Reviewed for accuracy and claims compliance: दावा-अनुपालन समीक्षा (claims review)
बवासीर में खानपान की भूमिका बहुत सीधी है, और यही बात इसे आसान बनाती है: खाने का एक ही काम है, मल को नरम रखना और ज़ोर लगाने की ज़रूरत ख़त्म करना।
जो चीज़ यह करती है वह मदद करती है। जो नहीं करती, वह बाक़ी सब कितनी भी “सेहतमंद” हो, इस शिकायत में ख़ास काम की नहीं है।
यह लेख जानकारी के लिए है, चिकित्सकीय सलाह नहीं। मल में लगातार ख़ून आना डॉक्टर से मिलने का कारण है, इसके कई कारण हो सकते हैं और सबमें बवासीर नहीं होती।
सबसे ज़रूरी बात: फ़ाइबर अकेले नहीं
यह वह ग़लती है जो सबसे ज़्यादा होती है और जो हालत बिगाड़ देती है।
फ़ाइबर पानी सोखकर मल को नरम और भारी बनाता है। अगर पानी कम हो, तो वही फ़ाइबर मल को और सख़्त कर देता है।
यानी ईसबगोल लेकर कम पानी पीना, इससे फ़ायदे की जगह नुक़सान होता है। बहुत से लोग फ़ाइबर शुरू करते हैं, हालत बिगड़ती है, और वे निष्कर्ष निकालते हैं कि फ़ाइबर उन्हें सूट नहीं करता।
नियम: एक चम्मच ईसबगोल के साथ पूरा एक गिलास पानी, और दिन भर में पर्याप्त पानी। पेशाब का रंग हल्का रहना चाहिए।
क्या खाएँ
घुलनशील फ़ाइबर, सबसे काम का
| चीज़ | कैसे लें |
|---|---|
| ईसबगोल (psyllium) | रात में, एक चम्मच, पूरे गिलास पानी के साथ |
| अलसी | पिसी हुई, एक चम्मच, दही या पानी में |
| चिया बीज | भिगोकर |
| ओट्स / दलिया | नाश्ते में |
ईसबगोल इस शिकायत में सबसे भरोसेमंद एक चीज़ है।
फल, छिलके सहित
- पपीता, पारंपरिक रूप से सबसे ज़्यादा सुझाया जाने वाला
- अमरूद, बीज सहित
- सेब और नाशपाती, छिलके सहित
- अंजीर और मुनक्का, रात में भिगोकर सुबह
- केला, पका हुआ
- आलूबुख़ारा
ध्यान: कच्चा या अधपका केला उल्टा असर कर सकता है। पका हुआ ही लें।
सब्ज़ियाँ
लौकी, तोरी, कद्दू, पालक, मेथी, भिंडी, गाजर, चुकंदर, पकी हुई और भरपूर मात्रा में।
दालें और साबुत अनाज
दाल, राजमा, चना, साबुत गेहूँ की रोटी, दलिया, बाजरा, जौ। मैदा की जगह ये।
दही और छाछ
पाचन और नियमितता दोनों के लिए उपयोगी।
पानी
इसे दोहराना ज़रूरी है क्योंकि यह आधा इलाज है।
क्या कम करें
| कम करें | क्यों |
|---|---|
| मैदा, ब्रेड, बिस्कुट, नमकीन, बेकरी | फ़ाइबर लगभग शून्य |
| बहुत तीखा और मिर्च-मसालेदार | जलन बढ़ाता है |
| तला हुआ और बाहर का खाना | पाचन धीमा, फ़ाइबर कम |
| लाल मांस की अधिकता | पचने में भारी, फ़ाइबर नहीं |
| शराब | निर्जलीकरण करती है |
| बहुत अधिक चाय/कॉफ़ी | वही कारण |
| पनीर और चीज़ की अधिकता | कब्ज़ बढ़ा सकती है |
