही पूरी समस्या है
  3. पहले पूछें कि भूख क्यों कम है, आहार बाद में बदलें
  4. दाँत और नक़ली दाँत सबसे आम और अनदेखा कारण हैं
  5. कई दवाएँ स्वाद बदलती हैं और भूख घटाती हैं, समीक्षा कराएँ
  6. अकेले खाने वाले कम खाते हैं, साथ में खाना एक असली हस्तक्षेप है
  7. प्रति भोजन प्रोटीन की सीमा उम्र के साथ ऊँची होती है
  8. हर भोजन में प्रोटीन, और नाश्ता सबसे कमज़ोर है
  9. पतली दाल में प्रोटीन कम, गाढ़ी बनाएँ
  10. “हल्का” का मतलब “कम प्रोटीन” नहीं, मसलकर, नरम करके दें
  11. विटामिन डी का गिरने के जोखिम पर स्वीकृत दावा है, यह हड्डी से आगे की बात है
  12. प्यास की भावना कमज़ोर पड़ती है, प्यास का इंतज़ार न करें
  13. रात में उठने के डर से पानी कम करना आम है, दिन में ज़्यादा, शाम को कम
  14. पानी की कमी बुज़ुर्गों में भ्रम का आम कारण है
  15. बी12 का अवशोषण उम्र के साथ घटता है; मेटफ़ॉर्मिन और PPI इसे बढ़ाते हैं
  16. स्वाद कम लगने पर नमक की जगह नींबू, काली मिर्च, हींग, धनिया
  17. चिकनाई बंद न करें, कैलोरी की कमी बड़ी समस्या है
  18. कम खाना इस उम्र का असली ख़तरा है, ज़्यादा खाना नहीं
  19. बिना कोशिश वज़न घटना हमेशा जाँच माँगता है
  20. 70 की उम्र में “वज़न कम करो” कहने से पहले डॉक्टर से पूछें
  21. छोटे हिस्से, ज़्यादा बार; और कैलोरी घनी बनाएँ
  22. भोजन से पहले ज़्यादा पानी पेट भर देता है
  23. प्रोटीन अकेले मांसपेशी नहीं बनाता, भार ज़रूरी है
  24. सबसे असरदार चीज़ें: दाँत, दवाओं की समीक्षा, प्रोटीन, साथ, और कसरत

संरचना की जानकारी: Renewo 360 और multi blend powder। और पढ़ें: muscle loss with age and what helps, the four supplements worth considering after sixty, और बुज़ुर्गों के लिए रोज़ाना देखभाल।

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Reviewed by

Tarun Vashisht

Head of Ayurvedic Formulations & Regulatory Quality

Ayurvedic physician and pharmacognosy specialist with over 15 years of experience overseeing GMP-certified herbal extractions, classical proprietary formulations, and AYUSH/FSSAI regulatory compliance for direct-selling and retail nutraceutical brands.

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