| प्रोसेस्ड और पैकेट वाला खाना | फ़ाइबर कम, नमक ज़्यादा |
तीखे खाने के बारे में स्पष्टीकरण: मिर्च-मसाला बवासीर का कारण नहीं है। लेकिन तकलीफ़ के दिनों में यह जलन बढ़ा सकता है। इसलिए उन दिनों कम करना समझदारी है, हमेशा के लिए छोड़ना ज़रूरी नहीं।
एक व्यावहारिक दिन
यह सुझाव है, निर्देश नहीं।
| समय | क्या |
|---|---|
| सुबह उठते ही | एक-दो गिलास गुनगुना पानी; रात के भीगे मुनक्का या अंजीर |
| नाश्ता | दलिया या पोहा सब्ज़ियों के साथ; एक फल |
| दोपहर | साबुत गेहूँ की रोटी, दाल, पकी सब्ज़ी भरपूर, दही, सलाद |
| शाम | छाछ या एक फल |
| रात | हल्का भोजन, समय से |
| सोने से पहले | ईसबगोल, पूरे गिलास पानी के साथ, या त्रिफला |
| दिन भर | पानी, पानी, पानी |
त्रिफला की भूमिका
त्रिफला का पारंपरिक उपयोग नियमितता के लिए है और इस शिकायत में यह सीधे काम का है। रात में गुनगुने पानी के साथ।
शुरुआत कम मात्रा से करें, चौथाई चम्मच। ज़्यादा मात्रा से कुछ लोगों को ढीला मल होता है, और फिर वे घबराकर छोड़ देते हैं।
जो नहीं करना चाहिए
- तेज़ जुलाब नियमित रूप से लेना, यह आदत बनाता है और आँतों के लिए ठीक नहीं
- फ़ाइबर बढ़ाकर पानी न बढ़ाना, सबसे आम ग़लती
- एक ही दिन में बहुत ज़्यादा फ़ाइबर शुरू कर देना, धीरे-धीरे बढ़ाएँ, वरना गैस और फूलना होगा
- ख़ून आने को “बस बवासीर है” मानकर नज़रअंदाज़ करना
खाने से बाहर की वे बातें जो उतनी ही ज़रूरी हैं
- शौच की इच्छा को न टालें
- शौचालय में फ़ोन न ले जाएँ, ज़्यादा देर बैठना दबाव बढ़ाता है
- ज़ोर न लगाएँ, न आए तो उठ जाएँ
- पैरों के नीचे छोटी चौकी रखने से बैठने की स्थिति बेहतर होती है
- हर घंटे कुछ मिनट उठें अगर काम बैठने का है
विस्तार से उपाय बवासीर का इलाज और घरेलू उपाय में हैं।
डॉक्टर के पास कब जाएँ
- मल में लगातार ख़ून
- गाँठ बाहर आ गई हो और अंदर न जाए
- तेज़ दर्द, सूजन या बुख़ार
- वज़न अपने आप घट रहा हो
- शौच की आदत में अचानक लगातार बदलाव, ख़ासकर चालीस के बाद
- दो-तीन हफ़्ते में सुधार न हो
निचोड़
- खाने का एक ही काम है, मल नरम रखना
- फ़ाइबर और पानी साथ, अकेला फ़ाइबर उल्टा पड़ता है
- ईसबगोल सबसे भरोसेमंद
- पपीता, अमरूद, भीगे मुनक्का, छिलके वाले फल
- मैदा, तला हुआ और प्रोसेस्ड कम
- फ़ाइबर धीरे-धीरे बढ़ाएँ
- ख़ून आना डॉक्टर का विषय है
अगर आप इस श्रेणी में उत्पाद बनवा रहे हैं, तो Pilesovo 360 देखें, इसमें नागकेसर और हरीतकी के साथ ईसबगोल भी है, यानी वही तंत्र जो ऊपर बताया गया।
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